MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 18 The Tables Turned

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The Tables Turned Textual Exercises

Word Power

1. (a) Make a list of the describing words in the poem.
Answer:
The adjectives used in the poem are freshening, mellow, green, dull and endless, sweet, blithe, mean, ready, spontaneous, vernal, moral, meddling, beauteous, barren.

(b) Now change five adjectives, from the above list into nouns and use them in your sentences.
Answer:
Adjective             Noun
sweet                 sweetness
moral                 morality
green                 greenery
spontaneous     spontaneousness
ready                 readiness

Sentences :
1. The sweetness of music allures my mind.
2. Morality is absent in today’s youth.
3. The greenery in the village freshens my mood.
4. Spontaneousness of crimes these days is leading to a great crisis.
5. We prepared a room and meal in readiness for their arrival.

2. Match the words with their meanings.
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 18 The Tables Turned 1
Answer:
1. → (c)
2. → (d)
3. → (e)
4. → (a)
5. → (b)

3. Express the idea contained in the following line.
Books! ’tis a dull and endless strife
Answer:
The poet talks about books in this line. He says that the journey with books is boring and at the same time it is continuous (i.e., never ending)

4. Find out action words in the first two stanzas of the poem.
Answer:
quit, grow, clear, spread.

5. Complete the following lines of the poem.
Answer:
Enough of science and of Art;
Close up those barren leaves;
Come forth, and bring with you a heart
That watches and receives.

How Mach I Understood?

A. Answer the following questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What does the poet say in the first stanza of the poem?
(व्हॉट डज़ द पोऍट से इन द फर्स्ट स्टैन्ज़ा ऑफ द पोऍम?)
कविता के प्रथम पद्यांश में कवि क्या कहता है?
Answer:
In the first stanza the poet says to leave books and stop reading too much as it would make one bent and tired. He asks to remove the expression of thought and perplexity that comes from reading.
(इन द फर्स्ट स्टैन्जा द पोऍट सेज़ टू लीव बुक्स एण्ड स्टॉप रीडिंग टू मच एज इट वुड मेक वन बेन्ट एण्ड टायर्ड। ही आस्कस् टू रिमूव एक्सप्रेशन ऑफ थॉट एण्ड पर्पलैक्सिटी दैट कम्स फ्रॉम रीडिंग।)
कविता के प्रथम पद्यांश में कवि किताबों को छोड़ने व ज्यादा न पढ़ने के लिए कहता है क्योंकि इससे व्यक्ति की देह झुक जायेगी और वह थक जायेगा। वह अपने चेहरे से पढ़ने के कारण उत्पन्न सोचनीय व जटिल भाव को हटाने के लिए कहता है।

Question 2.
Why does the poet want bis readers to leave their books?
(व्हायडज़ द पोऍट वॉन्ट हिज़ रीडर्सट्र लीव देयर बुक्स?)
कवि अपने पाठकों से किताबों को छोड़ने के लिए क्यों कहता है?
Answer:
The poet wants his readers to leave their books because they make one bent and appear tensed, troubled and perplexed due to thinking after reading.
(द पोऍट वॉन्ट्स हिज़ रीडर्स टू लीव देयर बुक्स बिकॉज़ दे मेक वन बेन्ट एण्ड अपीयर टेन्स्ड्, ट्रबल्ड् एण्ड पप्लैक्स्ड् ड्यू टू थिंकिंग आफ्टर रीडिंग।)
कवि चाहता है कि उसके पाठक किताबें पढ़ना छोड़ दें क्योंकि पढ़ने के बाद सोचने से उनकी देह झुक जायेगी तथा वे चिन्तित, परेशान व जटिल लगेंगे।

Question 3.
What does the poet say about books?
(व्हॉट डज़ द पोऍट से अबाऊट बुक्स?)
कवि किताबों के बारे में क्या कहता है?
Answer:
The poet says that books are dull and endless strife.
(द पोऍट सेज़ दैट बुक्स आर डल एण्ड ऍन्ड्ले स स्ट्राइफ।)
कवि कहता है कि किताबें नीरस व न खत्म होने वाला संघर्ष हैं।

Question 4.
Who should be our teacher according to the poet?
(हू शुड बी अवर टीचर एकॉर्डिंग टू द पोऍट?)
कवि के अनुसार हमारा शिक्षक कौन होना चाहिए?
Answer:
According to the poet nature should be our teacher.
(एकॉर्डिंग टू द पोऍट नेचर शुड बी अवर टीचर।)
कवि के अनुसार प्रकृति हमारी शिक्षक होनी चाहिए।

Question 5.
What can the forest teach us?
(व्हॉट कैन द फॉरेस्ट टीच अस)
वन हमें क्या सिखा सकता है?
Answer:
The forest can teach us about the difference between good and evil more than any sage.
(द फॉरेस्ट कैन टीच अस अबाऊट द डिफ्रेन्स बिटवीन गुड एण्ड ईविल मोर दैन एनी सेज।)
वन किसी भी साधु से ज्यादा हमें अच्छाई व बुराई के भेद को समझा सकते हैं।

Question 6.
What does Nature bring and man destroy?
(व्हॉट डज़ नेचर ब्रिग एण्ड मैन डिस्ट्रॉय)
प्रकृति क्या देती है व मानव क्या नष्ट करता है?
Answer:
Nature brings us wisdom, health and knowledge while a man destroys natural beings provided by nature.
(नेचर ब्रिग्स अस विज़डम, हैल्थ एण्ड नॉलेज व्हाइल अ मैन डिस्ट्रॉइज़ नेचुरल बीइंग्स प्रोवाइडेड बाइ नेचर।)
प्रकृति हमें विवेक, स्वास्थ्य व ज्ञान देती है व मनुष्य प्राकृतिक जीवों का नाश करता है।

Question 7.
What type of heart does the poet want?
(व्हॉट टाइप ऑफ हार्ट डज़ द पोऍट वॉन्ट?)
कवि किस प्रकार का दिल चाहता है?
Answer:
The poet wants the heart that watches or observes natural beauty and receives natural wealth.
(द पोऍट वॉन्ट्स द हार्ट दैट वॉचेज़ और ऑब्जर्व नैचुरल ब्यूटी एण्ड रिसीव्स नैचुरल वैल्थ।)
‘कवि वो दिल चाहता है जो प्राकृतिक सुन्दरता को देखे या उसका अवलोकन करे व प्राकृतिक सम्पदा को पाये।

B. Answer the following questions. (Three or four sentences.)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why does the poet urge the readers to leaves their books?
(व्हाय डज़ द पोऍट अर्ज द रीडर्स टू लीव देयर बुक्स?)
Answer:
The poet asks the readers to leave their books because it is better to know and enjoy nature than to seek learning and wisdom in books. Excessive reading of books provides tensed, perplexed and troublesome look and makes one bent while nature adds to one’s health.

(द पोऍट आस्कस् द रीडर्स टू लीव देयर बुक्स बिकॉज़ इट इज़ बैटर टू नो एण्ड एन्जॉय नेचर दैन टू सीक लर्निग एण्ड विज़डम इन बुक्स। एक्सेसिव रीडिंग ऑफ बुक्स प्रोवाइड्स् टेन्सड, पप्लैक्सड् एण्ड ट्रबलसम लुक एण्ड मेक्स वन बेन्ट व्हाइल नेचर ऐड्स टू वन्स हैल्थ।)

कवि पाठकों से किताबों को छोड़ने के लिए कहता है क्योंकि किताबों से ज्ञान व विवेक प्राप्त करने के बजाय प्रकृति का जानना व उसका आनन्द लेना ज्यादा बेहतर है। अत्यधिक किताबों को पढ़ने से व्यक्ति परेशान व जटिल नजर आता है। व उसकी देह झुक जाती है। जबकि प्रकृति उसके स्वास्थ्य का सुधार करती है।

Question 2.
What sort of lessons, according to the poet, can Nature teach us?
(व्हॉट सॉर्ट ऑफ लैसन्स एकार्डिंग टू द पोऍट, कैन नेचर टीच अस?)
कवि के अनुसार, प्रकृति हमें क्या सिखा सकती है?
Answer:
Nature teaches us to be happy and have wisdom. The sweet music of throstle and linnet is so enjoyable that it gives all happiness and wisdom. By observing and enjoying nature one can learn more than what he learns from books.

(नेचर, टीचेज़ अस टू बी हैप्पी एण्ड हैव विज़डम। द स्वीट म्यूजिक ऑफ थ्रॉस्ल एण्ड लिनेट इज़ सो एन्जॉयेबल दैट इट गिव्स ऑल हैप्पिनेस एण्ड विज़डम। बाइ ऑब्जविंग एण्ड एन्जॉइंग नेचर वन कैन लर्न मोर दैन व्हॉट ही लर्स फ्रॉम बुक्स।)

प्रकृति हमें खुश रहने व विवेकशील होने की शिक्षा देती है। चिड़ियों का मनोरम संगीत इतना आनन्दमय होता है कि वह सारी खुशी व विवेक दे देता है। प्रकृति का आनन्द लेने व उसको निहारने से एक व्यक्ति किताबों से कहीं ज्यादा ज्ञान अर्जित कर सकता है।

Question 3.
What sort of things does Nature have?
(व्हॉट सॉर्ट ऑफ थिंग्स डज़ नेचर हेव?)
प्रकृति के पास किस प्रकार की वस्तुएँ हैं?
Answer:
Nature has wealth of beauty that blesses our minds and hearts, wisdom that comes from good health, and truth that comes from cheerfulness.
(नेचर हैज़ वैल्थ ऑफ ब्यूटी दैट ब्लैसेस अवर माइन्ड्स एण्ड हार्टस्, विज़डम दैट कम्स फ्रॉम गुड हैल्थ एण्ड टूथ दैट कम्स फ्रॉम चीयरफुलनेस।)
प्रकृति के पास खूबसूरती का खजाना है जो हमारे दिलोदिमाग को प्रफुल्लित करता है, विवेक है जो अच्छे स्वास्थ्य से आता है व सच है जो प्रसन्नता से आता है।

Question 4.
What does our meddling intellect do?
(व्हॉट डज़ अवर मेडलिंग इन्टलेक्ट डू?)
हमारी हस्तक्षेप वाली प्रकृति क्या करती है?
Answer:
Our meddling intellect destroys the natural beauty. It kills natural beings.
(अवर मेडलिंग इन्टलेक्ट डिस्ट्रॉयज़ द नैचुरल ब्यूटी। इट किल्स नैचुरल बीइंग्स।)
हमारी हस्तक्षेप वाली प्रकृति प्राकृतिक सुन्दरता को नष्ट करती है। वह प्राकृतिक जीवों का नाश करती है।

Question 5.
Describe the advantages of being close to Nature than being busy reading books.
(डिस्क्राइब द एडवेन्टिजिज़ ऑफ बीइंग क्लोज़ टू नेचर दैन बीइंग बिज़ी रीडिंग बुक्स।)
किताबें पढ़ने में व्यस्त रहने के बजाय प्रकृति के करीब रहने से होने वाले फायदों का वर्णन करिए।
Answer:
Being close to nature gives peace and happiness to one’s mind and heart. Apart from giving health it also provides truth, cheerfulness and wisdom. Natural beauty soothes one’s mind, heart and adds to one’s beauty. Confinement to books makes one isolated and perplexed. It drives away health and freshness from one’s face.

(बीइंग क्लोज़ टू नेचर गिव्स पीस एण्ड हैप्पिनेस टू वन्स माइन्ड एण्ड हार्ट। अपार्ट फ्रॉम गिविंग हैल्थ इट ऑल्सो प्रोवाइड्स ट्रथ, चीयरफुलनेस एण्ड विज़डम। नैचुरल ब्यूटी सूदेज़ वन्स माइण्ड, हार्ट एण्ड ऐड्स टू वन्स ब्यूटी। कन्फाइनमेण्ट टू बुक्स मेक्स वन आइसोलेटिड एण्ड पर्पलैक्सड् इट ड्राइव्स अवे हैल्थ एण्ड फ्रेशनेस फ्रॉम वन्स फेस।)

प्रकृति के करीब रहने से व्यक्ति के दिलोदिमाग को शान्ति व सुकून मिलता है। यह व्यक्ति के स्वास्थ्य को सुधारने के अलावा उसे सच, प्रसन्नता व विवेक भी प्रदान करती है। प्राकृतिक सुन्दरता से व्यक्ति के दिलोदिमाग को सुकून मिलता है व उसकी स्वयं की सुन्दरता में बढ़ावा होता है। जबकि किताबों में सिमटकर रहने से व्यक्ति अकेला व जटिल हो जाता है। उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है व उसके चेहरे की सुन्दरता चली जाती है।

Question 6.
How does Nature keep us healthy?
(हाउ डज़ नेचर कीप अस हैल्दी?)
प्रकृति हमें कैसे स्वस्थ रखती है?
Answer:
Nature keeps us healthy by soothing our mind and heart with its beauty. In the lap of nature one forgets all his tensions and troubles. The brightness of sun, the green fields, sweet songs of birds all give us peace and happiness adding to our health and beauty.

(नेचर कीप्स अस हैल्दी बाइ सूदिंग अवर माइन्ड एण्ड हार्ट विद इट्स् ब्यूटी। इन द लैप ऑफ नेचर वन फॉरगेट्स् ऑल हिज़ टेन्शन्स एण्ड ट्रबल्स। द ब्राइटनेस ऑफ सन, द ग्रीन फील्ड्स, स्वीट साँग्स ऑफ बर्ड्स ऑल गिव अस पीस एण्ड हैप्पिनेस ऐडिंग टू अवर हैल्थ एण्ड ब्यूटी।)

प्रकृति हमारे दिलोदिमाग को सुकून देकर हमें स्वस्थ रखती है। प्रकृति की गोद में व्यक्ति अपनी सारी चिन्ताएँ व परेशानियाँ भूल जाता है। सूर्य की चमक, हरे-भरे खेत, चिड़ियों का मीठा संगीत सब उसे शान्त व प्रसन्न करते हैं व उसके स्वास्थ्य व सुन्दरता को बढ़ाते हैं।

Question 7.
Write the central idea of the poem.
(राईट द सैण्ट्रल आइडिया ऑफ द पोऍम।)
कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
Answer:
In this poem the poet says that it is better to know and enjoy Nature than to seek learning and wisdom in books. We should allow our minds and hearts to be shaped and formed by Nature than to try to analyse and reason out things. We kill beauty and life when we dissect other beings created by Nature.

Listening Time

The teacher will read the examples given in the book and students will repeat them.
(पुस्तक में दिये गये उदाहरणों को दोहराओ।)
Answer:
Sentences along with their pronunciations are given here as an aid to the students.

1. He’ll come at nine.
ही विल कम एट नाइन।

2. Come for coffee.
कम फॉर कॉफी।

3. Come for a game of chess.
कम फॉर अ गेम ऑफ चेस।

4. I’ve come from Delhi.
आई हैव कम फ्रॉम डेल्ही।

5. He is a friend of my brother.
ही इज़ अ फ्रेन्ड् ऑफ माइ ब्रदर।

6. He’s gone to market.
ही हैज़ गौन टू मार्केट।

7. Try to ask him.
ट्राइ टू आस्क् हिम।

Speaking Time

Which school subjects are you good at? Read the table given in the book and talk to your partner about these subjects.
(पुस्तक में दी गई तालिका को पढ़कर अपने सहपाठी से बात कशे)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Writing Time

Write the poem in prose form in your own words.
(कविता को अपने शब्दों में लिखो।)
Answer:
It is better that one should leave the books and enjoy the beauty of nature. Reading of books makes one bent and adversely affects the physical beauty. Books provide dullness and perplexity while nature is freshening and beauteous. It soothes one’s mind and heart. The sunshine, song of birds, green fields, all are natural wealth which provide us comfort, cheerfulness and wisdom. Natural beauty can teach us more than books and saints. Nature provides us so much but humans intrude in it and destroy it by killing natural beings.

Things to do

Discuss with your friends your experience and joy that you got from watching the beauty of the sky, the rivers, the mountains etc. and share your experiences with your friends.
(अपने मित्रों के साथ अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के आनन्द को बाँटें।)
Answer:
Students can share their experience of enjoying natural beauty with their friends themselves.
(छात्र अपने मित्रों के साथ अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के आनन्द का अनुभव बाँटें।)

The Tables Turned Central Idea of the Poem

In this poem the poet says that it is better to know and enjoy Nature than to seek learning and wisdom in books. We should allow our minds and hearts to be shaped and formed by Nature than to try to analyse and reason out things. We kill beauty and life when we dissect other beings created by Nature.

The Tables Turned Difficult Word Meanings

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 18 The Tables Turned 2

The Tables Turned Summary, Pronunciation & Translation

Up! up! my Friend, and quite your books;
Or surely you’ll grow double:
Up ! Up! my Friend and clear your looks;
Why all this toil and trouble?

(अप! अप! माई फ्रेण्ड, ऐण्ड क्विट यॉर बुक्सः
ऑर श्योरली यू विल ग्रो डबल:
अप! अप! माई फ्रेण्ड ऐण्ड क्लीयर यॉर लुक्स;
व्हाई ऑल दिस टॉएल ऐण्ड ट्रबल)

अनुवाद :
उठो!उठो !मेरे मित्र,और छोड़ोअपनीपुस्तकों को;
नहीं तो निश्चित रूप से दोहरे हो जाओगे (अत्यधिक पढ़ाई के कारण झुकी हुई काठी का हो जाना।)
उठो! उठो! मेरे मित्र और चेहरे पर हँसी लाओ (चेहरे से गम्भीरता के भाव हटाओ)
किसलिए इतना कठिन श्रम और परेशानी?

The sun, above the mountain’s head,
A freshening lustre mellow
Through all the long green fields has spread,
His first sweet evening yellow.

(द सन, अबव द माऊण्टेन्स हैड,
अ फ्रेशनिंग लस्टर मेलो
श्रू ऑल द लॉन्ग ग्रीन फील्ड्स हैज़ स्प्रेड,
हिज़ फर्स्ट स्वीट ईवनिंग यलो.)

अनुवाद :
पर्वत की चोटी के ऊपर दिख रहा सूर्य
ताज़गी भरी रंगीन आभा लिए
उसने दूर तक फैले खेतों-मैदानों में बिखरा दिया है
अपना साँझ का प्रथम मृदुल पीत रंग (पीला प्रकाश)

Books! ’tis a dull and endless strife:
Come, hear the woodland linnet,
How sweet his music! on my life,
There’s more wisdom in it.

(बुक्स! टिस अ डल ऐण्ड एण्डलेस स्ट्राईफ:
कम, हीयर द वुडलैण्ड लिनेट,
हाऊ स्वीट हिज़ म्यूजिक! ऑन माई लाईफ,
देयर्स मोर विज़डम इन इट.)

अनुवाद :
पुस्तकें! हैं एक नीरस, अन्तहीन संघर्ष
आओ, वन के लिनेट पक्षी को सुनो
कितना मधुर है उसका संगीत (गान)! कसम से,
कहीं ज़्यादा ज्ञान है उसके गान में।

And hark! how blithe the throstle sings!
He too, is no mean preacher:
Come forth into the light of things,
Let Nature be your teacher.

(ऐण्ड हार्क! हाऊ ब्लाईद द थ्रॉसल सिंग्ज़!
ही टू,’इज़ नो मीन प्रीचरः
कम फोर्थ इण्ट्र द लाईट ऑफ थिंग्ज़,
लेट नेचर बी यॉर टीचर.)

अनुवाद :
और सुनो ध्यान से! कैसे प्रफुल्लित हो कस्तूरी पक्षी गा रही है
वह भी कोई कमतर उपदेशक नहीं है:
आओ आगे चीज़ों की रोशनी में (जीवन को सरल बनाओ)
और प्रकृति को गुरु बनाओ।

She has a world of ready wealth,
Our minds and hearts to bless
Spontaneous wisdom breathed by health,
Truth breathed by cheerfulness.

(सी हैज़ अ वर्ल्ड ऑफ रेडी वेल्थ,
आवर माईण्ड्स ऐण्ड हार्स टू ब्लेस
स्पॉन्टेनिअस विजडम ब्रीद्ड बाई हैल्थ,
ट्रथ ब्रीड बाई चीयरफुलनेस.)

अनुवाद :
उसके (प्रकृति) के पास ज्ञान रूपी धन का भण्डार है,
है आशीर्वाद हमारे मन व हृदय के लिए
है स्वास्थ्य रूपी सहज स्वाभाविक ज्ञान,
और है प्रसन्नचित्तता।

One impulse from a vernal wood
May teach you more of man,
Of moral evil and of good,
Than all the sages can.

(वन इम्पल्स फ्रॉम अ वर्नल वुड
मे टीच यू मोर ऑफ मैन,
ऑफ मोरल ईविल ऐण्ड ऑफ गुड,
दैन ऑल द सेजिस कैन.)

अनुवाद :
बसन्ती वन का एक संवेग
तुम्हें मनुष्य के बारे में अधिक सिखा देगा,
नैतिकता, दुष्टता और अच्छाई के बारे में,
सभी ऋषि-मुनियों से अधिक।

Sweet is the lore which Nature brings
Our meddling intellect
Mis-shapes the beauteous forms of things:
We murder to dissect.

(स्वीट इज़ द लोर व्हिच नेचर ब्रिग्ज़;
आवर मेडलिंग इन्टलेक्ट
मिस-शेप्स द ब्यूटियस फॉर्स ऑफ थिंग्ज़:
वी मर्डर टू डिसेक्ट.)

अनुवाद :
मधुर है वो ज्ञान जो प्रकृति देती है;
हमारी हस्तक्षेप करने वाली अक्ल (समझ)
चीज़ों की खूबसूरत आकृतियों को बिगाड़ देती है;
जिनकी हम विच्छेदन हेतु हत्या करते हैं।
(जीव-जन्तुओं का विच्छेदन कर अन्दर के अंगों की जानकारी हासिल करना।)

Enough of Science and of Art;
Close up those barren leaves;
Come forth, and bring with you a heart
That watches and receives.

(एनफ ऑफ साईन्स ऐण्ड ऑफ आर्ट;
क्लोज़ अप दोज़ बैरन लीव्ज़;
कम फोर्थ, ऐण्ड ब्रिग विद यू अ हार्ट
दैट वॉचेस ऐण्ड रिसीव्ज़.)

अनुवाद :
विज्ञान और कला की पढ़ाई बहुत हुई;
बन्द करो पुस्तकों के उन सूखे ऊसर पन्नों को;
आगे जाओ, और साथ में लाओ अपना ऐसा हृदय
जो देखता भी है और ग्रहण भी करता है।

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