MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 22 औरंगजेब तथा मुगल साम्राज्य का पतन

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 22 औरंगजेब तथा मुगल साम्राज्य का पतन

MP Board Class 7th Social Science Chapter 22 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) जाटों का निवास मुख्य रूप से किन नगरों के आस-पास था ?
(अ) दिल्ली और आगरा
(ब) आगरा और मथुरा
(स) मथुरा और भरतपुर
(द) आगरा और झाँसी।
उत्तर:
(ब) आगरा और मथुरा

(2) पानीपत का तृतीय युद्ध किस वर्ष में हुआ था ?
(अ) सन् 1526
(ब) सन् 1556
(स) सन् 1560
(द) सन् 1761
उत्तर:
(द) सन् 1761

(3) यूरोपीय देशों में भारत की किन वस्तुओं की विशेष माँग थी?
(अ) वस्त्र और मसाले
(ब) वस्त्र और चाँदी
(स) मसाले और रत्न
(द) मसाले और घोड़े।
उत्तर:
(अ) वस्त्र और मसाले।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह करने वाले बुन्देले नेता ………….. तथा ……………. थे।
(2) गुरुद्वारा शीशगंज …………..के बलिदान स्थान पर स्थित है।
(3) नादिरशाह का आक्रमण सन् …………… में हुआ था।
(4) औरंगजेब की ………….. फलस्वरूप मुगल प्रशासन ढीला पड़ गया।
उत्तर:
(1) चम्पतराय, छत्रसाल
(2) गुरुतेगबहादुर
(3) सन् 1739
(4) धार्मिक कट्टरता के।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 22 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) औरंगजेब ने हिन्दुओं पर कौन से कर लगाए थे ?
उत्तर:
औरंगजेब ने हिन्दुओं पर जजिया और तीर्थयात्रा कर लगाए थे।

(2) सतनामियों के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
सतनामी सत्य के नाम के उपासक थे तथा पुजारी जैसी वेशभूषा पहनते थे। इनका मुख्य केन्द्र नारनौल और मेवाड़ था। औरंगजेब के धार्मिक अत्याचारों के विरुद्ध इन्होंने विद्रोह किया।

(3) औरंगजेबकी किसनीति के कारण उसके उत्तराधिकारी अयोग्य रह गए ?
उत्तर:
औरंगजेब के अविश्वासी स्वभाव के कारण उसके उत्तराधिकारी अयोग्य रह गए।

(4) नादिरशाह तथा अहमदशाह अब्दाली के आक्रमणों के क्या परिणाम हुए ?
उत्तर:
इन दोनों के आक्रमणों से मुगल शासक तथा मराठे पराजित हो गए तथा मुगल साम्राज्य दिल्ली के आस-पास के क्षेत्र तक सीमित रह गया।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 22 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) मुगल साम्राज्य के पतन के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुगल साम्राज्य के पतन के कारण:
(1) साम्राज्य का बड़ा होना – मुगल साम्राज्य के अत्यधिक विशाल हो जाने के कारण सम्पूर्ण साम्राज्य पर नियन्त्रण करना कठिन था तथा उसके अयोग्य उत्तराधिकारी साम्राज्य की रक्षा नहीं कर सके।

(2) उत्तराधिकार के नियम का अभाव – उत्तराधिकार के लिए कोई नियम नहीं था। प्रत्येक शासक की मृत्यु के पश्चात् उनके पुत्रों में राज्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष होता रहा जिससे साम्राज्य भी कमजोर होता गया।

(3) औरंगजेब का अविश्वासी स्वभाव एवं कट्टर धार्मिक नीति – औरंगजेब को अपने पुत्रों पर भी विश्वास नहीं था। वह अपने पुत्रों को राजनैतिक एवं सैनिक शिक्षा प्रदान नहीं कर सका जिससे वे अयोग्य रह गए। औरंगजेब की अनुदार व असहिष्णुतापूर्ण धार्मिक नीति के कारण सिक्खों, जाटों, सतनामियों, मराठों आदि के द्वारा अपने धर्म की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों को कुचलने के प्रयास में निरन्तर युद्ध चलते रहे, इसके फलस्वरूप मुगल साम्राज्य का पतन हुआ।

(4) औरंगजेब की दक्षिण भारत नीति – औरंगजेब के अन्तिम 25 वर्ष दक्षिण भारत में युद्ध में व्यतीत हुए जिससे उत्तर भारत में प्रशासन पर मुगलों की पकड़ कम हो गई तथा युद्धों के कारण राजकोष भी खाली हो गया।

(5) विलासी शासक एवं सरदार – मुगल शासकों की विलासिता और स्थापत्य-प्रेम के कारण साम्राज्य की आर्थिक स्थिति लड़खड़ाने लगी। राजसी ठाठ-बाट व भवन निर्माण में अत्यधिक धन व्यय किया गया। मुगल सरदारों की विलासिता, चारित्रिक दुर्बलता, सम्राट के प्रति निष्ठा में कमी तथा आपसी गुटबाजी मुगल साम्राज्य के पतन का कारण बनी।

(6) विदेशी आक्रमण – मुगल साम्राज्य की दुर्बलता का लाभ उठाकर ईरान के शासक नादिरशाह ने सन् 1739 में आक्रमण कर दिया। उसने दिल्ली में कत्लेआम कराया तथा शाहजहाँ का तख्ते ताऊस, कोहिनूर हीरा तथा 70 करोड़ की सम्पदा ईरान ले गया। 14 जनवरी, 1761 ई. के दिन नादिरशाह के सेनापति अहमदशाह अब्दाली तथा मराठों के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ, इसमें मराठे पराजित हो गए। इन दोनों के आक्रमणों से मुगल साम्राज्य दिल्ली के आस-पास तक सीमित रह गया।

(7) अंग्रेजों का कब्जा – अंग्रेज व्यापारी धीरे-धीरे एक राजनैतिक सत्ता बन गए। अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत के सभी मुगल साम्राज्य वाले भागों पर कब्जा कर लिया।

(8) नौ सैना की कमी – यूरोप की शक्तिशाली नौसेना के आगे मुगल ठहर न सके। मुगल साम्राज्य में नौ सेना की कमी उन्हें घातक सिद्ध हुई।

(9) यूरोपीय शक्तियाँ – यूरोप में भारतीय वस्त्र और मसालों की बहुत माँग थी अतः पुर्तगाल, हॉलैण्ड, फ्रांस और इंग्लैण्ड के व्यापारियों ने भारत से व्यापार करने के प्रयास तेज कर दिए। उन्होंने व्यापारिक कम्पनियाँ तथा सामान रखने के लिए गोदाम स्थापित किए और सेना भी रखने लगे। मुगल साम्राज्य के दुर्बल होते ही स्वतन्त्र राज्यों में संघर्ष होने लगे। इसका लाभ उठाकर । विदेशी अपनी नौ सेना तथा शक्ति के बल पर भारत की राजनीति । में दखल देने लगे।

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