MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 17 Torch Bearers

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MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 17 Torch Bearers

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Torch Bearers Textual Exercises

Word Power

A. Match the words with their meanings.

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 17 Torch Bearers 1
Answer:
1. → (d)
2. → (c)
3. → (a)
4. → (e)
5. → (b)

B. Derive five new words by rearranging the letters of each new word given below.
(दिये गये शब्दों से पाँच नये शब्द बनाओ।)
Answer:

  1. inhospitable – hospital, table, pitiable, tin, shoe.
  2. flame – meal, male, leaf, lame, fame.
  3. disconsolate – consolate, late, console, cool, lost.
  4. straight – right, sight, trait, gait, tight.

How Much Have I Understood?

A. Answer the following questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What did the old merchant decide about his money?
(व्हॉट डिड द ओल्ड मर्चेन्ट डिसाईड अबाऊट हिज़ मनी?)
बूढे व्यापारी ने अपने धन के विषय में क्या निश्चय किया?
Answer:
The old merchant decided to give all his money to that son who proved himself to be cleverer of the two.
(द ओल्ड मर्चेन्ट डिसाइडेड टू गिव ऑल हिज़ मनी टू दैट सन हू प्रूव्ड हिमसेल्फ टू बी द क्लेवरर ऑफ द टू।)
बूढ़े व्यापारी ने निश्चय किया कि वह अपना सारा धन दोनों में से उस बेटे को देगा जो ज्यादा चतुर होगा।

Question 2.
Why did the old merchant give his sons a test?
(व्हाय डिड द ओल्ड मर्चेन्ट गिव हिज़ सन्स अ टेस्ट?)
बूढ़े व्यापारी ने अपने बेटों का इम्तिहान क्यों लिया?
Answer:
The old merchant gave his sons a test because he wanted to find out which of his two sons was cleverer.
(द ओल्ड मर्चेन्ट गेव हिज़ सन्स अ टेस्ट बिकॉज़ ही वॉन्टेड टू फाइन्ड आऊट व्हिच ऑफ हिज़ टू सन्स वॉज़ क्लैवरर।)
बूढ़े व्यापारी ने बेटों का इम्तिहान लिया क्योंकि वो यह जानना चाहता था कि उसके दोनों बेटों में से कौन ज्यादा चतुर है।

Question 3.
What was the test given to the two sons by the old merchant?
(व्हॉट वॉज़ द टेस्ट गिवन टू द टू सन्स बाइ द ओल्ड मर्चेन्ट?)
दोनों बेटों को बूढ़े व्यापारी ने परीक्षण के लिए क्या कार्य दिया?
Answer:
The old merchant gave one rupee to each son and asked them to go out separately and buy something which may fill the house.
(‘द ओल्ड मर्चेन्ट गेव वन रूपी टू ईच सन एण्ड आस्क्ड देम टू गो आऊट सेपरेट्लि एण्ड बाइ समथिंग व्हिच मे फिल द हाऊस।)
बूढ़े व्यापारी ने अपने दोनों बेटों को एक-एक रुपया दिया व उन्हें कहा कि वे उससे कुछ ऐसा खरीदकर लायें जिससे पूरा घर भर जाये।

Question 4.
How much time was given to the two sons by the old merchant?
(हाउ मच टाइम वॉज़ गिवन टू द टू सन्स बाइ द ओल्ड मर्चेन्ट?)
दोनों बेटों को बूढ़े व्यापारी ने कितना समय दिया?
Answer:
The old merchant gave the two sons a couple of days.
१द ओल्ड मर्चेन्ट गेव द टू सन्स अ कपल ऑफ डेज़।)
बूढ़े व्यापारी ने दोनों बेटों को दो दिनों का वक्त दिया।

Question 5.
What did the first son buy for a rupee?
(व्हॉट ड्डि द फर्स्ट सन बाइ फॉर अ रूपी?)
पहले बेटे ने एक रुपये से क्या खरीदा?
Answer:
The first son bought a load of hay for a rupee.
(द फर्स्ट सन बॉट अ लोड ऑफ हे फॉर अ रूपी।)
पहले बेटे ने एक रुपये में घास का गट्ठर खरीदा।

Question 6.
How did the second son spend his rupee?
(हाउ डिड द सैकण्ड सन स्पेन्ड हिज रूपी?)
दूसरे बेटे ने अपना रुपया कैसे खर्च किया?
Answer:
The second son spent his rupee in buying candles.
(द सैकण्ड सन स्पेन्ट हिज़ रूपी इन बाइंग कैण्डल्स।)
दूसरे बेटे ने अपने रुपये से मोमबत्तियाँ खरीदी।

Question 7.
What should we do if we love our country?
(व्हॉट शुड वी डू इफ वी लव आवर कन्ट्री?)
अगर हम अपने देश से प्यार करते हैं तो हमें क्या करना चाहिए?
Answer:
If we love our country we should try to be good citizens.
(इफ वी लव अवर कण्ट्री वी शुड ट्राइ. टू बी गुड सिटिजन्स।)
अगर हम अपने देश से प्यार करते हैं तो हमें अच्छा नागरिक बनाना चाहिए।

Question 8.
Why did Guru Nanak spend the night in the open?
(व्हाय डिड गुरु नानक स्पैण्ड द नाईट इन द ओपन?)
गुरु नानक ने रात खुले में क्यों बिताई?
Answer:
Guru Nanak spent the night in the open because the villagers were rude and inhospitable and did not let him stay anywhere in the village.
(गुरु नानक स्पेन्ट द नाईट इन द ओपन बिकॉज़ द विलेजर्स वर् रूड एण्ड इन्हॉस्पिटेबल एण्ड डिड नॉट लेट हिम स्टे एनीव्हेयर इन द विलेज।)
गुरु नानक ने रात खुले में बिताई क्योंकि गाँव वाले रूखे थे व आतिथ्य भाव वाले नहीं थे व उन्होंने उन्हें गाँव में रहने नहीं दिया।

Question 9.
How did the villagers of the first village treat Guru Nanak?
(हाउ डिड द विलेजर्स ऑफ द फर्स्ट विलेज ट्रीट गुरु नानक?)
पहले गाँव के लोगों ने गुरु नानक के साथ कैसा व्यवहार किया?
Answer:
The villagers of the first village were rude and inhospitable with Guru Nanak.
(द विलेजर्स ऑफ द फर्स्ट विलेज वर् रूड एण्ड इन्हॉस्पिटेबल विद गुरु नानक।)
पहले गाँव के लोगों का व्यवहार गुरु नानक के साथ रूखा व आतिथ्य भाव वाला नहीं था।

Question 10.
What is our responsibility towards our country?
(व्हॉट इज़ अवर रिस्पॉन्सिबिलिटी टुवर्ड्स अवर कण्ट्री?)
हमारा अपने देश के प्रति क्या दायित्व है?
Answer:
Each one of us has the responsibility towards our country of being a good citizen.
(ईच वन ऑफ अस हैज़ द रिस्पॉन्सिबिलिटी टुवर्ड्स अवर कण्ट्री ऑफ बीइंग अ गुड सिटीज़न।)
एक अच्छा नागरिक होना ही हम सबका अपने देश के प्रति दायित्व है।

B. Answer the following questions. (Three or four sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why was the old merchant very pleased with his second son?
(व्हाय वॉज़ द ओल्ड मर्चेन्ट वेरी प्लीज़्ड विद हिज़ सेकण्ड सन?)
बूढ़ा व्यापारी अपने दूसरे बेटे से बहुत खुश क्यों था?
Answer:
The old merchant was very pleased with his second son because he had shown true wisdom. In one rupee he bought candles and lighted the whole house. He was therefore worthy for his wealth.
(द ओल्ड मर्चेन्ट वॉज़ वेरी प्लीज्ड विद हिज़ सेकण्ड सन बिकॉज़ ही हैड शोन टू विज़डम। इन वन रूपी ही बॉट कैण्डल्स एण्ड लाइटेड द होल हाऊस। ही वॉज़ देयरफोर वर्दी फॉर हिज़ वैल्थ।)
बूढ़ा व्यापारी दूसरे पुत्र से खुश था क्योंकि उसने अपने विवेक का प्रदर्शन किया था। एक रुपये में उसने मोमबत्तियाँ खरीदी जिसने पूरे घर को रोशन कर दिया। अतः वह ही उसकी जायदाद के लायक था।

Question 2.
Which type of citizens does a country need?
(व्हिच टाइप ऑफ सिटिजन्स डज़ अ कण्ट्री नीड?)
एक देश को किस प्रकार के नागरिक चाहिए?
Answer:
A country needs good citizens. Only good citizens can serve their country. The greater the number of good citizens in a country, the more enlightened is the country.
(अ कण्ट्री नीड्स गुड सिटीजन्स। ओनलि गुड सिटिजन्स कैन सर्व देयर कण्ट्री। द ग्रेटर द नम्बर ऑफ गुड सिटीजन्स इन अ कण्ट्री, द मोर एनलाइटिन्ड इज द कण्ट्री।)
एक देश को अच्छे नागरिकों की जरूरत है। सिर्फ अच्छे नागरिक ही देश की सेवा कर सकते हैं। किसी देश में जितने ज्यादा अच्छे नागरिक होंगे वो देश उतना ही प्रबुद्ध होगा।

Question 3.
What did Guru Nanak pray for people of the second village?
(व्हॉट डिड गुरु नानक प्रे फॉर पीपल ऑफ द सैकण्ड विलेज?)
गुरु नानक ने दूसरे गाँव के लोगों के लिए क्या प्रार्थना की?
Answer:
Guru Nanak prayed for the people of second village that they may not remain in their village, but may be scattered throughout the country.
(गुरु नानक प्रेड फॉर द पीपल ऑफ सैकण्ड विलेज दैट दे मे नॉट रिमेन इन देयर विलेज, बट में बी स्कैटर्ड श्रूआऊट द कण्ट्री।)
गुरु नानक ने दूसरे गाँव के लोगों के लिए प्रार्थना की कि वे उस गाँव में न रहें वरन् पूरे देश में बिखर जायें।

Question 4.
What is the responsibility of a student when he/she leaves the school?
(व्हॉट इज़ द रिस्पॉन्सिबिलिटी ऑफ अ स्टूडेण्ट व्हेन । ही/शी लीव्स द स्कूल?)
जब एक छात्र विद्यालय से बाहर निकलता है तो उसका क्या दायित्व होता है?
Answer:
The responsibility of a student when he/she leaves the school is to carry his flame of knowledge and skill and pass it on to others. These he passes on by using them in the service of his country.
(द रिस्पॉन्सिबिलिटी ऑफ अ स्टूडेन्ट व्हेन ही/शी लीव्स द स्कूल इज़ टू कैरी हिज़ फ्लेम ऑफ नॉलेज एण्ड स्किल एण्ड पास इट ऑन टू अदर्स। दीज़ ही पासेज़ ऑन बाइ यूजिंग देम इन द सर्विस ऑफ हिज़ कण्ट्री।)
जब एक विद्यार्थी विद्यालय से बाहर निकलता है तो उसका यह दायित्व होता है कि वह अपनी ज्ञान व क्षमता की ज्योति को दूसरों में बाँटे। यह वह अपने देश की सेवा में इस्तेमाल करके फैलाता है।

C. Answer these questions. (about 80-100 words)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर 80-100 शब्दों में दीजिए।)

Question 1.
How did the old merchant come to know that his younger son was cleverer than the elder?
(हाउ डिड द ओल्ड मर्चेन्ट कम टू नो दैट हिज़ यंगर सन वॉज क्लेवर दैन द एल्डर?)
बूढ़े व्यापारी को यह कैसे पता चला कि उसका छोटा बेटा बड़े से ज्यादा चतुर है?
Answer:
The old merchant has asked his sons to buy such a thing in a rupee that may fill the whole house. The candles brought by the younger son lighted the whole house and removed its darkness while the hay bought by the elder son was not enough to cover even the floor of a room and was of no use. This made the old merchant understand that the younger son was cleverer than the elder.

(द ओल्ड मर्चेन्ट हैड आस्क्ड हिज़ सन्स टू बाय सच अ थिंग इन अ रूपी दैट मे फिल द होल हाऊस। द कैण्डल्स ब्रॉट बाइ द यंगर सन लाइटेड द होल हाऊस एण्ड रिमूव्ड इट्स डार्कनेस व्हाइल द हे बॉट बाइ द एल्डर सन वॉज़ नॉट इनफ टू कवर ईवन द फ्लोर ऑफ अ रूम एण्ड वॉज़ ऑफ नो यूज़। दिस मेड द ओल्ड मर्चेन्ट अण्डरस्टैण्ड दैट द यंगर सन वॉज़ क्लैवरर दैन द एल्डर।)

बूढ़े व्यापारी ने अपने बेटों से एक रुपये में ऐसी वस्तु खरीदने को कहा था जिससे कि पूरा घर भर जाये। छोटे बेटे द्वारा लाई गई मोमबत्तियों से पूरा घर रोशन हो गया जबकि बड़े बेटे द्वारा लायी गयी घास एक कमरे की जमीन पर भी पूरा न आ सकी व किसी काम की न रही। इससे बूढ़े व्यापारी ने यह समझ लिया कि छोटा बेटा बड़े से ज्यादा चतुर है।

Question 2.
‘A chain is as strong as its weakest link’. Explain.
(‘अ चेन इज़ एज़ स्ट्राँग एज़ इट्स वीकेस्ट लिंग।’ एक्स्प्ले न।)
‘एक चेन अपने कमजोर जोड़ की तरह ही प्रबल होती है।’ समझाइए।
Answer:
It means even the weakest link in the chain affects its strength. Each one of us is a link in the chain that is our country. If we are weak and poor then our country will suffer. So, each person makes a difference in a country.

(इट मीन्स ईवन द वीकेस्ट लिंक इन द चेन अफैक्ट्स् इट्स् स्ट्रेन्थ। ईच वन ऑफ अस इज़ अलिंक इन द चेन दैट इज़ अवर कण्ट्री। इफ वी आर वीक एण्ड पुअर् देन अवर कण्ट्री विल सफर। सो, ईच पर्सन मेक्स अ डिफ्रेन्स इन अ कण्ट्री।)

इसका अर्थ है कि एक चेन में एक कमजोर जोड़ भी उसकी प्रबलता को प्रभावित करता है। इसमें से हरएक एक चेन की तरह है जो कि हमारा देश है। अगर हम कमजोर व गरीब हैं तो हमारा देश भी उससे प्रभावित होगा। अतः हर व्यक्ति देश को प्रभावित करता है।

Language Practice

Punctuate the given paragraph with appropriate capitalization and rewrite:
Answer:
The children were happy during the month of August, especially when it began to get near the twenty-third. It was on this day that the great silver spaceship carrying Professor Hugos interplanetary zoo settled down for its annual six-hour visit to the Chicago area.

Listening Time

Each of the following sentences will be read out twice making use of only one of the options given. Listen carefully and put a tick mark (✓) against the word you hear :

(a) The farmer could not buy a mill/meal anywhere.
Answer:
The farmer could not buy a mill anywhere.

(b) The fisherman pulled/pooled the net.
Answer:
The fishermen pooled the net.

(c) They dried the nets/nuts in the sun.
Answer:
They dried the nuts in the sun.

(d) My uncle owns a big farm/firm.
Answer:
My uncle owns a big firm.

(e) He is fit/feet for the job.
Answer:
He is fit for the job.

(f) Sit/Seat on the chair.
Answer:
Sit on the chair.

(g) He is feeling pain/pen on his knee.
Answer:
He is feeling pain on his knee.

(h) Don’t try to fool/full me.
Answer:
Don’t try to fool me.

Speaking Time

Do it yourself.
(स्वयं करो।)

Writing Time

Write any two stories in your own words in not more than 80 words.
(कोई भी दो कहानियाँ अपने शब्दों में लिखो (80 शब्दों से ज्यादा नहीं।)
Answer:
1st Story :
Once there was a rich, old merchant. He decided to give his property to the cleverer of his two sons. He gave them a rupee each and asked to spend, it cleverly such that whole house gets filled. First son bought hay from it which could not cover even a floor while the second bought candles which enlightened the whole house. The merchant thus gave his money to the younger son who had proved his cleverness.

2nd Story :
Guru Nanak and his disciple Mardana went to a village. The villagers of the village were inhospitable and rude and did not allow them to stay there. Guru Nanak thus prayed that those villagers should always remain in the same village. The next night they reached another village where they were welcomed, given dinner and shelter. He now prayed that they should scatter throughout the country. He told his disciple that he prayed so, so that people of second village may spread their light to other places also.

Things to do

1. Collect pictures of some great men from magazines and newspapers and paste them in your project book. Preferably, these personages should have contributed to human betterment in diverse fields.
(कुछ महान् व्यक्तियों के चित्र अखबारों व किताबों में से काटो व अपनी पुस्तिका में चिपकाओ। इन व्यक्तियों ने विभिन्न क्षेत्रों में मनुष्यों के विकास में कार्य किया होगा।)
Answer:
Students can collect the pictures of some great men themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Torch Bearers Difficult Word Meanings

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 17 Torch Bearers 2

Torch Bearers Summary, Pronunciation & Translation

Part-I
(भाग-I)

Once upon a time, many centuries ago, there lived an old merchant. All his life he had toiled hard, buying and selling, with the result that he had made a lot of money. As the years went by, he laid by more and more riches. But the day came when he felt that he had not long to remain in this world. He began to wonder what he should do with his money.

Now, he had two sons. He made up his mind that he would not divide his money between them, but that he would give it all to the one who proved himself to be the cleverer of the two. The problem to be solved was that of finding out which of the two sons was the cleverer. He decided to solve this problem by giving them a test.

(वन्स अपॉन अ टाईम, मैनी सेन्चुरीज़ अगो, देयर लिब्ड ऐन ओल्ड मर्चेण्ट. ऑल हिज़ लाईफ ही हैड टॉयल्ड हार्ड, बाईंग ऐण्ड सेलिंग, विद द रिज़ल्ट दैट ही हैड मेड अलॉट ऑफ मनी. ऐज़ द यीअर्स वेण्ट बाई, ही लेड बाई मोर ऐण्ड मोर रिचस. बट द डे केम व्हेन ही फेल्ट दैट ही हैड नॉट लॉना द रिमेन इन दिस वर्ल्ड. ही बिगैन टू वण्डर व्हॉट ही शुड डू विद हिज़ मनी.

नाऊ, ही हैड टू सन्स. ही मेड अप हिज़ माईण्ड दैट ही वुड नॉट डिवाईड हिज़ मनी बिटवीन देम, बट दैट ही वुड गिव इट ऑल टू द वन हू प्रूव्ड हिमसेल्फ टू बी द क्लेवरर ऑफ द टू. द प्रॉब्लम टू वी सॉल्व्ड वॉज़ दैट ऑफ फाईण्डिंग आऊट व्हिच ऑफ द टू सन्स वॉज़ द क्लेवरर. ही डिसाईडिड टू सॉल्व दिस प्रॉब्लम बाई गिविंग देम अ टेस्ट.)

अनुवाद :
एक बार की बात है, कई शताब्दियों पूर्व एक व्यापारी था। अपना पूरा जीवन उसने क्रय-विक्रय में कठिन श्रम किया था जिसके फलस्वरूप उसने बहुत धन कमाया था। जैसे-जैसे वर्ष बीतते गए वह और धनी होता गया। परन्तु एक दिन आया जब उसे यह लगा कि अब वह इस दुनिया में और ज्यादा समय तक नहीं रहेगा। वह सोच में पड़ गया कि उसे अपने धन का क्या करना चाहिए।

अब, उसके दो पुत्र थे। वह यह निश्चय कर चुका था कि वह अपना धन दोनों पुत्रों में बाँटेगा नहीं, वरन् वह उन दोनों में से जो स्वयं को ज्यादा अक्लमंद सिद्ध करे उसको देगा। समस्या, जिसका समाधान होना था वो यह कि दोनों पुत्रों में से कौन ज्यादा अक्लमंद था। उसने इस समस्या का समाधान एक परीक्षा द्वारा करने का निर्णय लिया।

Calling the young men, he said to them, “Here are two rupees. I want you to take one rupee each, and then to go out separately and buy something which will fill this house. You are not to spend more than one rupee.”

The two sons looked at him as if he had taken leave of his senses. “How can we possibly buy enough of anything to fill the house with only one rupee?” They asked themselves. And they were reluctant to pick up the rupees. But the old man insisted on their doing as he told them. “Off you go,” he said, “and don’t take too long over the business. I expect you back in a couple of days.”

(कॉलिंग द यंग मेन, ही सेड टू देम, “हेयर ऑर टू रूपीज़. आई वॉण्ट यू टू टेक वन रूपी ईच, ऐण्ड देन गो आऊट सेपरेट्ली ऐण्ड बाय समथिंग व्हिच विल फिल दिस हाऊज़. यू आर नॉट टू स्पेण्ड मोर दैन वन रूपी.”

द टू सन्स लुक्ड ऐट हिम ऐज़ इफ ही हैड टेकन लीव ऑफ हिज़ सेन्सिस, “हाऊ कैन वी पॉसिबली बाय एनफ ऑफ एनीथिंग टू फिल द हाऊज़ विद ओन्ली वन रूपी ?”दे ऑस्क्ड देमसेल्ब्ज़. ऐण्ड दे वर रिलक्टैण्ट टू पिक अप द रूपीज़. बट द ओल्ड मैन इन्सिसटिड ऑन देयर डूईंग ऐज़ ही टोल्ड दैम. “ऑफ यू गो,” ही सेड, “ऐण्ड डोण्ट टेक टू लॉन्ग ओवर द बिज़नेस. आई एक्सपेक्ट यू बैक इन अ कपल ऑफ डेज़.’)

अनुवाद :
दोनों युवकों को बुलाकर उसने उनसे कहा, “यह दो रूपये हैं। मैं चाहता हूँ तुम दोनों एक-एक रूपया ले लो और फिर अलग-अलग बाहर जाओ और कुछ ऐसा खरीदकर लाओ जो पूरा घर भर दे। तुम्हें एक रुपये से ज्यादा नहीं खर्च करना है।”

दोनों पुत्रों ने उसकी तरफ ऐसे देखा मानों वह पागल हो चुका हो। “यह कैसे सम्भव है कि हम एक रुपये में कोई चीज़ खरीदें जिससे पूरा घर भर जाए?” दोनों ने अपने आप से पूछा। और वे लोग रुपया उठाने के लिए अनिच्छुक थे। परन्तु उनके पिता ने जैसा वह कह रहे हैं वैसा करने के लिए ज़ोर डाला “अब तुम जाओ,” उसने कहा, “और इस कार्य में बहुत ज्यादा समय नहीं लगाना। मैं दो दिनों के भीतर तुम्हारी वापसी की आशा करता हूँ।”

So each young man took up a rupee and went out. The first one wandered through the bazaar all day long. But nothing could he find which would, in any way, serve his purpose. He became more and more certain that something had gone wrong with his father. He was about to give up his search in despair when he saw a bullock cart with a load of hay. “That looks hopeful,” he thought, “I wonder how much hay I can get for a rupee.”

He went up to the driver of the cart and enquired about the price of the hay. There was a good deal of haggling over the price, but, in the end, he was able to buy the load of hay for a rupee. (In those days a rupee would buy a great deal more than it will buy now.)

(सो ईच यंग मैन टुक अप अ रूपी ऐण्ड वेण्ट आऊट. द फर्स्ट वन वॉण्डर्ड श्रू द बाज़ार ऑल डे लॉन्ग. बट नथिंग कुड ही फाईण्ड व्हिच वुड, इन ऐनी वे, सर्व हिज़ पर्पस, ही बिकेम मोर ऐण्ड मोर सर्टन दैट समथिंग हैड गॉन रॉन्ग विद हिज़ फादर. ही वॉज़ अबाऊट टू गिवं अप हिज़ सर्च इन डिस्पेयर व्हेन ही सॉ अ बुलक कार्ट विद अ लोड ऑफ हे, “दैट लुक्स होपफुल,” ही थॉट, “आई वण्डर हाऊ मच हे आई कैन गैट फॉर अ रूपी.”

ही वेण्ट अप टू द ड्राईवर ऑफ द कार्ट ऐण्ड एन्क्वायर्ड अबाऊट द प्राईस ऑफ द हे. देयर वॉज़ अ गुड डील ऑफ हैगलिंग ओवर द प्राईस, बट, इन द एण्ड, ही वॉज़ एबल टू बाय द लोड ऑफ हे फॉर अ रूपी. (इन दोज़ डेज़ अ रूपी वुड बाय अ ग्रेट डील मोर देन इट विल बाय नाऊ)

अनुवाद :
तब फिर दोनों युवक एक-एक रुपया उठाकर बाहर चले गए। पहला पत्र पूरा दिन बाजार में भटकता रहा। परन्तु वह कुछ भी ऐसा नहीं ढूँढ़ पाया जो किसी प्रकार भी उसका उद्देश्य पूरा करे। उसको और भी अधिक यह लगने लगा कि उसके पिताजी को कुछ हो गया है। वह पूर्णतया निराश होकर अपनी खोज बंद करने ही वाला था जब उसे एक भूसे से लदी बैलगाड़ी दिखाई दी। “यह कुछ आशाजनक है,” उसने सोचा, “पता नहीं एक रुपये में कितना भूसा मुझे मिल सकता है।”

वह बैलगाड़ी वाले के पास गया और भूसे का दाम पूछा। उसके बाद काफी देर तक मोल-भाव हुआ परन्तु अन्त में वह पूरा भूसा एक रूपये में खरीदने में सफल हुआ। (उन दिनों एक रूपये में बहुत सारा सामान खरीदा जा सकता था आज के मुकाबले।)

So the young man led off the cart with the hay to his father’s house. Hopefully he piled it into the house. But when it was all in, he found that there was not enough to cover even the floor, let alone fill the whole house.

When the second son went out with his rupee, he did not go straight away to the bazaar. Instead of doing that, he sat down and began to think. For a long time he sat thinking about what he could possibly buy. In the evening, an idea struck him. Taking his rupee, he walked quickly down the bazaar till he came to a shop where candles were sold. He spent his rupee on candles, of which he got quite a number. Then, taking his candles with him he made his way back to his father’s house. When he got there his brother was standing disconsolately looking at the hay spread out on the floor.

It was now getting dark. Quickly the second son stood two or three candles in each room. Then he lit them. At once the house was filled with light.

(सो द यंग मैन लेड ऑफ द कार्ट विद द हे टू हिज़ फादर्स हाऊज़ होपफुली ही पाईल्ड इट इण्टू द हाऊज़. बट व्हेन इट वॉज़ ऑल इन, ही फॉऊण्ड दैट देयर वॉज़ नॉट एनफ टू कवर ईवन द फ्लोर, लेट’अलोन फिल द होल हाऊज़.

व्हेन द सेकण्ड सन वेण्ट आउट विद हिज़ रूपी, ही डिड नॉट गो स्ट्रेट अवे टू द बाज़ार, इन्स्टेड ऑफ डूइँग दैट, ही सैट डाऊन ऐण्ड बिगैन टू थिंक. फॉर अ लॉन्ग टाईम ही सैट थिंकिंग अबाऊट व्हॉट ही कुड पॉसिबली बाय. इन द ईवनिंग, ऐन आईडिया स्ट्रक हिंम. टेकिंग हिज़ रूपी, ही वॉक्ड क्विक्ली डाऊन द बाज़ार टिल ही केम टू अ शॉप व्हेअर कैन्डल्स वर सोल्ड। ही स्पेण्ट हिज़ रूपी ऑन कैन्डल्स, ऑफ व्हिच ही गॉट क्वाईट अ नम्बर, देन, टेकिंग हिज़ कैन्डल्स विद हिम ही मेड हिज़ वे बैक टू हिज़ फादर्स हाऊज़. व्हेन ही गॉट देयर हिज़ ब्रदर वॉज़ स्टैण्डिंग डिसकॉन्सोलेटली लुकिंग ऐट द हे स्प्रेड आऊट ऑन द फ्लोर.

इट वॉज़ नाऊ गैटिंग डार्क. क्विक्ली द सेकण्ड सन स्टुड टू ऑर थ्री कैन्डल्स इन ईच रूम देन ही लिट देम. ऐट वन्स द हाऊज़ वॉज़ फिल्ड विद लाईट.)

अनुवाद :
तब फिर वह युवक (प्रथम पुत्र) भूसे वाली बैलगाड़ी को अपने पिता के घर ले गया। फिर आशान्वित होकर उसने भूसे को घर में भरा। परन्तु जब वह पूरा भूसा भर चुका तो उसने पाया कि वह इतना भी नहीं था कि फर्श को पूरी तरह से ढक सके, पूरा घर भरना तो बहुत दूर की बात थी।

जब द्वितीय पुत्र अपना रुपया लेकर निकला तो वह सीधे बाज़ार नहीं गया। ऐसा करने के बजाए वह एक स्थान पर बैठ गया वह सोचने लगा। बहुत देर तक वह बैठा सोचता रहा कि वह क्या खरीद सकता है। शाम को उसे एक विचार सूझा। अपना रुपया लेकर वह तेज़ कदमों से चलकर बाज़ार में उस दुकान पर पहुँचा जहाँ मोमबत्तियाँ मिलती थीं। उसने अपने एक रुपये से मोमबत्तियाँ खरीद ली जो कि उसे काफी संख्या में मिलीं। फिर मोमबत्तियाँ लेकर वह अपने पिता के घर की तरफ वापस चल दिया। जब वह वहाँ पहुँचा उसका भाई बड़े निराशापूर्ण ढंग से फर्श पर बिखरे भूसे को देख रहा था।

अंधेरा होने लगा था। शीघ्रता से द्वितीय पुत्र ने प्रत्येक कक्ष में दो या तीन मोमबत्तियाँ लगा दी। उसके पश्चात् उसने उन्हें जला दिया। पूरा घर एकदम प्रकाश से भर गया।

His father was very pleased with him and said, “My son, you have shown true wisdom. I am ready to hand over all my money to you.”

Now, we all live in a big house which we call our native country. We have each of us been given, some one rupee, some two rupees, some three and some four. These rupees are not rupees with which we can buy things, but they are different powers we have been given. Each of us has powers of body, powers of mind and powers of character. Each of us has strength, time and intelligence, which can be used. As we leave school and go out into the world, we are tested as to how we are going to use these talents which we possess. Are we going to use them to buy useless hay or are we going to use them to spread light throughout our house, that is, our country? If we are going to be good citizens, then we shall use our powers and abilities to try to spread light into all parts of our country, that is, we shall spend ourselves in the service of our country.

(हिज़ फादर वॉज़ वेरी प्लीज्ड विद हिम ऐण्ड सेड, “माई सन, यू हैव शोन ट्र विस्डम, आई ऐम रेडी टू हैण्ड ओवर ऑल माई मनी टू यू।”

नाऊ, वी ऑल लिव इन अ बिग हाऊज़ व्हिच वी कॉल आवर नेटिव कंट्री. वी हैव ईच ऑफ अस बीन गिवन, सम वन रूपी, सम टू रूपीज़, सम थ्री ऐण्ड सम फोर, दीज़ रूपीज़ आर नॉट रुपीज़ विद व्हिच वी कैन बाय थिंग्स, बट दे आर डिफरण्ट पावर्स वी हैव बीन गिवन. ईच ऑफ अस हैज पावर्स ऑफ बॉडी, पावर्स ऑफ माइन्ड ऐण्ड पावर्स ऑफ कैरेक्टर. ईच ऑफ अस हैज़ स्ट्रेन्थ, टाईम ऐण्ड इन्टेलिजेन्स, व्हिच कैन बी यूज्ड. ऐज़ वी लीव स्कूल ऐण्ड गो आऊट इण्टू द वर्ल्ड, वी आर टेस्टिड ऐज़ टू हाऊ वी आर गोईंग टू न्यूज़ दीज़ टैलेण्ट्स व्हिच वी पज़ेज. आर वी गोईंग टू यूज़ देम टू बाय यूज़लेस हे ऑर आर वी गोईंग टू। यूज़ देम वी। स्प्रेड लाईट श्रूआऊट आवर हाऊज़, दैट इज़, आवर कंट्री? इफ वी आर गोईंग टू वी गुड सिटीजन्स, देन वी शैल यूज़ आवर पावर्स ऐण्ड एबिलिटीज़ टू ट्राय टू स्प्रेड लाईट इण्टू ऑल पास ऑफ आवर कंट्री, दैट इज़, वी शैल. स्पेण्ड आवरसेल्व्ज़ इन द सर्विस ऑफ आवर कंट्री.)

अनुवाद :
उसके पिता उससे बेहद प्रसन्न हुए और कहा, “मेरे पुत्र, तुमने सच्चे ज्ञान का परिचय दिया है। मैं अपना पूरा धन तुम्हें देने को तैयार हूँ।”

अब हम सभी एक बड़े से घर में रहते हैं जिसे हम अपना देश कहते हैं। हम में से प्रत्येक को कुछ न कुछ मिला है, कुछ को एक रुपया, कुछ को दो रुपये, कुछ को तीन और कुछ को चार। ये रुपये ऐसे रुपये नहीं हैं जिनसे हम कुछ खरीद सकते हैं परन्तु यह भिन्न-भिन्न प्रकार की शक्तियाँ हैं जो हमें मिली हैं। हममें से प्रत्येक में शारीरिक, मानसिक एवं चारित्रिक शक्तियाँ हैं। हम में से प्रत्येक के पास बल, समय व बुद्धि है जिनका उपयोग किया जा सकता है। जब हम अपना अध्ययन समाप्त कर दुनिया में जाते है तो हमारी परीक्षा होती है कि हम अपनी प्रतिभाओं का किस प्रकार उपयोग करेंगे। क्या हम उनका प्रयोग व्यर्थ. बेकार भूसा खरीदने में करेंगे या फिर उनका उपयोग पूरे घर को (अर्थात् अपने देश को, रोशन करने में करेंगे? यदि हमें अच्छा नागरिक बनना है, तो हमें अपनी शक्तियों, क्षमताओं एवं प्रतिभाओं का प्रयोग पूरे देश को प्रकाशित करने में करना चाहिए, अर्थात्, हमें अपने देश की सेवा करनी चाहिए।)

Non country can progress unless it has good citizens. So, if we love our country and want to serve it, we should try to become good citizens. We will be training ourselves in citizenship and cultivating the characteristics of good citizens. We will be able to fill our country with the light of good citizenship when we leave our school and home, and go out into different parts of our country.

(नो कंट्री कैन प्रोग्रेस अनलेस इट हैज़ गुड सिटीजन्स. सो, इफ वी लव आवर कंट्री ऐण्ड वॉण्ट टू सर्व इट, वी शुड ट्राय टू बिकम गुड सिटीजन्स. वी विल बी ट्रेनिंग आवरसेल्ज़ इन सिटीज़नशिप ऐण्ड कल्टीवेटिंग द कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ गुड सिटीजन्स. वी विल बी एबल टू फिल आवर कंट्री विद द लाईट ऑफ गुड सिटीज़नशिप व्हेन वी लीव आवर स्कूल ऐण्ड होम, ऐण्ड गो आऊट इण्टू डिफरण्ट पार्ट्स ऑफ आवर कंट्री.)

अनुवाद :
कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता यदि उसके नागरिक अच्छे न हों। इसलिए, यदि हम अपने देश से प्रेम करते हैं तो हमें अच्छे नागरिक बनने का प्रयत्न करना चाहिए। हम स्वयं को नागरिकता में और अच्छे नागरिक के गुणों को विकसित करने हेतु प्रशिक्षित करेंगे। जब हम अपने विद्यालयों व घरों को छोड़कर देश के विभिन्न भागों में जाएँगे तो हम अपने देश को अच्छी नागरिकता के प्रकाश से भरने में सफल होंगे।

Part-II
(भाग-II)

A story is told of Guru Nanak that, in the course of his travels, he came to a village. Besides him, his disciple, Mardana also came to the village. They wanted to stay there for the night. But the villagers were rude and inhospitable and would not let them stay anywhere in the village. So Guru Nanak and Mardana were forced to spend the night in the open. “As they turned away from the village, Guru Nanak said, “I pray that the people of this village may always stay in this village.” Mardana was somewhat puzzled at this, but said nothing.

(अ स्टोरी इज़ टोल्ड ऑफ गुरु नानक दैट, इन द कोर्स ऑफ हिज़ ट्रैवल्स, ही केम टू अ विलेज. बिसाईड्स हिम, हिज़ डिसाईपल, मर्दाना ऑल्सो केम टू द विलेज. दे वॉण्टिड टू स्टे देयर फॉर द नाईट. बट द विलेजर्स वर रूड ऐण्ड इनहॉस्पिटेबल ऐण्ड वुड नॉट लेट देम स्टे एनीव्हेअर इन द विलेज. सो गुरु नानक ऐण्ड मर्दाना वर फोर्ल्ड टू स्पेण्ड द नाईट इन द ओपन. ऐज़ दे टर्ड अवे फ्रॉम द विलेज, गुरु नानरु सेड, “आई प्रे दैट द पीपल ऑफ दिस विलेज मे आल्वेज़ स्टे इन दिस विलेज.” मर्दाना वॉज़ समव्हॉट पज़ल्ड ऐट दिस, बट सेड नथिंग.)

अनुवाद :
गुरु नानक जी के बारे में एक कहानी कही जाती है। अपनी यात्राओं के दौरान वे एक गाँव में पहुँचे। उनके अलावा, उनका शिष्य मर्दाना भी साथ में आया। वे वहाँ रात में रुकना चाहते थे। परन्तु गाँव वाले बेहद असभ्य थे एवं अतिथि सत्कार करना नहीं जानते थे और गाँव वालों ने उन्हें गाँव में कहीं भी ठहरने नहीं दिया। इसलिए गुरु नानक जी व मर्दाना को रात खुले में काटनी पड़ी। जब वे वहाँ से जाने लगे तब गुरु नानक जी ने कहा, “मैं प्रार्थना करता हूँ कि इस गाँव के लोग हमेशा इसी गाँव में रहें।”। मर्दाना उनकी इस बात से थोड़े हैरान थे परन्तु उन्होंने कुछ नहीं कहा।

The next night they came to another village where they received a very different reception. The villagers welcomed them, treated them kindly, found them a place to stay for the night, and gave them food to eat. In the morning, as Guru Nanak and Mardana were leaving, the Guru said, “I pray that the people of this village may not remain in their village, but may be scattered throughout the country.”

But this was too much for Mardana. He protested. “Why”, he said to the Guru. “do you pray for good things for people who treat us badly, and for misfortunes for those who treat us well ? You should have prayed for those inhospitable villagers to be scattered over the country, and for these good people to remain comfortably where they are.”

(द नेक्स्ट नाईट दे केम टू अनदर विलेज व्हेअर दे रिसीव्ड अ वेरी डिफरण्ट रिसेप्शन. द विलेजर्स वैल्कम्ड देम, ट्रीटिड देम काईण्डली, फाऊण्ड देम अ प्लेस टू स्टे फॉर द नाइट, ऐण्ड गेव देम फूड टू ईट. इन द मॉर्निंग, ऐज़ गुरुनानक ऐण्ड मर्दाना वर लीविंग, द गुरु सेड, “आई प्रे दैट द पीपल ऑफं दिस विलेज मे नॉट रिमेन इन देयर विलेज, बट मे बी स्कैटर्ड श्रूआऊट द कंट्री.”

बट दिस वॉज़ टू मच फॉर मर्दाना. ही प्रोटेस्टेड, “व्हाई” ही, सेड टू द गुरु, “डू यू प्रे फॉर गुड थिंग्स फॉर पीपल हू ट्रीट अस बैडली, ऐण्ड फॉर मिसफॉरचून्स फॉर दोज़ हू ट्रीट अस वैल? यू शुड हैव प्रेड फॉर दोज़ हनहॉस्पिटेबल विलेजर्स टू बी स्कैटर्ड ओवर द कंट्री ऐण्ड फॉर दीज़ गुड पीपल टू रिमेन कम्फर्टेबली व्हेअर दे आर.”)

अनुवाद :
अगली रात वे एक दूसरे गाँव में पहुँचे जहाँ उनकी बहुत अलग प्रकार से अगवानी हुई। गाँववालों ने उनका स्वागत किया, बहुत प्रेम व सहृदयता से उनका सत्कार किया, उनके ठहरने के लिए स्थान का प्रबन्ध किया और भोजन भी दिया। सुबह जब गुरु नानक जी व मर्दाना चलने लगे तब गुरुजी ने कहा, “मैं प्रार्थना करता हूँ कि इस गाँव के लोग इस गाँव में न रहें वरन् पूरे देश में फैल जाएँ।”

परन्तु मर्दाना के लिए अब अति हो गई थी। उन्होंने विरोध किया, “क्यों” उन्होंने गुरुजी से कहा “जिन लोगों ने हमारा तिरस्कार किया आप उन लोगों के भले के लिए प्रार्थना करते हैं और जिन लोगों ने हमारा सत्कार व सम्मान किया आप उनके लिए दुर्भाग्य की कामना करते हैं? आपको उन अतिथियों का तिरस्कार करने वाले गाँववालों के पूरे देश में फैल जाने की प्रार्थना करनी चाहिए थी और इन अच्छे लोगों के लिए जहाँ हैं वहीं आराम से रहने की।”

“No,” replied Guru Nanak, “it is better for those inhospitable and selfish people to stay in one place where they can do harm in one place only. If they went to other places they would have an evil influence all through the country. Now these good people, with whom we put up last night, are too good to be left in one place. They have something which is needed everywhere. Their influence and their character will be of benefit to others, wherever they go. Hence they ought to be scattered so that they can take their light to other places.”

(“नो,” रिप्लाईड गुरु नानक, “इट इज़ बैटर फॉर दोज़ इन हॉस्पिटेबल ऐण्ड सेल्फिश पीपल टू स्टे इन वन प्लेस व्हेअर दे कैन डू हार्म इन वन प्लेस ओन्ली. इफ दे वेण्ट टू अदर प्लेसिस दे वुड हैव ऐन ईविल इन्फ्लूएन्स ऑल धूद कंट्री. नाऊ दीज़ गुड पीपल, विद हूम वी पुट अप लास्ट नाईट, आर टू गुड टू बी लेफ्ट इन वन प्लेस. दे हैव समथिंग व्हिच इज़ नीडेड एवरी व्हेअर. देयर इन्फ्लूएन्स ऐण्ड देयर कैरेक्टर विल बी ऑफ वेनिफिट टू अदर्स, व्हेअरएवर दे गो. हेन्स दे ऑट टू बी स्कैटर्ड सो दैट दे कैन टेक देयर लाईट टू अदर प्लेसिस.”

अनुवाद :
“नहीं”, गुरु नानक ने उत्तर दिया, “यही अच्छा है कि वे स्वार्थी और असत्कारी लोग एक ही स्थान पर रहें ताकि वह सिर्फ एक ही स्थान पर हानि कर सकें। यदि वे अन्य स्थानों पर जाएँगे तो उनका पूरे देश में दुष्प्रभाव होगा। और इस गाँव के जो यह अच्छे लोग हैं जहाँ हम रात में रुके अत्यधिक अच्छे हैं इसलिए उन्हें एक ही स्थान पर नहीं रहना चाहिए। इनके पास कुछ ऐसा है जिसकी हर स्थान पर आवश्यकता है। इनका प्रभाव एवं उनका चरित्र औरों के लिए अच्छा होगा जहाँ भी वे जाएँगे। इसलिए इनको सब तरफ फैल जाना चाहिए ताकि वे अपना प्रकाश अन्य स्थानों पर भी ले जा सकें।”

Now we have to see to it that we grow into such citizen that people will want the light of our character and our influence everywhere. We do not wish to have the sort of character that will make people want us to stay in one place, and not to mix with others, If we are to be good citizens, who will be able to serve their country. We must be carrying light with us wherever we go, and not darkness. Our influence on others must be for good, and not for bad. Our lives must be such that wherever we go, and wherever we live, other people should feel better for our having been with them. A good citizen is a centre of light wherever he lives, and whatever he does. The greater the number of good citizens in a country, the more enlightened will the country be as a whole.

(नाऊ वी हैव टू सी टू इट दैट वी ग्रो इण्टु सच सिटीजन्स दैट पीपल विल वॉण्ट द लाईट ऑफ आवर कैरेक्टर ऐण्ड आवर इन्फ्लूएन्स एवरीव्हेअर. वी डू नॉट विश टू हैव द सॉर्ट ऑफ कैरेक्टर दैट विल मेक पीपल वॉण्ट अस टू स्टे इन वन प्लेस, ऐण्ड नॉट टू मिक्स विद अदर्स, इफ वी आर टू बी गुड सिटीजन्स, हू विल बी एबल टू सर्व देयर कंट्री. वी मस्ट बी कैरीइिंग लाईट विद अस व्हेअरएवर वी गो, ऐण्ड नॉट डार्कनेस.आवर इन्फ्लूएन्स ऑन अदर्स मस्ट बी फॉर गुड. ऐण्ड नॉट फॉर बैड़ आवर लाईव्ज़ मस्ट बी सच दैट व्हेअरएवर वी गो, ऐण्ड व्हेअरएवर वी लिव, अदर पीपल शुड फील बैटर फॉर आवर हैविंग बीन विद देम. अ गुड सिटीज़न इज़ अ सेण्टर ऑफ लाईट व्हेअरएवर ही लिब्ज़, ऐण्ड व्हॉटएवर ही डज़. द ग्रेटर द नम्बर ऑफ गुड सिटीजन्स इन अ कंट्री, द मोर एनलाईटेन्ड विल द कंट्री बी ऐज़ अ होल.)

अनुवाद :
अब ये हमें देखना है कि हम बड़े होकर ऐसे नागरिक बनें कि लोग हमारे चरित्र का आलोक और हमारा प्रभाव हर ओर चाहें। हम ऐसा चरित्र नहीं चाहते कि लोग चाहें कि हम एक स्थान पर रहें एवं दूसरे से न घुले-मिलें। यदि हमें अच्छा नागरिक बनना है, जो अपने देश की सेवा कर सकें तो हमें जहाँ भी हम जाएँ अपने साथ प्रकाश लेकर चलना चाहिए (अच्छे चरित्र, ईमानदारी एवं सहृदयता का प्रकाश) न कि अन्धकार (दुश्चरित्रता, बेईमानी, दुष्टता आदि अन्धकार का प्रतीक)। औरों पर हमारा प्रभाव अच्छे के लिए होना चाहिए न कि बुरे के लिए। हमारा जीवन ऐसा होना चाहिए कि जहाँ भी हम जाएँ और जहाँ भी हम रहें अन्य लोगों को इस बात से प्रसन्नता होनी चाहिए कि हम उनके साथ हैं। एक अच्छा नागरिक प्रकाश का केन्द्र होता है जहाँ भी वह रहता है और जो भी वह करता है। किसी देश में अच्छे नागरिकों की संख्या जितनी अधिक होगी उतना ही अधिक वह देश प्रबुद्ध होगा सम्पूर्णता में।

A chain is as strong as is weakest link. Each one of us is a link in the chain that is our country. If we are weak and poor citizens, then our country will suffer, even though we may try to comfort ourselves with the false idea that it does not make any difference what one person does in such a large country where so many people live. But if one candle goes out then in that one place there is darkness instead of light. It is only when all the candles burn brightly that the whole house will be full of light.

(अ चेन इज़ ऐज़ स्ट्रॉन्ग ऐज़ इट्स वीकेस्ट लिंक. ईच वन ऑफ अस इज़ अ लिंक इन द चेन दैट इज़ आवर कंट्री. इफ वी आर पीक ऐण्ड पूअर सिटीजन्स, देन आवर कंट्री विल सफर, ईवन दो वी मे ट्राय टू कम्फर्ट आवरसेल्व्ज़ विद द फाल्स आईडिया देट इट डज़ नॉट मेक एनी डिफरेन्स व्हॉट वन पर्सन डज़ इन सच अ लार्ज कंट्री व्हेअर सो मैनी पीपल लिव. बट इफ वन कैण्डल गोज़ आऊट देन इन दैट वन प्लेस देयर इज़ डार्कनेस इन्स्टेड ऑफ लाईट. इट इज़ ओन्ली व्हेन ऑल द कैण्डल्स बर्न ब्राईटली दैट द होल हाऊज़ विल बी फुल ऑफ लाईट.)

अनुवाद :
एक जंजीर उतनी ही मज़बूत होती है जितनी उसकी सबसे कमज़ोर कड़ी। हम में से प्रत्येक देश रूपी जंजीर की एक कड़ी है। यदि हम कमज़ोर एवं घटिया नागरिक हैं तो हमारे देश को भुगतना पड़ेगा, हम चाहें जितना भी स्वयं को तसल्ली दें कि इतने बड़े देश में जहाँ इतने सारे लोग रहते हैं वहाँ एक व्यक्ति के कार्यों से कोई फर्क नहीं पड़ता। परन्तु यदि एक मोमबत्ती बुझ जाती है तो उस एक स्थान पर अंधेरा हो जाता है प्रकाश के स्थान पर। जब सभी मोमबत्तियाँ एक साथ तेज चमक के साथ जलती हैं तभी पूरा घर प्रकाशमय होता है।

Each of us, therefore, has the responsibility of being a good citizen. We must see that our particular link in the chain is not a weak one. When the Olympic Games were held in London in 1948, a flame was carried to London from Greece, where the Olympic Games used to be held in times long ago. This flame was carried by a long relay of runners right across Europe. Each runner, carrying a lighted torch, ran for a certain distance till he came to the place where a fresh runner was waiting for him. The new runner then lit his torch from the one that had been carried to him. As soon as he had done this he set out to run with his lighted torch to where the next runner was waiting. He had a fresh torch, which he, in his turn, lit from the one brought to him. And so from runner to runner the flame was carried till it reached London. From the last torch was lit the fire which burned all the time the games were going on.

(ईच ऑफ अस, देयरफोर, हैज़ द रिस्पॉन्सिबिलिटी ऑफ बीईंग अ गुड सिटीजन. वी मस्ट सी दैट आवर पर्टिकुलर लिंक इंन द चेन इज़ नॉट अ वीक वन. व्हेन द ओलम्पिक गेम्स वर हेल्ड इन लंदन इन नाईन्टीन फॉर्टी ऐट (1948), अ फ्लेम वॉज़ कैरिड टू लंदन फ्राम ग्रीस, व्हेअर द ओलम्पिक गेम्स यूज्ड टु बी हेल्ड इन टाईम्स लॉन्ग अगो. दिस फ्लेम वॉज़ कैरिड बाई, अ लॉन्ग रिले ऑफ रनर्स राईट अक्रॉस यूरोप. ईच रनर, कैरीईंग अ लाईटिड टॉर्च, रैन फॉर अ सर्टेन डिस्टेन्स टिल ही केम टु द प्लेस व्हेअर अ फ्रेश रनर वॉज़ वेटिंग फॉर हिम. द न्य रनर देन लिट हिज़ टॉर्च फ्रॉम द वन दैट हैड बीन कैरिड टू हिम. ऐज़ सून ऐज़ ही हैड डन दिस ही सेट आऊट टू रन विद हिज़ लाईटिड टॉर्च टु व्हेअर द नेक्स्ट रनर वॉज़ वेटिंग. ही हैड अ फ्रेश टॉर्च, व्हिच . ही, इन हिज़ टर्न, लिट फ्रॉम द वन ब्रॉट टू हिम. ऐण्ड सो फ्रॉम रनर टू रनर द फ्लेम वॉज़ कैरिड टिल इट रीच्ड लंदन. फ्रॉम द लास्ट टॉर्च वॉज़ लिट द फायर व्हिच बर्ड आल द टाईम द गेम्स वर गोईंग ऑन.)

अनुवाद :
इसलिए एक अच्छा नागरिक बनना हम में से प्रत्येक की ज़िम्मेदारी है। हमें स्वयं यह देखना चाहिए कि हम जंजीर की कमज़ोर कड़ी न हों। जब लंदन में आधुनिक . ओलम्पिक खेलों का आयोजन हुआ उन्नीस सौ अड़तालीस में (1948) एक मशाल लंदन से ग्रीस ले जाई गई, जहाँ बहुत पहले ओलम्पिक खेल हुआ करते थे। यह मशाल बहुत सारे धावकों द्वारा यूरोप के एक कोने से दूसरे कोने तक ले जाई गई। हर एक धावक हाथ में जलती हुई मशाल लेकर थोड़ी दूरी तक दौड़ता था और वहाँ पहुँचता था जहाँ एक दूसरा धावक उसका इंतज़ार कर रहा होता था। नया धावक फिर अपनी मशाल को पहले वाले धावक की मशाल से जलाता था। जैसे ही उसकी मशाल जल उठती वह दौड़ना शुरू कर देता वहाँ के लिए जहाँ अगला धावक उसका इंतज़ार कर रहा होता था। जिसके पास अपनी एक मशाल होती थी और जिसे वो अपनी बारी आने पर उसके पास लाई गई मशाल से जलाता था और इसी प्रकार लंदन तक मशाल एक धावक से दूसरे धावक तक ले जाई जाती रही। अन्तिम धावक के मशाल से ओलम्पिक खेलों की ज्योति प्रज्वलित की गई जो पूरे खेलों के दौरान जलती रही।

Although nothing was said about it, and no names were mentioned, at one place there was an accident. One runner, when handing over his torch to a fresh runner, let it go out. How ashamed he must have been! He had let the flame go out. He had broken the chain.

Each one of us, as we leave school, has a flame to carry which we have to pass on to others. We have been given knowledge and skill. These we pass on by using them in the service of our country. If we do not use them, it means that we are letting the flame go out, and none of us wants to do that. But if we are going to be able to keep alight the torch that has been given to us, we have to know how to look after it, and we have to know how to hold it as we run. In other words, we have to train ourselves for citizenship, and for service of our country.

(ऑल्दो नथिंग वॉज़ अबाऊट इट, ऐण्ड नो नेम्स वर मेन्शन्ड, ऐट वन प्लेस देयर वॉज़ ऐन एक्सिडेण्ट. वन रनर, व्हेन हैण्डिंग ओवर हिज़ टॉर्च टू अ फ्रेश रनर, लेट इट गो आऊट. हाऊ अशेम्ड ही मस्ट हैव बीन! ही हैड लेट द फ्लेम गो आऊट. ही हैड ब्रोकन द चेन.

ईच वन ऑफ अस, ऐज़ वी लीव स्कूल, हैज़ अ फ्लेम टू कैरी व्हिच वी हैव टू पास ऑन टू अदर्स. वी हैव बीन गिवन नॉलिज ऐण्ड स्किल. दीज़ वी पास ऑन बाय यूजिंग देम इन द सर्विस ऑफ आवर कंट्री. इफ वी डू नॉट यूज़ देम, इट मीन्स दैटवी आर लेटिंग द फ्लेम गो आऊट, ऐण्ड नन ऑफ अस वॉण्ट्स टू डू दैट. बट इफ वी आर गोईंग टू बी एबल टू कीप अलाईट द टॉर्च दैट हैज़ बीन गिवन टू अस, वी हैव टू नो हाऊ टू लुक आफ्टर इट, ऐण्ड वी हैव टू नो हाऊ टू होल्ड इट ऐज़ वी रन. इन अदर वर्ड्स, वी हैव टू ट्रेन आवरसेल्ब्ज़ फॉर सिटीज़नशिप, ऐण्ड फॉर सर्विस ऑफ आवर कंट्री.)

अनुवाद :
हालांकि इस बारे में कभी कुछ कहा नहीं गया, और नाम भी नहीं बताए गए, एक स्थान पर एक हादसा हो गया था। एक धावक जब अपनी मशाल अगले धावक को दे रहा था तो पहले धावक की मशाल बुझ गई। कितनी शर्मिन्दगी हुई होगी उस धावक को! उसने मशाल की ज्योति को बुझने दिया। उसने जंजीर (कड़ी) तोड़ दी थी।

जब हम अध्ययन समाप्त कर जाते हैं तो हम में से हर एक के पास एक मशाल होती है जिसे हमें दूसरे को देना होता है। हमें ज्ञान और कौशल दिया गया है। देश की सेवा में इनका उपयोग कर हम इन्हें आगे बढ़ाते हैं। यदि हम इनका उपयोग नहीं करते तो इसका अर्थ हुआ कि हम मशाल की ज्योति को बुझने दे रहे हैं और हम में से कोई भी यह नहीं करना चाहता। परन्तु यदि हमें मशाल की ज्योति को प्रज्वलित रखना है जो हमें दी गई है तो हमें यह जानना होगा कि उसकी देखभाल कैसे करें और दौड़ते समय उसे कैसे पकड़ें। दूसरे शब्दों में कहें तो हमें स्वयं को नागरिकता व देश की सेवा हेतु प्रशिक्षित करना है।

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