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	<title>Bhagya &#8211; MP Board Solutions</title>
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	<description>MP Board Texbook Solutions for Class 12th, 11th, 10th, 9th, 8th, 7th, 6th, 5th, 4th, 3rd, 2nd, 1st</description>
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		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 11 झाँसी की रानी प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-11/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 12:00:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 11 झाँसी की रानी PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 Jhansi Ki Rani Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter 11 Jhansi Ki Rani Questions and ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 11 झाँसी की रानी प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-11/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 11 झाँसी की रानी प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>In this article, we will share <a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-solutions/">MP Board Class 6th Hindi Solutions</a> Chapter 11 झाँसी की रानी PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.</p>
<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 Jhansi Ki Rani Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 11 Jhansi Ki Rani Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) रानी के बचपन की सहेलियाँ थीं<br />
(i) चाकू, छुरी<br />
(ii) तोप, बन्दूक,<br />
(iii) बरछी, ढाल<br />
(iv) तीर कमान।<br />
उत्तर<br />
(iii) बरछी, ढाल</p>
<p>(ख) रानी लक्ष्मीबाई बचपन में ही सीख गई थी<br />
(i) गायन कला<br />
(ii) नृत्य कला<br />
(iii) शस्त्र कला<br />
(iv) पाक कला।<br />
उत्तर<br />
(ii) नृत्य कला</p>
<p>(ग) रानी की सखियाँ साथ आई थीं<br />
(i) कुन्ती और सुनीता<br />
(ii) मीना और कांति,<br />
(iii) काना और मुंदरा<br />
(iv) मुन्द्रा और कान्हा।<br />
उत्तर<br />
(iii) काना और मुंदरा</p>
<p>(घ) रानी की तलवार से घायल होकर रण क्षेत्र से भागा था<br />
(i) लार्ड डलहौजी<br />
(ii) लेफ्टिनेंट वॉकर<br />
(iii) जनरल स्मिथ<br />
(iv) रोज।<br />
उत्तर<br />
(ii) लेफ्टिनेंट वॉकर</p>
<p>(ङ) बलिदान के समय वीरांगना लक्ष्मीबाई की उम्र थी<br />
(i) तेईस वर्ष<br />
(ii) बीस वर्ष<br />
(iii) चौबीस वर्ष<br />
(iv) पच्चीस वर्ष।<br />
उत्तर<br />
(i) तेईस वर्ष</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) वीर शिवाजी की &#8230;&#8230;&#8230; उनको याद जवानी थी।<br />
(ख) हुई वीरता की &#8230;&#8230;&#8230;. के साथ सगाई झाँसी में।<br />
(ग) रानी एक &#8230;&#8230;.. बहुतेरे होने लगे वार पर वार।<br />
(घ) गुमी हुई &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. की कीमत सबने पहचानी थी।<br />
उत्तर<br />
(क) गाथाएँ<br />
(ख) वैभव<br />
(ग) शत्रु<br />
(घ) आजादी।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) लक्ष्मीबाई ने बचपन में कौन-कौन से शस्त्रों को चलाना सीख लिया था ?<br />
उत्तर<br />
लक्ष्मीबाई ने अपने बचपन में ही बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी चलाना सीख लिया था।</p>
<p>(ख) झाँसी के राजा की मृत्यु होने पर डलहौजी प्रसन्न क्यों हुआ था ?<br />
उत्तर<br />
झाँसी के राजा की मृत्यु होने पर डलहौजी इसलिए प्रसन्न हुआ था क्योंकि राजा नि:सन्तान ही मर गए थे। लावारिस राज्य का अंग्रेजी शासन वारिस बन जाता था। ऐसा नियम उस समय के डलहौजी ब्रिटिश शासक ने बनाया था। यह नियम ब्रिटिश शासकों की राज्य-हड़प नीति कहलाई। डलहौजी इस कारण प्रसन्न हुआ कि अब झाँसी का राज्य भी ब्रिटिश शासन में शामिल हो जाएगा।</p>
<p>(ग) अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों पर किस प्रकार अधिकार किया?<br />
उत्तर<br />
अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों को अपने अधिकार में कर लिया क्योंकि भारतीय राज्यों के बहुत से शासक नि:सन्तान थे और उन्हें दत्तक पुत्र लेकर राज्य का वारिस बनाने का कोई अधिकार नहीं है, ऐसा नियम बनाकर राज्य हड़प नीति के अन्तर्गत भारतीय राज्यों को अपने अधीन कर लिया।</p>
<p>(घ) &#8216;हमको जीवित करने आई, बन स्वतंत्रता नारी थी,&#8217; से कवयित्री का आशय क्या है ?<br />
उत्तर<br />
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी को आजाद बनाए रखने के लिए कुल तेईस वर्ष की उम्र में ही अपना बलिदान कर दिया। वह अत्यन्त तेजस्वी थी। उन्होंने स्वतंत्रता की नारी के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने हम सभी भारतीयों को &#8216;स्वतंत्रता ही जीवन था इस तरह शिक्षा देने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने हमें आजादी का मार्ग दिखाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उन्हें जो भी हम भारतीयों को सिखाना था, वह अपने बलिदान से सिखा दिया। वह स्वतंत्रता की साक्षात् देवी थी।</p>
<p>(ङ)&#8217;झाँसी की रानी&#8217; कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?<br />
उत्तर<br />
&#8216;झाँसी की रानी&#8217; कविता से हमें प्रेरणा मिलती है कि हम अपनी मातृभूमि की आजादी की रक्षा अपने प्राणों की बलि चढ़ा कर भी करें। अन्याय के आगे नझुकें। साथ ही, हमारे अन्दर राष्ट्र प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना पुष्ट होती है।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए</p>
<p>(क) हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में।<br />
(ख) जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई, मर्द बनी मर्दानों में।<br />
(ग) घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीरगति पानी थी।<br />
(घ) मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी।<br />
उत्तर<br />
&#8216;सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या&#8217; शीर्षक के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 3,7, 10 व 11 की व्याख्या देखिए।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिएभृकुटी, कृपाण, वैभव, वज्र, अश्रुपूर्ण।<br />
उत्तर<br />
कक्षा में अध्यापक महोदय के सहयोग से शुद्ध रूप से उच्चारण सीखिए और अभ्यास कीजिए।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नलिखित शब्दों में सही मात्रा लगाकर उनके शुद्ध रूप लिखिए<br />
(i) किमत,<br />
(ii) फीरंगी<br />
(iii) झांसि<br />
(iv) उदीत<br />
(v) खुब<br />
(vi) बून्देले<br />
(vii) शत्रु<br />
(viii) मनूज।<br />
उत्तर-(i) कीमत, (ii) फिरंगी, (ii) झाँसी, (iv) उदित, (v) खूब, (vi) बुन्देले, (vii) शत्रु, (vii) मनुज।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित शब्दों में तत्सम और तद्भव शब्द छाँटकर लिखिए<br />
कृपाण, बूढ़ा, मुंह, चिन्ता, पिता, सौभाग्य, शोक, सौख, शत्रु, मनुजा<br />
उत्तर<br />
तत्सम &#8211; कृपाण, चिन्ता, सौभाग्य, शोक, शत्रु।<br />
तद्भव &#8211; बूढ़ा, मुँह, पिता, सीख, मनुज।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
सु, वि, सम् उपसर्ग लगाकर तीन-तीन शब्द बनाइए<br />
उत्तर<br />
(क)<br />
(i) सु + भट = सुभट<br />
(ii) सु + मति = सुमति,<br />
(iii) सु + लेख = सुलेख<br />
(iv) सु + मुखी = सुमुखी।</p>
<p>(खा)<br />
(i) वि + राट &#8211; विराट<br />
(ii) वि + रूप &#8211; विरूप<br />
(iii) वि + जय &#8211; विजय<br />
(iv) वि + ख्यात &#8211; विख्यात।</p>
<p>(ग)<br />
(i) सम् + मुख &#8211; सम्मुख<br />
(ii) सम् + वृद्धि &#8211; सम्वृद्धि<br />
(iii) सम् + मिलित &#8211; सम्मिलित्<br />
(iv) सम् + ऋद्धि- समृद्धि।</p>
<p>प्रश्न 5.<br />
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए।<br />
(i) सिंहासन, (ii) गाथा, (iii) मैदान, (iv) वीरगति (v) स्वतंत्रता।<br />
उत्तर-<br />
(i) राजसभा में सिंहासन पर राजा विराजमान है।<br />
(ii) लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बुन्देलखण्ड का बच्चा-बच्चा गाता है।<br />
(iii) लड़ाई के मैदान में वीरों ने युद्ध किया।<br />
(iv) अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करते हुए अपने वीरों ने वीरगति पाई थी।<br />
(v) स्वतंत्रता के दीवाने फाँसी के फंदों को चूमते हुए शहीद हो गए।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए।<br />
(i) स्वर्ग सिधारना<br />
(ii) मुँह की खाना।<br />
उत्तर<br />
(i) स्वर्ग सिधारना &#8211; मृत्यु प्राप्त करना।<br />
प्रयोग-आजादी की रक्षा के लिए युद्ध करते हुए अनेक वीर स्वर्ग सिधार गए।<br />
(ii) मुंह की खाना- बुरी तरह पराजित होना।<br />
प्रयोग-पाक सेना को भारत की सेना से हर युद्ध में मुँह की खानी पड़ी है।</p>
<p><strong>झाँसी की रानी सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या</strong></p>
<p>(1) <em>&#8216;सिंहासन हिल छ&#8217;, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी।</em><br />
<em>बूढ़े भारत में भी आई, फिर से नई जवानी थी। </em><br />
<em>गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी। </em><br />
<em>दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। </em><br />
<em>चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी। </em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। </em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।1।</em></p>
<p>शब्दार्थ-राजवंशों ने = राजा-महाराजाओं ने। भृकुटी = भौंहें (क्रोध में भर उठे थे)। गुमी हुई = खोई हुई। फिरंगी = अंग्रेजों ने।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक &#8216;भाषा-भारती&#8217; के &#8216;झाँसी की रानी&#8217; नामक पाठ से ली गई हैं। इसकी रचयिता &#8216;श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान&#8217; हैं।</p>
<p>प्रसंग-यहाँ पर कवयित्री ने झाँसी की रानी की वीरता का उल्लेख किया है। जब रानी झाँसी के सिंहासन पर बैठी तो उन्होंने अंग्रेजों से अपने देश को आजाद कराने के लिए उनसे युद्ध किया।</p>
<p>व्याख्या-जब लक्ष्मीबाई झाँसी की रानी बनी तो उन्होंने भारतीय जनता में आजादी का मन्त्र फूंक दिया। अंग्रेजों के द्वारा गुलाम बनाये गये राजाओं ने भी अंग्रेजों से युद्ध करने का संकल्प लिया। क्रोध में उनकी भौहें तन उठी और देश में उथल-पुथल मच गई। भारत जो आजादी की आशा ही छोड़ चुका था उसमें एक नई आशा जागी। अब सबको लग रहा था कि अपनी आजादी जो उन्होंने खो दी थी वह अत्यन्त कीमती थी। अब सबने भारत से अंग्रेजों को खदेड़ने का निश्चय कर लिया। इस प्रकार सन् 1857 में फिर से अतीत के गौरव की वह तलवार युद्ध में चमक उठी। इस कहानी को बुन्देलखण्ड के हरबोले (गवैये) गाते हैं कि झाँसी की रानी ने अंग्रेजों के साथ पुरुषों की भांति जमकर युद्ध किया था।</p>
<p>(2) <em>कानपुर के नाना की मुंह बोली बहिन छबीली थी।</em><br />
<em>लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी। </em><br />
<em>नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेली थी। </em><br />
<em>बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी, उसकी यही सहेली थी। </em><br />
<em>वीर शिवाजी की गाथाएँ, उसको याद जबानी थी।</em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।2।</em></p>
<p>शब्दार्थ-सन्तान = पुत्र-पुत्री। गाथाएँ = कहानियाँ । कृपाण = तलवार।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के साहस और वीरता का वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुंहबोली बहिन थीं। उन्होंने बचपन में उनका नाम छबीली रखा था। लक्ष्मीबाई अपने पिता की इकलौती सन्तान थीं। वह बचपन में नाना के साथ पढ़ती थीं और उन्हें के साथ खेलती थीं। बचपन में उनके प्रिय खेल थे बरछी, बाल, तलवार और कटारों से खेलना। यही उनके खिलौने थे और यही उन्हें अपनी सहेलियों की तरह प्रिय थे। लक्ष्मीबाई बचपन से साहसी थीं। वीर शिवाजी की वीरता की कहानियाँ उन्हें बचपन से ही याद थीं। यह कहानी बुन्देलखण्ड के हरबोले बड़े जोर-शोर से गाते हैं कि लक्ष्मीबाई मदों की तरह अंग्रेजों से खूब लड़ी थीं।</p>
<p>(3) <em>हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में।</em><br />
<em>ब्याह हुआ, रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में। </em><br />
<em>राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में।</em><br />
<em>सुभट-बुन्देलों की विरुदावलि-सी वह आईझाँसी में। </em><br />
<em>चित्रा ने अर्जुन को पाया शिव से मिली भवानी थी। </em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।3।</em></p>
<p>शब्दार्थ-वैभव = सम्पन्नता। विरुदावलि &#8211; प्रशंसा के गीत। भवानी = पार्वती जी।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के विवाह का वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-लक्ष्मीबाई वीरता की साकार मूर्ति थी। उनकी सगाई झाँसी के राजा के साथ हो गई और वे विवाह करके झाँसी की रानी बन गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वीरता का विवाह सम्पन्नता के साथ हुआ हो। राजभवन में बधाइयाँ बर्जी, खूब खुशियाँ मनाई गई। भाट लोग उनकी प्रशंसा के गीत गाते थे। उन्होंने झाँसी के राजा को उसी प्रकार प्राप्त किया था जैसे चित्रा ने अर्जुन को और पार्वती ने शंकर जी को प्राप्त किया था। यह कहानी बुन्देलखण्ड के हरबोले गाते हैं। झाँसी की रानी पुरुषों के समान बड़ी वीरता से लड़ी थी।</p>
<p>(4) <em>उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियालीछाई।</em><br />
<em>किन्तु काल-गति चुपके चुपके, काली घटा घेर लाई। </em><br />
<em>तीर चलाने वाले कर में, उसे चूड़ियाँ कब भाई। </em><br />
<em>रानी विधवा हुई हाय ! विधि को भी नहीं दया आई। </em><br />
<em>निःसंतान मरे राजाजी, रानी शोक समानी थी। </em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।4।</em></p>
<p>शब्दार्थ-उदित = उदय। मुदित = प्रसन्न। उजियाली = चमक,खुशियाँ । कालगति = मृत्यु की गति । काली घटा = दु:ख के बादल। कर हाथ। विधि=विधाता। शोक= दुःख।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के जीवन में आये दुःखों का वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-रानी जब विवाह करके झाँसी आई तो ऐसा लग रहा था मानो सौभाग्य उदय हो गया है। महल में प्रसन्नता का वातावरण था किन्तु काल की गति को कोई नहीं जान सकता। वहाँ दु:ख के बादल कब छा गए किसी को कुछ भी पता न चला। विधाता को भी रानी के तीर चलाने वाले हाथों में चूड़ियाँ नहीं सुहाई। राजा की असमय मृत्यु से रानी विधवा हो गई। उनके कोई सन्तान भी नहीं थी। अब रानी के शोक का ठिकाना नहीं था। ऐसा बुन्देलखण्ड हरबोले गाते हैं। झाँसी की रानी ने अंग्रेजों से पुरुषों की भाँति वीरता से युद्ध किया।</p>
<p>(5) <em>बुङ्गमा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हर्षाया।</em><br />
<em>राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया। </em><br />
<em>फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया। </em><br />
<em>लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज झाँसी आया। </em><br />
<em>अश्रुपूर्ण रानी ने देखा, झाँसी हुई विरानी थी।</em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।5।</em></p>
<p>शब्दार्थ-हर्षाया = प्रसन्न हुआ। दुर्ग = किला। लावारिस = जिसका कोई उत्तराधिकारी न हो। वारिस = उत्तराधिकारी। वीरानी = परायी।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में अंग्रेजों के खिलाफ रानी के द्वारा युद्ध करने का वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-जब राजा की मृत्यु हो गई तो अंग्रेज गवर्नर डलहौजी बड़ा प्रसन्न हुआ। उसने सोचा कि अब झाँसी का राज्य हड़पने का अच्छा मौका है। उसने अपनी फौजें झाँसी की ओर भेज दर्दी और किले पर अपना झण्डा फहरा दिया। वह लावारिस झाँसी का वारिस (मालिक) बन बैठा। रानी को इससे बड़ी भारी पीड़ा हुई। आँखों में आँसू भर कर उसने देखा कि झाँसी परायी हुई जा रही है। बुन्देलखण्ड के हरबोले गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की भाँति अंग्रेजों से वीरतापूर्वक युद्ध किया।</p>
<p>(6)<em> छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातोंबात।</em><br />
<em>कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर पर भी घात। </em><br />
<em>उदैपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात। </em><br />
<em>जबकि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर,अभी हुआ था बजनिपात।</em><br />
<em>बंगाल, मद्रास आदि की, भी तो यही कहानी थी। </em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।6।</em></p>
<p>शब्दार्थ-घात = निशाना लगाना। विसात &#8211; ताकत। बज-निपात = बिजली टूटना।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में अंग्रेजों द्वारा भारत में अपने शासन को किस तरह स्थापित किया गया। इसका वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-अंग्रेजों ने दिल्ली, लखनऊ को बड़ी आसानी से अपने कब्जे में कर लिया, उन्होंने पेशवा को बिठूर में कैद कर लिया। नागपुर, उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक आदि का तो कहना ही क्या उन्होंने सिंध, पंजाब, ब्रह्मपुत्र, बंगाल, मद्रास आदि नगरों समेत पूरे भारत को अपने अधीन कर लिया। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।</p>
<p>(7) <em>इनकी गाथा छोड़ चलें हम, झांसी के मैदानों में।</em><br />
<em>जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई, मर्द बनी मर्दानों में। </em><br />
<em>लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में।</em><br />
<em>रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वन्द्व असमानों में। </em><br />
<em>जख्मी होकर वॉकर भागा उसे अजब हैरानी थी। </em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।7।</em></p>
<p>शब्दार्थ-गाथा = कथा, कहानी। द्वन्द्व = दो व्यक्तियों का परस्पर युद्ध। असमान = बराबर नहीं। अजब = अनोखा।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में रानी लक्ष्मीबाई के युद्ध कौशल का सजीव वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और उनके अद्भुत युद्ध कौशल की कहानियाँ झाँसी के मैदानों में बिखरी पड़ी हैं। युद्ध के दौरान वे पुरुष रूप धारण कर कहर बरपाती थी। अंग्रेजों से छिड़े भीषण युद्ध में अंग्रेजों की सेना का लेफ्टिनेंट वॉकर रानी से युद्ध करने के लिए आगे आया। रानी ने अपनी चमचमाती तलवार खींच ली और इसके साथ ही दो बिना बराबरी के योद्धाओं (एक पुरुष व एक महिला) में युद्ध प्रारम्भ हो गया किन्तु रानी लक्ष्मीबाई के रण-कौशल के आगे उसकी एक न चली और वह शीघ्र ही घायल होकर मैदान से भाग गया। उसे एक महिला के यूँ वीरता-प्रदर्शन पर काफी आश्चर्य था। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मदों की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।</p>
<p>(8)<em> रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार।</em><br />
<em>घोड़ा थककर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार। </em><br />
<em>यमुना तट पर अंग्रेजों ने, फिर खाई रानी से हार। </em><br />
<em>विजयी रानी आगे चल दी किया ग्वालियर पर अधिकार। </em><br />
<em>अंग्रेजों के मित्र, सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी। </em><br />
<em>बुंदेले हरबोलों के मुंह, हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।8।</em></p>
<p>शब्दार्थ-निरंतर = लगातार । तत्काल = तुरन्त, जल्दी ही। सिधार = मरकर। रजधानी = राजधानी।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई के अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की अमर गाथा का सुन्दर वर्णन किया है।</p>
<p>व्याख्या-झाँसी पर जब अंग्रेजों ने अपना शासन स्थापित कर लिया तो रानी लक्ष्मीबाई ने उनके विरुद्ध युद्ध का बिगुल बजा दिया। इसी क्रम में वह अपनी एक छोटी-सी टुकड़ी के साथ लगभग सौ मील का लम्बा सफर तय करके कालपी आ पहुँची। इतनी लम्बी दूरी और वह भी लगातार, अत्यधिक थकान के कारण रानी का प्रिय घोड़ा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा और अगले ही पल उसकी मृत्यु हो चुकी थी। घोड़े की मृत्यु से रानी को झटका लगा किन्तु उसने हिम्मत नहीं हारी। इस बीच अंग्रेजों को रानी के कालपी पहुँचने की सूचना मिल चुकी थी।</p>
<p>यमुना के किनारे अंग्रेजों और रानी के मध्य युद्ध हुआ। फिर से रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए और उन्हें पराजय का मुँह देखने के लिए मजबूर कर दिया। अंग्रेजों को धूल चटाने के पश्चात् बड़े मनोबल व आत्मविश्वास के साथ रानी लक्ष्मीबाई ने कालपी से ग्वालियर की ओर कूच किया और ग्वालियर पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। रानी के हाथों परास्त ग्वालियर के पूर्व राजा सिंधिया, जो अंग्रेजों का मित्र भी था को अपनी राजधानी छोड़कर भाग जाना पड़ा था। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।</p>
<p>(9) <em>विजय मिली पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी।</em><br />
<em>अब जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुंह की खाई थी। </em><br />
<em>काना और मुंदरा सखियाँ रानी के संग आई थीं। </em><br />
<em>युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी। </em><br />
<em>पर पीछे छूरोज आ गया, हाय ! घिरी अब रानी थी। </em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।91</em></p>
<p>शब्दार्थ-विजय = जीत। सम्मुख = सामने। मुँह की खाना = पराजित होना।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में रानी और उसकी सहेलियों द्वारा अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने व रानी के दुश्मनों के मध्य घिर जाने का वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-रानी लक्ष्मीबाई से मिली करारी हार से बौखलाकर अंग्रेजों ने अब बहुत बड़ी सेना लड़ने के लिए भेजी। इस बार अंग्रेजी सेना का प्रमुख जनरल स्मिथ था, किन्तु उसकी एक न चली और रानी लक्ष्मीबाई और उनकी दो सहेलियों काना और मुन्दरा ने युद्ध के मैदान में अंग्रेजी सेना पर कहर बरपाते हुए जनरल स्मिथ को पराजित कर दिया। पर देखते ही देखते एक नये दल-बल के साथ पीछे से यूरोज लड़ने के लिए युद्ध-मैदान पर आ पहुँचा। रानी और उसकी छोटी-सी सेना अब बुरी तरह घिर चुकी थी। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मदों की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया।</p>
<p>(10) <em>तो भी रानी मार काटकर चलती बनी सैन्य के पार।</em><br />
<em>किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार। </em><br />
<em>घोड़ा अड़ा नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार। </em><br />
<em>रानी एक शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार। </em><br />
<em>घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीरगति पानी थी। </em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।</em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।10।</em></p>
<p>शब्दार्थ-सैन्य = सेना। विषम = भयानक। सवार = घुड़सवार सैनिक । वीरगति = युद्ध में बहादुरी से लड़ते हुए मृत्यु को प्राप्त हो जाना।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-झाँसी पर जब अंग्रेजों ने आक्रमण किया तो रानी | लक्ष्मीबाई ने उनका बड़ी बहादुरी से मुकाबला किया। रानी का घोड़ा कालपी में आकर मर गया तब उन्होंने नया घोड़ा लिया और अंग्रेजों की सेना में मार-काट मचा दी।</p>
<p>व्याख्या-रानी शत्रुओं से घिरी हुई थी किन्तु वह बड़ी वीरता से उन्हें मारकर अपने लिये रास्ता निकाल लेती थी किन्तु, एक नाले के पास घोड़े के अड़ जाने से शत्रुओं ने उसे फिर से घेरने का मौका पा लिया। युद्ध में रानी बुरी तरह घायल हो गई। इस प्रकार वह बहादुर सिंहनी लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गई। बुन्देले हरबोले आज भी उसकी गौरव गाथा गाकर बताते हैं कि रानी लक्ष्मीबाई ने बड़ी बहादुरी से युद्ध किया था।</p>
<p>(11) <em>रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी।</em><br />
<em>मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी। </em><br />
<em>अभी अ कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी। </em><br />
<em>हमको जीवित करने आई, बन स्वतंत्रता नारी थी। </em><br />
<em>दिखा गई पथ सिखा गई, हमको जो सीख सिखानी थी।</em><br />
<em>बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। </em><br />
<em>खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी। 11।</em></p>
<p>शब्दार्थ-सिधार = स्वर्ग सिधार गई। दिव्य = अलौकिक, दैवीय। तेज = प्रकाश (आत्मा का प्रकाश परमात्मा के प्रकाश से मिल गया)। मनुज = मनुष्य। अवतारी = अवतार लेने वाली देवी। स्वतन्त्रता नारी= स्वतन्त्रता की देवी। पथ-रास्ता। सीख = शिक्षा।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-इन पंक्तियों में कवयित्री ने झाँसी की रानी की वीरता का वर्णन बड़ी भावपूर्ण शैली में किया है।</p>
<p>व्याख्या-झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई स्वर्ग सिधार गई। अब उसकी अलौकिक सवारी स्वर्ग का विमान था। उसकी आत्मा का तेज परमात्मा के तेज से मिल गया। रानी ने मोक्ष प्राप्त किया। वह इसकी सच्ची अधिकारिणी भी थीं। तेईस साल की उम्र में उसकी वीरता को देखकर ऐसा लगता था कि वह कोई मनुष्य नहीं थी बल्कि अवतार लेकर कोई देवी आई थी। वह स्वतन्त्रता की देवी हमें एक नया जीवन देने आई थीं। वह हमें स्वतन्त्रता का रास्ता दिखा गई और अपने देश को स्वतन्त्र कराने का पाठ पढ़ा गई। बुन्देलखण्ड के हरबोले इस कहानी को गाते हैं कि वह मर्दो जैसे युद्ध करने वाली रानी जो बड़ी वीरता से लड़ी थी, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ही थी।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
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</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 5 व्याकरण परिवार प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 12:00:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 5 व्याकरण परिवार PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 Vyakaran Parivar Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar Questions and Answers प्रश्न 1. ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 5 व्याकरण परिवार प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-5/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 5 व्याकरण परिवार प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
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<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 Vyakaran Parivar Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) संज्ञानन्द का काम नहीं हो सकता<br />
(i) विशेषण के बिना<br />
(ii) क्रिया विशेषण के बिना<br />
(iii) विस्मयादिबोधक के बिना,<br />
(iv) क्रिया देवी के बिना।<br />
उत्तर<br />
(iv) क्रिया देवी के बिना</p>
<p>(ख) संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द<br />
(i) क्रिया विशेषण<br />
(ii) विशेषण,<br />
(iii) सम्बन्धबोधक<br />
(iv) क्रिया।<br />
उत्तर<br />
(ii) विशेषण।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) अपनी भाषा को बिगाड़कर विदेशी भाषा के शब्दों की मिलावट से हम अपनी संस्कृति पर गहरा &#8220;&#8230;..&#8221; कर रहे हैं।<br />
(ख) महान, महानतर और महानतम शब्द &#8230;&#8230;..&#8221; की अवस्थाएँ हैं।<br />
(ग) क्रिया विशेषण की माँ का नाम &#8230;&#8230;&#8230;&#8221; है।<br />
(घ) संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य में अन्य शब्दों से सम्बन्ध बताने वाले शब्द &#8230;&#8230;&#8230;.&#8221; कहलाते हैं।<br />
उत्तर<br />
(क) आघात<br />
(ख) विशेषण<br />
(ग) क्रिया देवी<br />
(घ) सम्बन्धबोधक।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) विशेषण किसे कहते हैं?<br />
उत्तर<br />
संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं।</p>
<p>(ख) सर्वनाम शब्द किन शब्दों के बदले में आते हैं ?<br />
उत्तर<br />
संज्ञा शब्दों के बदले में सर्वनाम शब्द आते हैं।</p>
<p>(ग) समुच्चयबोधक वाक्य में क्या काम करता है?<br />
उत्तर<br />
समुच्चयबोधक वाक्य दो शब्दों या दो या दो से अधिक वाक्यों को जोड़ता है। दो या दो से अधिक वाक्यों को जोड़कर ऐसे उपवाक्यों का निर्माण होता है जो अपना स्वतंत्र अर्थ प्रकट कर सकते हैं।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
(क) तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए<br />
उत्तर<br />
संज्ञानन्द और क्रिया देवी के तीन बच्चे हैं-एक पुत्र और दो पुत्रियाँ । पुत्र का नाम &#8216;सर्वनाम&#8217; है। उनकी दो बेटियों के नाम हैं-विशेषण तथा क्रिया-विशेषण। उनके दो नौकर भी हैं जिनके नाम हैं-सम्बन्धबोधक तथा समुच्चयबोधक।</p>
<p>(ख) व्याकरण के परिवार में विशेषण का क्या महत्त्व<br />
उत्तर<br />
व्याकरण के परिवार में विशेषण का बहुत बड़ा महत्त्व है। विशेषण संज्ञा और सर्वनाम की विशेषताओं, उनके गुणों को बताने वाला शब्द है। विशेषण की तीन अवस्थाएँ होती हैं</p>
<ul>
<li>सामान्य अवस्था</li>
<li>तुलनात्मक अवस्था</li>
<li>उत्तमावस्था। जैसे-विशाल, विशालतर, विशालतम।</li>
</ul>
<p>(ग) हिन्दी भाषा के जन्म की कहानी लिखिए।<br />
उत्तर<br />
हिन्दी भाषा का जन्म संस्कृत भाषा से हुआ है। संस्कृत भाषा हमारे देश की सबसे प्राचीन भाषा है। हिन्दी भाषा के अतिरिक्त संस्कृत से ही प्राकृत और पाली भाषाओं का जन्म हुआ है। प्राकृत भाषाओं से अपभ्रंश भाषा विकसित हुई है। इसी अपभ्रंश से हिन्दी का धीरे-धीरे विकास हुआ है। हिन्दी भाषा की विशेषता है कि इसमें जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है।</p>
<p>(घ) क्रिया-विशेषण और सम्बन्धबोधक में क्या अन्तर<br />
उत्तर<br />
क्रिया-विशेषण-वाक्य की क्रिया की विशेषता बताता है। इसके अतिरिक्त विशेषण और स्वयं अपनी अर्थात् क्रिया-विशेषण की भी विशेषताओं का उल्लेख करती है।<br />
सम्बन्धबोधक-किसी संज्ञा या सर्वनाम के पहले प्रयुक्त संज्ञा अथवा सर्वनाम के साथ उनके परस्पर सम्बन्ध को स्पष्ट करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।</p>
<p>प्रश्न 5.<br />
सोचिए और बताइए</p>
<p>(क) क्रिया-विशेषण, विशेषण से किस प्रकार भिन्न<br />
उत्तर<br />
क्रिया-विशेषण द्वारा किसी वाक्य की क्रिया, उसमें प्रयुक्त विशेषण अथवा दूसरी क्रिया-विशेषण की विशेषता बताई जाती है। जबकि विशेषण अपने वाक्य में प्रयुक्त किसी संज्ञा या सर्वनाम की ही विशेषता स्पष्ट करता है। यही दोनों में अन्तर है।</p>
<p>(ख) संकट के समय यदि आपके मित्र साथ छोड़ दें तो आप क्या करेंगे?<br />
उत्तर<br />
संकट के समय यदि हमारा मित्र अचानक साथ छोड़ देता है, तो हमें अचम्भा या विस्मय होता है। लेकिन हम प्रयास करेंगे कि उस मित्र की सहायता या सहयोग हमको मिले। यदि किसी कारण वैसा नहीं होता है तो हमें स्वयं संकट का मुकाबला करने को तैयार रहना चाहिए। साहसपूर्वक आने वाले संकट की घड़ी में धैर्यपूर्वक अपने कर्त्तव्य का पालन करते रहना चाहिए।</p>
<p>(ग) विस्मयादिबोधक शब्दों से हम अपने मन के किन-किन भावों को प्रकट करते हैं ?<br />
उत्तर<br />
विस्मयादिबोधक शब्द हमारे मन के भय, आक्रोश, कष्ट, खुशी, प्रशंसा, अचम्भा आदि भावों को प्रकट करता है।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) क्या आप समुच्चयबोधक शब्दों के अभाव में अपनी बात पूरी कर सकते हैं ?<br />
उत्तर<br />
हम समुच्चयबोधक शब्दों के अभाव में अपनी बात पूरी कर तो सकते हैं परन्तु अनावश्यक रूप से शब्दों की आवृत्ति बढ़ने से वाक्य की संरचना का रूप बिगड़ जाएगा।</p>
<p>(ख) यदि भाषा में क्रिया का प्रयोग न किया जाए तो क्या होगा?<br />
उत्तर<br />
भाषा में क्रिया के प्रयोग के बिना बात का उद्देश्य पता नहीं चलेगा। अर्थ समझ में नहीं आने पर भाषा का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।</p>
<p>(ग) यदि व्याकरण में सर्वनामों का प्रयोग न होता तो भाषा पर क्या प्रभाव पड़ता?<br />
उत्तर<br />
सर्वनामों के प्रयोग के बिना भाषा की सुन्दरता समाप्त ही हो जाती और संज्ञाओं के प्रयोग बार-बार करने पड़ते जिससे भाषा को बोलने, पढ़ने अथवा लिखने के प्रति अरुचि बनी रहती।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
1. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए<br />
(1) सन्नाटा पसरना<br />
(2) गप्पें लड़ाना<br />
(3) आदत में शुमार होना,<br />
(4) हाथ बंटाना।<br />
उत्तर</p>
<ol>
<li>सन्नाटा पसरना-हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के क्रिकेटरों के बीच मैच होने के कारण लोग घरों से नहीं निकले। अत: सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।</li>
<li>गप्पें लड़ाना-पुस्तकालय में बैठे छात्र/छात्राएँ आपस में गप्पें लड़ाते रहते हैं।</li>
<li>आदत में शुमार होना-बात-बात में झूठ बोलना तुम्हारी आदत में शुमार है।</li>
<li>हाथ बँटाना-घर के सदस्य घरेलू कामकाज में हाथ बँटाते ही हैं।</li>
</ol>
<p>प्रश्न 2.<br />
नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द उनके नीचे लिखे शब्दों से चुनकर लिखिए<br />
उत्तर<br />
शब्द &#8211; विलोम<br />
(i) सुत &#8211; (क) असत्य<br />
(ii) मित्र &#8211; (ख) सरस<br />
(iii) प्रशंसा &#8211; (ग) विषाद<br />
(iv) हर्ष &#8211; (घ) सुता<br />
(v) नीरस &#8211; (ड.) निराशा<br />
(vi) सत्य &#8211; (च) शत्रु<br />
(vii) आशा &#8211; (छ) निन्दा<br />
उत्तर<br />
(i) &#8211; (घ),(ii) &#8211; (च),(iii) &#8211; (छ),(iv) &#8211; (ग), (v) &#8211; (ख), (vi) &#8211; (क), (vii) &#8211; (ङ)</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए<br />
(1) घर, (2) पुत्र, (3) पुत्री, (4) हाथ, (5) मित्र।<br />
उत्तर<br />
(1) घर=गृह, सदन, भवन।<br />
(2) पुत्र = बेटा, सुत, तनय।<br />
(3) पुत्री = सुता, बेटी, तनया।<br />
(4) हाथ = कर, हस्त, बाहु।<br />
(5) मित्र = सृहद, सखा, साथी।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित कथन किसके हैं, उनके विषय में एक-एक वाक्य लिखिए</p>
<p>(1) &#8220;मैं सर्वनाम की बड़ी बहन हूँ।&#8221;<br />
उत्तर<br />
सर्वनाम की बड़ी बहन विशेषण है। यह कथन विशेषण का है। विशेषण का काम है किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता या उनके गुण बताना।</p>
<p>(2) &#8220;मैं अपनी माँ को बहुत चाहती हूँ।&#8221;<br />
उत्तर<br />
यह कथन है क्रिया-विशेषण का जो क्रिया देवी की दूसरी पुत्री है। क्रिया-विशेषण क्रिया की विशेषता बताती है। यह विशेषण और स्वयं अपनी (क्रिया विशेषण की) विशेषता बतलाती है।</p>
<p>(3) &#8220;बच्चा हमारे घर जन्मे और उसका नामकरण पड़ौसी करें।&#8221;<br />
उत्तर<br />
यह वाक्य &#8216;संज्ञानन्द&#8217; का है। इस के विषय में संज्ञानन्द का कहना है कि हिन्दी (हिन्दू, हिन्दुस्तान) शब्द संस्कृत का नहीं है। यह फारसी का है। फारसी बोलने वाले सिन्धु को हिन्दू बोलते थे। इसलिए इस देश की भाषा को हिन्दी कहकर पहचान दी गई है।</p>
<p>(4) &#8220;मैं परिवार में सबसे बड़ा हूँन ! घर का सारा काम मुझे ही करना पड़ता है।&#8221;<br />
उत्तर<br />
उपर्युक्त कथन सर्वनाम का है। सर्वनाम का प्रयोग संज्ञा के बदले करते हैं।</p>
<p>प्रश्न 5.<br />
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए<br />
(क) वह क्रिया, जिसका कोई कर्म न हो।<br />
(ख) वह क्रिया जिसके साथ कर्म होता है।<br />
(ग) वे शब्द जिनके रूप लिंग, वचन या कारक के अनुसार बदल जाते हैं।<br />
(घ) वे शब्द जिनके रूप सदैव एक जैसे रहते हैं।<br />
(ङ) कार्य की समाप्ति का बोध कराने वाला काल।<br />
उत्तर<br />
(क) अकर्मक<br />
(ख) सकर्मक<br />
(ग) विकारी<br />
(घ) अविकारी<br />
(ङ) भूतकाल।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञा एवं उसके भेदों के नाम छाँटकर लिखिए<br />
(क) सभी प्राणियों में वाणी का वरदान मात्र मानव को मिला है।<br />
(ख) मानव अपने सत्कर्मों से स्वर्ग को भी पृथ्वी पर उतार सकता है।<br />
(ग) सबके साथ प्रेम का व्यवहार करो।<br />
(घ) गोपाल कृष्ण गोखले बचपन से तेज बुद्धि के थे।<br />
(ङ) सब के जीवन में बुढ़ापा आता ही है।<br />
(च) गंगा हिमालय से निकलती है।<br />
(छ) लड़के खेल रहे हैं।<br />
(ज) वह पुस्तक पुरानी है।<br />
उत्तर-<br />
(क)</p>
<ol>
<li>प्राणियों-जातिवाचक संज्ञा,</li>
<li>वाणी- जातिवाचक संज्ञा,</li>
<li>वरदान-भाववाचक संज्ञा,</li>
<li>मानव-जातिवाचक संज्ञा।</li>
</ol>
<p>(ख)</p>
<ol>
<li>मानव-जातिवाचक संज्ञा</li>
<li>सत्कर्मों-भाव वाचक संज्ञा।</li>
<li>स्वर्ग-भाववाचक संज्ञा,</li>
<li>पृथ्वीजातिवाचक संज्ञा।</li>
</ol>
<p>(ग)</p>
<ol>
<li>प्रेम-भाववाचक संज्ञा</li>
<li>व्यवहार-भाववाचक संज्ञा।</li>
</ol>
<p>(घ)</p>
<ol>
<li>गोपाल कृष्ण गोखले-व्यक्तिवाचक संज्ञा,</li>
<li>बचपन-भाववाचक संज्ञा</li>
<li>बुद्धि-भाववाचक संज्ञा।</li>
</ol>
<p>(छ)</p>
<ol>
<li>जीवन-भाववाचक संज्ञा</li>
<li>बुढ़ापाभाववाचक संज्ञा</li>
</ol>
<p>(च)</p>
<ol>
<li>गंगा-व्यक्तिवाचक संज्ञा</li>
<li>हिमालय- व्यक्तिवाचक संज्ञा।</li>
</ol>
<p>(छ)</p>
<ol>
<li>लड़के-जातिवाचक संज्ञा।</li>
</ol>
<p>(ज)</p>
<ol>
<li>पुस्तक-जातिवाचक संज्ञा।</li>
</ol>
<p><b>व्याकरण परिवार परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या<br />
</b><br />
(1) टेलीविजन पर कार्यक्रम क्यों देख रहे हैं आप? जानते नहीं, टेलीविजन जिस भाषा का प्रयोग कर रहा है, उससे हम अपनी परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं। अपनी भाषा को बिगाड़कर विदेशी भाषा के शब्दों की मिलावट से हम अपनी संस्कृति पर गहरा आघात कर रहे हैं।</p>
<p>सन्दर्भ-यह गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक &#8216;भाषा-भारती&#8217; के पाठ&#8217;व्याकरण परिवार से लिया गया है। इसके लेखक-डॉ. प्रेम भारती हैं।</p>
<p>प्रसंग-इस गद्यांश में अपनी भाषा के प्रयोग करने के लिए सलाह दी गई है।</p>
<p>व्याख्या-लेखक ने क्रियादेवी नामक पात्र द्वारा संज्ञानन्द नामक अपने पति से पूछा है कि वे टेलीविजन पर किसी भी कार्यक्रम को क्यों देख रहे हैं। टेलीविजन पर विदेशी भाषा में किसी भी कार्यक्रम को दिखाया जा रहा है। इस भाषा के प्रयोग के कारण हमने अपने रीति-रिवाजों को भुला दिया है। इस विदेशी भाषा के शब्दों ने अपनी भाषा में मिलकर बड़ा बिगाड़ पैदा किया है। इस तरह इन शब्दों की मिलावट ने हमारी सभ्यता और हमारे आचरण को गहरी चोट पहुँचाई है। हमारे व्यक्तित्व, जाति एवं राष्ट्र सम्बन्धी आचरण और विचारों तक को प्रभावित किया है जिससे हमारी राष्ट्रीय सोच और बौद्धिक विकास में बाधा पड़ी है।</p>
<p>(2) संस्कृत भाषा इस देश की सबसे प्राचीन भाषा है, जिसका व्यवहार ऋषि-मुनि, विद्वान, कवि सभी करते रहे हैं। इसे देवभाषा भी कहा जाता है। उसकी सन्तानें प्राकृत भाषा एवं पाली भाषा के रूप में प्राप्त होती हैं। प्राकृत भाषाओं से ही अपभ्रंश भाषा का जन्म हुआ है।</p>
<p>संदर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-लेखक ने संस्कृत की प्राचीनता बताई है और उससे जन्म लेने वाली भाषाओं का उल्लेख किया है।</p>
<p>व्याख्या-लेखक स्पष्ट करता है कि संसार की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है। इस भाषा का प्रयोग ऋषियों, मुनियों,विद्वानों और कवियों ने किया है। इसी भाषा को देवताओं की भाषा भी कहा जाता है। प्राचीन काल के भारतीय समाज के लोगों का आचरण देवताओं के समान था। संस्कृत भाषा की दो</p>
<p>प्रमुख सन्तानें-प्राकृत भाषा और पाली हैं। प्राकृत भाषाओं से ही अपभ्रंश भाषा विकसित हुई है। अर्थात् इन सभी भाषाओं की जननी संस्कृत ही है।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
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</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-22/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 11:37:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ PDF download, Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 22, these solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 22 Shrimad Bhagwat Geeta hau Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter 22 ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-22/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>In this article, we will share <a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-solutions/">MP Board Class 6th Hindi Solutions</a> Chapter 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ PDF download, <span data-sheets-value="{&quot;1&quot;:2,&quot;2&quot;:&quot;Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 1&quot;}" data-sheets-userformat="{&quot;2&quot;:8705,&quot;3&quot;:{&quot;1&quot;:0},&quot;12&quot;:0,&quot;16&quot;:11}">Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 22, t</span>hese solutions are solved subject experts from the latest edition books.</p>
<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 22 Shrimad Bhagwat Geeta hau Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 22 Shrimad Bhagwat Geeta hau Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) गीता का जन्म हुआ<br />
(i) ऋषि आश्रम में<br />
(ii) राज परिवार में<br />
(iii) युद्धभूमि में<br />
(iv) अस्पताल में।<br />
उत्तर<br />
(iii) युद्धभूमि में</p>
<p>(ख) पाण्डवों-कौरवों के मध्य राज्य प्राप्ति के लिए<br />
युद्ध हुआ, लगभग<br />
(i) पचास हजार वर्ष पूर्व<br />
(ii) पाँच सौ वर्ष पूर्व<br />
(iii) दो हजार वर्ष पूर्व<br />
(iv) पाँच हजार वर्ष पूर्व<br />
उत्तर<br />
(ii) पाँच सौ वर्ष पूर्व</p>
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<p>(ग) अपने सगे-सम्बन्धियों को देखकर मोह उत्पन्न हुआ<br />
(i) श्रीकृष्ण के मन में<br />
(ii) अर्जुन के मन में<br />
(iii) गुरुओं के मन में<br />
(iv) पितामह के मन में।<br />
उत्तर<br />
(ii) अर्जुन के मन में</p>
<p>(घ) श्रीमद्भगवद्गीता में अध्यायों की संख्या<br />
(i) आठ<br />
(ii) तेरह<br />
(iii) अठारह<br />
(iv) चौबीस<br />
उत्तर<br />
(iii) अठारह।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) कुरुक्षेत्र वर्तमान में &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. राज्य में है।<br />
(ख) अर्जुन के धनुष का नाम &#8230;&#8230;&#8230;. था।<br />
(ग) समर भूमि में धीर-गम्भीर योद्धा को &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. हुए बिना युद्ध करना चाहिए।<br />
(घ) अर्जुन के सारथी &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.. थे।<br />
(ङ) मैं मनुष्य मात्र को &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. का संदेश देती हूँ।<br />
उत्तर<br />
(क) हरियाणा<br />
(ख) गाण्डीव<br />
(ग) विचलित<br />
(घ) श्रीकृष्ण<br />
(ङ) स्वधर्म पालन।</p>
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<p>प्रश्न 3.<br />
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) कौरव-पाण्डवों के बीच युद्ध क्यों हुआ?<br />
उत्तर<br />
आज से लगभग पाँच हजार वर्ष पूर्व कौरवों और पाण्डवों के बीच राज्य-प्राप्ति के लिए युद्ध हुआ था। पाण्डव अपना अधिकार चाहते थे जबकि कौरवों के पास सत्ता बल था।</p>
<p>(ख) श्रीकृष्ण ने ज्ञान का उपदेश किसे दिया ?<br />
उत्तर<br />
युद्धभूमि में किंकर्तव्यविमूढ़ शोक मान खड़े अर्जुन को स्वधर्म का मार्ग बतलाने और उसे मोह तथा अज्ञान से मुक्त कराने के लिए श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान युक्त उपदेश दिया।</p>
<p>(ग) नाशवान कौन-कौन हैं?<br />
उत्तर<br />
श्रीकृष्ण के अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु नाशवान है। उन्होंने अर्जुन से कहा कि उसके चारों ओर खड़े उसके अपने स्वजन भी नाशवान हैं।</p>
<p>(घ) गीता ने किस स्वभाव के व्यक्ति को नापसन्द किया है?<br />
उत्तर<br />
गीता ने आसुरी स्वभाव के व्यक्ति को नापसन्द किया है।</p>
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<p>प्रश्न 4.<br />
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) मोक्ष के योग्य व्यक्ति कौन होता है?<br />
उत्तर<br />
गीता के अनुसार धैर्यवान पुरुष और सुख-दुःख को समान समझने वाले व्यक्ति को इन्द्रियों और विषयों के संयोग व्याकुल नहीं करते। ऐसा व्यक्ति मोक्ष के योग्य होता है।</p>
<p>(ख) श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के माध्यम से क्या उपदेश दिया?<br />
उत्तर<br />
श्रीमद्भगवद्गीता, जिसे गीता के नाम से भी जाना जाता है, में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से पुरुषार्थी बनने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि पलायन कभी भी मनुष्य के यश में वृद्धि नहीं कर सकता। मनुष्य को सत्य, न्याय और अधिकार की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर युद्ध के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मा अजर एवं अमर है, उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता। अतः, परिजन-मोह त्यागकर उसे अपने क्षत्रिय-धर्म के अनुपालनार्थ युद्ध करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से बिना फल की इच्छा किए कर्म करते रहने का आह्वान किया। उन्होंने आत्मा के अतिरिक्त सभी वस्तुओं को नाशवान बताया। उन्होंने बताया कि एक क्षत्रिय के लिए युद्ध से अधिक श्रेष्ठ और कल्याणकारी कर्त्तव्य कोई दूसरा नहीं है। श्रीकृष्ण के अनुसार जीवन की सार्थकता मोह से प्रभावित हुए बिना कर्म करने और कायरता को त्यागने में है।</p>
<p>(ग) गीता को परमात्मा की वाणी क्यों कहा गया है?<br />
उत्तर<br />
श्रीमद्भगवद्गीता जिसे गीता के नाम से भी जाना जाता है, में भगवान श्रीकृष्ण ने मोहग्रसित अर्जुन को कर्म का महान् उपदेश दिया। यह उपदेश उन्होंने अर्जुन को महाभारत युद्ध के दौरान दिया। साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निसृत होने के कारण गीता को परमात्मा की वाणी भी कहा जाता है।</p>
<p>(घ) युद्धभूमि में अर्जुन के भ्रमित होने का क्या कारण था?<br />
उत्तर<br />
कौरवों और पाण्डवों के मध्य सुलह-समझौते की तमाम कोशिशें असफल सिद्ध हुई थीं। अब युद्ध निश्चित था।<br />
कुरुक्षेत्र के मैदान में युद्ध का बिगुल बज उठा। ऐसी युद्धभूमि में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से, जो उनके रथ के सारथी भी थे, अपना रथ दोनों सेनाओं के बीच ले चलने के लिए कहा। श्रीकृष्ण ने ऐसा ही किया और अर्जुन का रथ दोनों सेनाओं के ठीक मध्य में लाकर खड़ा कर दिया। अर्जुन ने जब दोनों ओर मरने-मारने को तैयार अपने सगे-सम्बन्धियों, परिवारजनों, प्रियजनों को खड़े देखा तो वह मोहपाश में जकड़कर भ्रमित हो गया।</p>
<p>(ङ) आज भी श्रीमद्भगवद्गीता क्यों प्रासंगिक है?<br />
उत्तर<br />
महाभारत काल में युद्ध के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकले श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने कि तब थे। आज भी न्याय-अन्याय, धर्म-अधर्म का युद्ध व्यक्ति के अन्दर चल रहा है। स्वार्थ और आसुरी वृत्तियाँ आज भी समाज में संघर्ष, तनाव तथा भय पैदा करती रहती हैं। मोह-ममता से ग्रसित व्यक्ति आज भी कर्तव्य पालन से कतराता है। वह सत्य व्यवहार नहीं करता। अतः वर्तमान समय में भी श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता स्पष्ट है।</p>
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<p>प्रश्न 5.<br />
सोचिए और बताइए</p>
<p>(क) जब गीता नहीं थी तो लोगों को जीवन जीने की कला की शिक्षा कहाँ से प्राप्त होती होगी?<br />
उत्तर<br />
जब गीता नहीं थी तो लोगों को जीवन जीने की कला की शिक्षा सम्भवतया हमारे वेदों एवं पुराणों से प्राप्त होती रही होगी। ऋषि-मुनि एवं साधु-सन्त तब के लोगों को उत्तम और सार्थक जीवन जीने के लिए प्रेरणा स्रोत का कार्य करते रहे होंगे। साथ ही, मनुष्य अपने पूर्वजों के उच्च आदर्शों का अनुकरण करते हुए अपने जीवन को धन्य बनाता रहा होगा।</p>
<p>(ख) गीता ने कहा है कि सात सौ श्लोक मेरे सन्देशवाहक हैं। कैसे?<br />
उत्तर<br />
गीता युद्ध काल में लिखी गई एक अनुपम कृति है। गीता राग-द्वेष रहित होकर जीवन जीने और आसुरी प्रवृत्तियों का विरोध करने की शिक्षा देती है। वास्तव में गीता की सम्पूर्ण शिक्षाएँ कुल अठारह अध्यायों में संरक्षित हैं। ये शिक्षाएँ इन अठारह अध्यायों में सात सौ श्लोकों में विद्यमान हैं। इन सात सौ श्लोकों में से प्रत्येक श्लोक मानव-जीवन के कल्याण हेतु अमृत-तुल्य है। अत: यह कहना बिल्कुल ठीक है कि गीता के सात सौ श्लोक उसके उपदेशों अथवा शिक्षाओं के सन्देशवाहक हैं।</p>
<p>(ग) कौरवों और पाण्डवों के बीच हुए युद्ध को न्याय-अन्याय के बीच युद्ध क्यों कहा गया है ?<br />
उत्तर<br />
आज से लगभग पाँच हजार वर्ष पूर्व पाण्डवों और कौरवों के मध्य महाभारत नामक एक भयंकर युद्ध हुआ। पाण्डव जहाँ सत्य और न्याय के पक्षधर थे वहीं कौरवों के राज्य में अन्यायऔर अधर्म का बोलबाला था। पाण्डव अपना नैतिक एवं जायज अधिकार चाहते थे जबकि कौरव उन्हें सुई की नोंक के बराबर भूमि भी देने को तैयार न थे। श्रीकृष्ण ने स्वयं पहल करते हुए समझौते कराने एवं युद्ध टालने के भरसक प्रयास किये किन्तु अधर्मी कौरवों ने उनकी एक बात न मानी। ऐसे में युद्ध आवश्यक हो गया। पाण्डव अपना अधिकार चाहते थे जबकि कौरवों के पास सत्ता-बल था। अतः, इस युद्ध को न्याय-अन्याय के बीच युद्ध अथवा धर्म-अधर्म के बीच युद्ध कहा गया।</p>
<p>(घ) यदि हम आसक्ति भाव से कर्म करेंगे तो क्या होगा?<br />
उत्तर<br />
गीता मनुष्य को अनासक्त भाव से कर्म करने की प्रेरणा देती है। यदि हम आसक्ति भाव से कर्म करेंगे तो हमारा ध्यान कर्म पर न लगकर उससे प्राप्त होने वाले परिणाम पर केन्द्रित रहेगा जिसके परिणामस्वरूप न तो हम अपनी पूरी योग्यता और दक्षता से अपने कर्म को सम्पादित कर पायेंगे और न ही हमें ऐसे कर्म के वांछित परिणाम ही प्राप्त होंगे। साथ ही, वांछित परिणाम प्राप्त न होने पर मनुष्य के मन में हीन भावना एवं अवसाद के भाव उत्पन्न होंगे। इसीलिए गीता हमें सदैव बिना फल की चिन्ता किये लगातार कर्म करते रहने की प्रेरणा देती है।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) यदि कौरव और पाण्डवों में युद्ध न हुआ होता तो क्या होता?<br />
उत्तर<br />
यदि कौरवों और पाण्डवों के बीच युद्ध न हुआ होता तो एक ओर तो मानव सभ्यता महाभारत जैसे युद्ध की विभीषिका से बच जाती किन्तु दूसरी ओर उसे मानव-कल्याण रूपी गीता जैसे अमृत-ग्रन्थ की प्राप्ति भी न हो पाती। वास्तव में, गीता जैसी महान कृति का जन्म महाभारत युद्ध के दौरान ही हुआ था।</p>
<p>(ख) यदि अर्जुन के मन में मोह उत्पन्न न हुआ होता तो क्या होता?<br />
उत्तर<br />
कुरुक्षेत्र के मैदान में दोनों सेनाओं में अपने नातेरिश्तेदारों और सगे-सम्बन्धियों को देखकर अर्जुन के मन में अचानक ही उनके प्रति मोह उत्पन्न हो गया और वह युद्ध न करने की बात करने लगा। अर्जुन की कायरता को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने उसे गीता के उपदेश सुनाकर उसके अकारण परिजन-मोह को दूर किया।<br />
स्पष्ट है कि यदि युद्ध के दौरान अर्जुन के मन में मोह उत्पन्न न हुआ होता तो गीता जैसे महान ग्रन्थ की रचना भी नहीं हुई होती और मानव सभ्यता गीता के उपदेशों और उसकी उच्च शिक्षाओं से वंचित रह जाती।</p>
<p><img decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>(ग) यदि अर्जुन की जगह तुम होते तो युद्ध करते या नहीं?<br />
उत्तर<br />
यदि अर्जुन के स्थान पर मैं होता और मुझे भगवान श्रीकृष्ण का साथ मिलता तो मैं अवश्य युद्ध करता। मैं कायरता के भाव को अपने मन में न आने देता और अपने क्षत्रिय-धर्म का बखूबी पालन करता।</p>
<p>(घ) यदि कृष्ण, अर्जुन के सखा एवं हितैषी न होते तो क्या होता?<br />
उत्तर<br />
यदि कृष्ण, अर्जुन के सखा एवं हितैषी न होते तो मोहवश अपने क्षत्रिय धर्म से विमुख अर्जुन को उसके कर्म का भान भला कौन कराता? ऐसे में न सिर्फ उसकी अपितु पाण्डवों की उज्ज्वल छवि धूमिल हो जाती। इतिहास में उसका नाम एक वीर योद्धा के रूप में दर्ज न होकर युद्ध से पलायन करने वाले एवं मोह-माया में जकड़े एक कायर के रूप में लिखा होता।</p>
<p>(ङ) यदि दुर्योधन किसी तरह राज्य का उत्तराधिकारी बन गया होता तो क्या होता?<br />
उत्तर<br />
यदि कौरव-पाण्डवों के युद्ध में कौरवों को विजय मिलती और दुर्योधन राज्य का उत्तराधिकारी बन जाता तो चारों ओर अन्याय और अधर्म का राज्य होता। ऐसे में सत्य और धर्म का आचरण करने वालों का जीवन जीना कठिन हो जाता। चारों ओर लूट-खसोट और अराजकता फैल जाती। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि दुर्योधन के राज्य का उत्तराधिकारी बनने पर राज &#8216;कुराज&#8217; में बदल जाता और ऐसे में मानव-मात्र का जीवन खतरे में पड़ जाता।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए<br />
भ्रमित, वितृष्णा, विरक्ति, हतप्रभ, किंकर्तव्यविमूढ़, अनासक्त, संन्यास, तात्विक, विश्वात्मा, व्याप्त, सम्मत, संघर्ष।<br />
उत्तर<br />
उपरोक्त सभी खण्डों को त्रुटिरहित उच्चरित कीजिए।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए<br />
भूमति, वित्रष्णा, विरक्ती, किंकतळ, हतपृभ, सन्यास, तातविक, सममत, सनघर्ष, व्यापत।<br />
उत्तर<br />
<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46757" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2020/11/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-22-मैं-श्रीमद्भगवद्गीता-हूँ-1.jpg" alt="MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ 1" width="241" height="165" /><br />
<img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46758" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2020/11/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-22-मैं-श्रीमद्भगवद्गीता-हूँ-2.jpg" alt="MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ 2" width="212" height="173" /></p>
<p>प्रश्न 3.<br />
&#8216;त्व&#8217; प्रत्यय लगाकर निम्नलिखित शब्दों से नए शब्द बनाइए<br />
गुरु, पुरुष, कृति।<br />
उत्तर<br />
<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46759" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2020/11/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-22-मैं-श्रीमद्भगवद्गीता-हूँ-3.jpg" alt="MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ 3" width="299" height="139" /></p>
<p><img decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए<br />
राज्य प्राप्ति, युद्धभूमि, कारागार, मोर्चा, शिथिल।<br />
उत्तर<br />
(क) राज्य प्राप्ति &#8211; कौरवों को महाभारत के युद्ध में पराजित कर पाण्डवों को राज्य प्राप्ति हुई।<br />
(ख) युद्धभूमि &#8211; कुरुक्षेत्र महाभारत काल की प्रसिद्ध युद्धभूमि है।<br />
(ग) कारागार &#8211; श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था।<br />
(घ) मोर्चा &#8211; रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वयं युद्ध का मोर्चा संभाला।<br />
(छ) शिथिल &#8211; ठण्ड के कारण बुजुर्ग महिला के सभी अंग शिथिल पड़ गये थे।</p>
<p>प्रश्न 5.<br />
अपठित गद्यांश</p>
<p>&#8216;गीता शास्त्रों का दोहन है। मैंने कहीं पढ़ा था कि सारे उपनिषदों का निचोड़ उसके सात सौ श्लोकों में आ जाता है। इसलिए मैंने निश्चय किया कि कुछ न हो सके तो भी गीता का ज्ञान प्राप्त कर लें। आज गीता मेरे लिए केवल बाइबिल नहीं है, केवल कुरान नहीं है, मेरे लिए वह माता हो गई है। मुझे जन्म देने वाली माता तो चली गई, पर संकट के समय गीता माता के पास जाना मैं सीख गया हूँ। मैंने देखा है जो कोई इस माता की शरण में जाता है, उसे ज्ञानामृत से वह तृप्त करती है।-मो. क. गाँधी उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए<br />
(1) गाँधीजी के अनुसार गीता क्या है ?<br />
(2) गाँधीजी संकट के समय किसके पास जाते थे?<br />
(3) अपनी शरण में आने वालों को गीता क्या लाभ पहुँचाती है?<br />
(4) गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।<br />
उत्तर</p>
<ol>
<li>गाँधीजी के अनुसार गीता उनके लिए मात्र कोई धार्मिक ग्रन्थ नहीं है, अपितु वह उनकी माता के समान है।</li>
<li>गाँधीजी संकट के समय गीता-माता के पास जाते थे।</li>
<li>अपनी शरण में आने वाले को गीता ज्ञानामृत से तृप्त करती है।</li>
<li> शीर्षक : &#8216;गाँधी और गीता&#8217;।</li>
</ol>
<p><strong>मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या </strong></p>
<p>(1) जानते हो मेरा जन्म कहाँ हुआ ? मेरा जन्म किसी राजपरिवार अथवा ऋषि आश्रम में नहीं हुआ अपितु युद्ध भूमि में हुआ वैसे ही जैसे श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था। यह युद्ध भूमि कुरुक्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध है जो वर्तमान में हरियाणा राज्य में अवस्थित है।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक &#8216;भाषा-भारती&#8217; के &#8216;मैं श्रीमद्भगवद्गीता हूँ&#8217; नामक पाठ से लिया है। इसकी लेखिका डॉ. लता अग्रवाल हैं।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में &#8216;गीता&#8217; स्वयं अपनी उत्पत्ति के स्थान का वर्णन कर रही है।</p>
<p>व्याख्या-भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकली गीता अपने उत्पत्ति स्थान एवं परिवेश की जानकारी देते हुए कह रही है कि उसका जन्म किसी राजा के कुल अथवा किसी महान ऋषि की तपोभूमि पर नहीं हुआ है, अर्थात् उसको किसी राजा के दरबारी अथवा ऋषि-मुनि ने नहीं लिखा है। उसका जन्म तो युद्ध के मैदान में हुआ है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा स्थित कारावास में हुआ था। गीता बताती है कि मरने-मारने पर उतारू कौरवों और पाण्डवों की सेना के मध्य, वर्तमान हरियाणा राज्य में स्थित कुरुक्षेत्र नामक स्थान पर उसकी उत्पत्ति हुई और वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रची गई है।</p>
<p>(2) अर्जुन ने जब दोनों ओर युद्ध के लिए तैयार सगे सम्बन्धियों, परिवारजनों, प्रियजनों को देखा तो वह मोहपाश में जकड़कर भ्रमित हो गया। अर्जुन के मन में युद्ध के प्रति वितृष्णा होने लगी। युद्धभूमि के दृश्य को देखकर वह हतप्रभ रह गया। उसके अंग शिथिल होने लगे। हाथों से उसका धनुष गाण्डीव गिरने लगा। वह खड़ा होने में भी असमर्थ हो रहा था।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कुरुक्षेत्र के मैदान में परिजन-मोह से ग्रसित अर्जुन की दशा का सजीव वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-समझौते की तमाम कोशिशों के असफल होने के बाद जब कौरवों और पाण्डवों में युद्ध का बिगुल बजा तो अर्जुन ने श्रीकृष्ण से अपना सारथी बनने का अनुरोध किया। श्रीकृष्ण ने इस पर अपनी सहमति प्रकट की। युद्ध के मैदान में लड़ाई के लिए तत्पर दोनों सेनाओं के बीच जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन के रथ को ले जाकर खड़ा कर दिया तो अर्जुन ने अपने चारों ओर एक दृष्टि डाली। दोनों सेनाओं में मरने-मारने को उतारू अपने सगेसम्बन्धियों, नाते-रिश्तेदारों, गुरुजनों, सखाओं और बन्धु-बान्धवों को देखकर उसका गला सूख गया।</p>
<p>उसे परिजन-मोह हो गया। वह अपने क्षत्रिय धर्म को भूलकर दर्शन की बात करने लगा। उसके मन में अचानक युद्ध के प्रति घृणा उत्पन्न हो गई। वह युद्ध को मानवता के लिए विनाशकारी कहने लगा। युद्धभूमि के दृश्य को देखकर वह महायोद्धा अत्यन्त विचलित हो गया। उसके सभी अंगों ने मानो एक साथ काम करना बन्द कर दिया हो, उसे ऐसा अनुभव होने लगा कि उसके हाथों से उसका प्रिय धनुष&#8217;गाण्डीव&#8217; गिरने लगा। वह सूखे पत्ते की तरह काँपने लगा। उसके पैरों में शरीर का बोझ उठाने तक की क्षमता नहीं बची।</p>
<p><img decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>(3) मैंने अर्जुन से कहा कि वह पुरुषार्थी बने। पलायन कभी भी मनुष्य के यश में वृद्धि नहीं कर सकता। मैंने कहा कि जब न्याय और अधिकार प्राप्त करने के लिए कोई मार्ग नबचे और युद्ध ही करना पड़े तब हृदय और मन की सम्पूर्ण दुर्बलताओं को त्यागकर समर भूमि में धीर, गंभीर योद्धा को विचलित हुए बिना युद्ध करना चाहिए। मैंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-इन पंक्तियों में युद्धभूमि के दृश्य को देखकर विचलित अर्जुन को उसके क्षत्रिय-धर्म की याद दिलाने की कोशिश की गई है।</p>
<p>व्याख्या-कुरुक्षेत्र के मैदान में दोनों सेनाओं में अपने सगे-सम्बन्धियों को खड़ा देख जब अर्जुन अपने क्षत्रिय-धर्म से विमुख हो युद्ध न करने की बात करने लगा, तो भगवान श्रीकृष्ण ने गीता रूपी उपदेश के माध्यम से अर्जुन को समझाया कि वह पुरुषार्थी बने, अर्थात् बिना फल की इच्छा किये अपने धर्म-सम्मत कार्य को अपनी पूर्ण निष्ठा और क्षमता से करे।</p>
<p>कार्य के परिणाम की सोचकर उससे पलायन कर जाना कभी भी मनुष्य की कीर्ति को बढ़ाने वाला नहीं हो सकता। श्रीकृष्ण ने बेहाल अर्जुन को प्रेरित करते हुए आगे कहा कि जब सत्य, न्याय और अपना वैधानिक अधिकार प्राप्त करने के लिए कोई रास्ता न बचे और युद्ध आवश्यक हो जाये तो बिना युद्ध के परिणाम की चिन्ता किये युद्ध अवश्य करना चाहिए। इस क्रम में अपने हृदय और मन की सभी कमजोरियों, मोह इत्यादि को त्यागकर युद्धभूमि में एक वीर योद्धा की तरह अपने धर्म का पालन करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उसके परिजन-मोह से उबारने के लिए कहा कि जन्म लेने वाले प्रत्येक मनुष्य की मृत्यु तो निश्चित है। अत: उसे अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए एक योद्धा की भाँति युद्ध करना चाहिए।</p>
<p>(4) धैर्यवान पुरुष और सुख-दुःख को समान समझने वाले व्यक्ति को इन्द्रियों और विषयों के संयोग व्याकुल नहीं करते। ऐसा व्यक्ति मोक्ष के योग्य होता है। हे अर्जुन ! सुन, तू युद्ध कर या न कर, ये सभी नाशवान हैं, केवल वहनाशरहित है जिसमें यह सम्पूर्ण विश्व समाहित है। यह जो चारों ओर तू अपने स्वजनों को देखकर विचलित हो रहा है ये सब नाशवान हैं। इन सबको नष्ट होना ही है। केवल आत्मा अमर है। वही नित्य है। अत: हे अर्जुन ! तू समर भूमि में शोक रहित होकर अपने धर्म को पहचान। तू क्षत्रिय है, तेरे लिए युद्ध से अधिक श्रेष्ठकोई कल्याणकारी कर्त्तव्य नहीं हैयही तेरा स्वधर्म है अत: तू युद्ध कर।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को आत्मा की अमरता एवं अजरता रूपी तत्वज्ञान प्रदान करने की बात कही गई है।</p>
<p>व्याख्या-कुरुक्षेत्र के मैदान में दोनों सेनाओं के मध्य खड़े रथ में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का महान उपदेश देते हए कहते हैं कि मनुष्य को सदैव सुख और दुःख को समान रूप में लेना चाहिए। ऐसे धैर्यवान मनुष्य कभी भी अपने कर्तव्य-पथ से नहीं डिगते और न ही उन्हें मोह-माया अथवा इन्द्रियों की कमजोरी व्याकुल कर पाती है। भावनाओं, इन्द्रियों और परिस्थितियों के चंगुल-प्रलोभन से परे व्यक्ति मोक्ष के योग्य होता है। श्रीकृष्ण अर्जुन को सम्बोधित करते हुए आगे कहते हैं कि हे अर्जुन ! अपने चारों ओर खड़े जिन परिजनों को देखकर जो तू इतना उदास हो चला है वे सभी नाशवान हैं। तू भले ही इनके मोह से वशीभूत हो युद्ध से पलायन कर इन्हें न मार किन्तु ये सभी तो नाशवान हैं।</p>
<p>इन सबको तो नष्ट होना ही है। यही क्या संसार में सभी प्राणी, जिनका जन्म हुआ है, उन्हें मरना है। मृत्यु ही इनकी नियति है। सिर्फ आत्मा अजर और अमर है। वही सनातन है और सत्य भी। वह नाशरहित है, कोई उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। अत: हे अर्जुन | तू जल्द से जल्द अपनी इस इन्द्रिय-दुर्बलता को त्यागकर अपने क्षत्रिय-धर्म का पालन कर और युद्ध कर क्योंकि एक क्षत्रिय के लिए युद्ध से अधिक महान एवं कल्याणकारी कर्त्तव्य दूसरा नहीं है। अतः, तू अपने निज धर्म के पालनार्थ मोह-माया से परे होकर निडरता एवं निर्भीकता के साथ युद्ध कर।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
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</ul>
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<div class="gtx-trans-icon"></div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 10 क्या ऐसा नहीं हो सकता? प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-10/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 11:08:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 10 क्या ऐसा नहीं हो सकता? PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Kya Aisa Nahi Ho Sakta Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter 10 Kya Aisa Nahi ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 10 क्या ऐसा नहीं हो सकता? प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-10/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 10 क्या ऐसा नहीं हो सकता? प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>In this article, we will share <a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-solutions/">MP Board Class 6th Hindi Solutions</a> Chapter 10 क्या ऐसा नहीं हो सकता? PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.</p>
<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Kya Aisa Nahi Ho Sakta Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 10 Kya Aisa Nahi Ho Sakta Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) नहाने के बाद मुझे देना होगा<br />
(i) नाश्ता<br />
(ii) आराम<br />
(iii) टॉवेल<br />
(iv) पुस्तक।<br />
उत्तर<br />
(iii) टॉवेल</p>
<p>(ख) चादर के अनुसार पसारना चाहिए<br />
(i) बाहें<br />
(ii) पैर<br />
(iii) मुँह<br />
(iv) जीभ<br />
उत्तर<br />
(क)<br />
(ii) पैर।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) तुम अपने फटे &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;..को चादर से ढक देते हो।<br />
(ख) बिखरी हुई पुस्तकों को &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;से लगा देते हो।<br />
(ग) हम सबके चेहरे पर अभावों की &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.. छाई हुई है।<br />
(घ) सुख-दुःख के इस &#8230;.. में से ही अभावों की कश्ती के पार होने का मार्ग गया है।<br />
उत्तर<br />
(क) बिस्तर<br />
(ख) करीने<br />
(ग) धुंध<br />
(घ) समन्दर।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 3.<br />
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) धुंध से लेखक का क्या अभिप्राय है ?<br />
उत्तर<br />
धुंध से लेखक का यह अभिप्राय है कि अपनी कमियों के अन्धकार की छाया प्रत्येक मनुष्य के चेहरे पर छाई हुई है। अर्थात् उन कमियों को किसी भी व्यक्ति के बाहरी चेहरे के हाव-भाव से पहचाना जा सकता है।</p>
<p>(ख) मित्र अपने फटे बिस्तर को कैसे छिपाता है ?<br />
उत्तर<br />
मित्र अपने फटे बिस्तर को उजली चादर को बि. छाकर छिपाता है।</p>
<p>(ग) अव्यवस्थाओं के होते हुए भी मित्र लेखक से रुकने का आग्रह क्यों करता है?<br />
उत्तर<br />
अव्यवस्थाओं के होते हुए भी मित्र लेखक से रुकने का आग्रह इसलिए करता है कि इन अभावों को दिखावे की चादर से न ढकते हुए. हे मेरे मित्र ! तू मेरे पास बैठ। प्रेमपूर्वक अपने परिवार से सम्बन्धित दुःख-सुख की बातें कर, जिससे मन का बोझ कुछ हल्का हो सके और आडम्बर के बोझ के नीचे अपनी आत्मा को कुचलने से बचा ले।</p>
<p>(घ) लेखक ने मित्र को राजनीति और साहित्य के बदले कौन-सी बात करने की सलाह दी?<br />
उत्तर<br />
लेखक अपने मित्र को सलाह देता है कि वह राजनीति और साहित्य की बातें न करे। उसे तो अपने बाल-बच्चों से सम्बन्धित, घर और गृहस्थी की बातें करनी चाहिए जिससे<br />
जीवन के सुख और दु:ख के महासागर को पार करने का उपाय निकल सके।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></strong></p>
<p>प्रश्न 4.<br />
चार-पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) लेखक के लिए मित्र किस तरह सुविधाएँ जुटाता है? लिखिए।<br />
उत्तर<br />
लेखक के लिए मित्र घर में घी और शक्कर के न होने पर घी-शक्कर छिपाकर लेकर आता है। इन चीजों को किसी से उधार भी लेकर आता है। फटे बिस्तर को नई चादर से ढक देता है। पड़ौसी के स्वच्छ दर्पण को माँग लाता है। भोजन कर लेने पर बच्चे से पान मँगाकर रख देता है। बाल-बच्चों और गृहस्थी की बातें न करते हुए राजनीति और पत्र-पत्रिकाओं के साहित्य की बातों में उलझा देता है। टूटे कप की चाय को स्वयं उठा लेता है। सही नए कप में लेखक को चाय देता है। इस तरह की अनेक सुविधाओं को जुटाता है।</p>
<p>(ख) लेखक को मित्र के चेहरे पर निश्चिन्तता का भाव दिखाई क्यों नहीं दिया ?<br />
उत्तर<br />
लेखक को मित्र के चेहरे पर निश्चिन्तता का भाव इसलिए दिखाई नहीं दिया क्योंकि उसके घर में गृहस्थी की चीजों का अभाव था। घी-शक्कर का इन्तजाम लेखक से छिपकर करता है, पड़ौस से दर्पण और तौलिया लाकर रखता है। फटे बिस्तर को नई चादर से छिपाता है। बच्चे को भेजकर लेखक के लिए पान मँगाकर रखता है। खूटी पर बेतरतीब रखे कपड़ों को और बिखरी पुस्तकों को करीने से लगा देता है। घर-गृहस्थी की बातें न करके राजनीति और साहित्य की बातें करने लग जाता है।</p>
<p>(ग) लेखक की अपने मित्र से क्या अपेक्षाएँ हैं?<br />
उत्तर<br />
लेखक अपने मित्र से अपेक्षा करता है कि वह अपने फटे बिस्तर को वैसे ही बने रहने देता। टूटे हत्थे वाली कुर्सी पर ही लेखक को बैठने देता। धुंधले दर्पण और फटे गन्दे तौलिए को ही लेखक को नहाने के बाद बदन पोंछने के लिए देता। बाल-बच्चों और गृहस्थी की बातें खुलकर करता। उजली चादर से बिस्तर को ढकने को तथा टूटे हत्थे वाली कुर्सी को बीच की दीवार न बनने देता। हृदय में बसे सच्चे प्रेम को इस बनावटी व्यवहार से ढकने न देता।</p>
<p>(घ) लेखक मित्र को किस तरह के व्यवहार की सलाह देता है? कोई तीन बिन्दु लिखिए।<br />
उत्तर<br />
लेखक निम्नलिखित रूप के व्यवहार की सलाह देता है</p>
<ul>
<li>हम दोनों मित्र ठीक वैसे ही मिलें जैसे हम हैं। बनावटी दिखने का प्रयत्न बन्द करें।</li>
<li>जैसी सूखी रोटी तुम खाते हो, वैसी ही मुझे खिलाओ। राजनीति और साहित्य में मत उलझाओ।</li>
<li>जिस फटे तौलिए से अपना शरीर पोंछते हो, उसी से मुझे भी अपना शरीर पोंछने दो। साथ ही चाय पीते समय जिस टूटे हुए कप को तुम मुझसे बदल देते हो, उसे मेरे ही पास रहने दो।</li>
</ul>
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<p>प्रश्न 5.<br />
सोचिए और बताइए</p>
<p>(क) अपने लिए कष्ट उठाकर व्यवस्था जुटाते अपने मित्र को देखकर आपके मन में कैसे विचार उत्पन्न होंगे, बताइए।<br />
उत्तर-अपने लिए कष्ट उठाते हुए व्यवस्था जुटाने में लगे मित्र को देखकर मेरे मन में यह विचार आता है कि मेरा मित्र सामान्य रूप से वही रूखी-सूखी रोटी खिलाता, जो वह स्वयं खाता है। उजले चादर से फटे बिस्तर को ढकने के लिए, टूटे हत्थे वाली कुर्सी को हटाते हुए, गन्दे फटे तौलिए का प्रयोग कर लेने देने के लिए, उजले साफ दर्पण का पड़ौस से इन्तजाम न करने की बात कहता। सच्चे प्रेम भरे व्यवहार को आडम्बर से छिपाने की बात न करने की सोचता।</p>
<p>(ख) मित्र अपने फटे बिस्तर को चादर से क्यों छिपाने का प्रयास करता है?<br />
उत्तर<br />
मित्र अपने फटे बिस्तर को चादर से छिपाने का प्रयास करता है ताकि उसकी असल स्थिति का आभास लेखक को न हो सके। मित्र की अभावों भरी गृहस्थी का आभास लेखक को होगा, तो उसे कष्ट होगा। अपनी वस्तुस्थिति से लेखक को परिचित न होने देने का मित्र प्रयास करता है।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) मान लीजिए आपके घर अचानक मेहमान आ जाते हैं और आपके माता-पिता घर पर नहीं हैं। घर में अनेक अव्यवस्थाएँ हैं। ऐसी स्थिति में आप अतिथि का स्वागत कैसे करेंगे?<br />
उत्तर<br />
घर में अव्यवस्थाओं के चलते, माता-पिता के घर पर न होने की दशा में जो भी कुछ सरलता से कर सकता हूँ, करूँगा। बैठने के लिए कहूँगा। शुद्ध ताजा पानी पीने को दूँगा और फिर प्रयास करूंगा कि मैं अपने माता-पिता को उनके आगमन की सूचना दूँ। सम्भवतः आगन्तुक मेहमान उस स्थिति में मेरी प्रार्थना के अनुसार रुकें और माता-पिता के आगमन तक प्रतीक्षा करें। उनके लिए घर में जो भी कुछ वस्तु होगी, मैं उनके लिए प्रस्तुत करके उनका आतिथ्य करूँगा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>(ख) आपकी दृष्टि में उधार लेकर अथवा मांगकर व्यवस्था जुटाना कहाँ तक उचित है ?<br />
उत्तर<br />
मेरी दृष्टि में उधार लेकर या माँगकर व्यवस्था जुटाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अपनी परिस्थिति के अनुसार जो भी सम्भव हो सके, उसी से अतिथि सत्कार की व्यवस्था करना उचित है। किसी भी तरह के आडम्बर का व्यवहार सच्चे प्रेम को छिपा देता है जिसकी चिन्ता चेहरे पर झलक उठती है।</p>
<p>(ग) किसी के घर जाने पर आप फटे बिस्तर पर ध्यान देंगे या उनके स्नेह को प्राथमिकता देंगे?<br />
उत्तर<br />
फटे बिस्तर पर ध्यान देने का कोई अर्थ नहीं है। स्नेह की पवित्रता महत्वपूर्ण है और उसी का प्राथमिकता से ध्यान रखना आनन्ददायी है।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए<br />
स्वागत, व्यवस्था, दृष्टि, निर्निमेष, निश्चिन्तता।<br />
उत्तर<br />
कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करें और अभ्यास करें।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी लिखिए<br />
राज्यनीती, आवकाश, विशबास, दृश्टी।<br />
उत्तर<br />
राजनीति, अवकाश, विश्वास, दृष्टि।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित वाक्यों को बहुवचन में बदलिए</p>
<p>(क) बालक स्कूल जा रहा है।<br />
(ख) गाय चर रही है।<br />
(ग) नदी में बाढ़ आई है।<br />
(घ) वह पुस्तक पड़ रहा है।<br />
उत्तर<br />
(क) बालक स्कूल जा रहे हैं।<br />
(ख) गायें चर रही हैं।<br />
(ग) नदियों में बाढ़ आई है।<br />
(घ) वे पुस्तक पढ़ रहे हैं।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए<br />
(क) पलकों पर वैवना<br />
(ख) कलेजे पर साँप लोटना<br />
(ग) आम के आम गुठलियों के दाम।<br />
(घ) कंगाली में आटागीला।<br />
उत्तर<br />
(क) बलकों पर बैठाना-रवि अपने मेहमानों को पलकों पर बैठाता फिरता है।<br />
(ख) कलेजे पर साँप लोटना-मेरे पुत्र के द्वारा परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने पर, मेरे पड़ौसी के कलेजे पर साँप लोट गया।<br />
(ग) आम के आम गुठलियों के दाम-मैं गया तो था इन्दौर एक उत्सव में, लेकिन पास में ही ओउम्कारेश्वर के दर्शन भी करके आम के आम गुठलियों के दाम भी प्राप्त कर लिए।<br />
(घ) कंगाली में आटा गीला-मैंने सोचा था कि अपने पुराने इंजन की मरम्मत कराके पानी की समस्या हल हो जाएगी, लेकिन साथ में पाइप लाइन का टूट जाना मेरे लिए कंगाली में आटा गीला हो जाना है।</p>
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<p>प्रश्न 5.<br />
निम्नलिखित वाक्यों में से अकर्मक और सकर्मक क्रियाएँ छाँटिए<br />
(क) तुम धुंधले काँच को छिपाते हो।<br />
(ख) मैं तुम्हारे साथ रहता हूँ।<br />
(ग) तुम क्यों रो रहे हो ?<br />
(घ) कोयल आकाश में उड़ रही है।<br />
उत्तर<br />
(क) छिपाते हो-सकर्मक।<br />
(ख) रहता हूँअकर्मक।<br />
(ग) रो रहे हो-अकर्मक।<br />
(घ) उड़ रही है-अकर्मक।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
अपने मित्र को पत्र लिखकर गणतन्त्र दिवस की बधाई दीजिए।<br />
उत्तर<br />
&#8216;पत्र लेखन&#8217; खण्ड में देखिए।</p>
<p><b>क्या ऐसा नहीं हो सकता परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या </b></p>
<p>(1) मैं जब तक स्नान करता हूँ तब तक तुम अपने फटे बिस्तर को, नई चादर से ढक देते हो, धुंधले आईने की जगह पड़ोसी से माँगा हुआ साफ आईना सजा देते हो और खूटियों पर लटकते बेतरतीब से कपड़ों तथा बिखरी हुई पुस्तकों को करीने से लगा देते हो।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक &#8216;भाषा भारती&#8217; के &#8216;क्या ऐसा नहीं हो सकता ?&#8217; नामक पाठ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक &#8216;रामनारायण उपाध्याय&#8217; हैं।</p>
<p>प्रसंग-लेखक ने इन पंक्तियों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि लोग सच्चाई को छिपाने का प्रयत्ल करते हैं, बाहरी आडम्बरों में उलझकर सहज प्रेम की महत्ता को समझ नहीं पाते हैं।</p>
<p>व्याख्या-एक मित्र अपने मित्र को पत्र लिखता है; लेखक उस पत्र लेखक मित्र के भावों को स्पष्टता देता है कि जब मैं तुम्हारे घर जाता हूँ तब तक वहाँ स्नान करता हूँ, तब उसी मध्य तुम अपने फटे बिस्तर को किसी नई चादर से ढक देते हो जो दर्पण तुम्हारे घर में है वह धुंधला हो गया है, उसके स्थान पर अपने पड़ोसी के साफ उजले दर्पण को ले आते हो और सजा देते हो। यह दर्पण माँगा हुआ होता है। कमरे में इधर-उधर बिना तरतीब ही खूटी पर लटकते कपड़ों को ठीक तरह लगा देते हो, साथ ही इधर-उधर पड़ी हुई, बिखेर दी गई पुस्तकों को उसी दरम्यान ठीक क्रम से लगा देते हो। यह तुम्हारा बनावटीपन और दिखावा है जो प्रेम की सहज भूमि पर औपचारिकता मात्र है। हम मिलन के वास्तविक दु:ख से रहित हो जाते हैं।</p>
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<p>(2) तुम जब मुझे विदा करते हो, तब भी तुम्हारा ध्यान मेरे रवाना होने के बाद किये जाने वाले कामों में लगा रहता है लेकिन मैं जब तक तुम्हारी दृष्टि से ओझल नहीं हो जाता, तुम तब तक मेरी ओर निर्निमेष दृष्टि से निहारते हो, मानो अपनी पलकों पर बिठाकर तुम मुझे विदाई देते हो। मैं जानता हूँ, तुम्हारी उस दृष्टि में कितना दर्द, कितनी लाचारी, कितना स्नेह समाया हुआ है।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-लोगों के आम व्यवहार में भी सच्चाई छिपी होती है। स्नेह भरे दिलों में दर्द की टीसन और दिखावे की लाचारी भर दी है।</p>
<p>व्याख्या-लेखक कहता है कि वह जब अपने मित्र से विदा लेता है, तो उस मित्र का ध्यान उसके प्रस्थान करने के बाद किये जाने योग्य सभी कामों में उलझा रहता है। वह जब तक उसकी आँखों से पूर्णत: ओझल नहीं हो जाता, तब तक अपनी एकटक निगाहों से उसे देखता रहता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो वह उसे (लेखक को) अत्यन्त आदर भाव के साथ प्रेमपूर्वक विदा कर रहा है। लेखक अपने उस मित्र की निगाहों में समाये हुए दर्द को, उसकी लाचारी को प्रदर्शित कर रहा था। लेकिन उसके हृदय में गहरा स्नेह समाया हुआ था।</p>
<p>(3) क्या यह नहीं हो सकता कि हम जैसे हैं, ठीक वैसे ही मिलें और जो हम नहीं हैं, वैसा दिखने का प्रयत्न बन्द कर दें? जैसी सूखी रोटी तुम खाते हो, वैसी ही मुझे खिलाओ। जिस फटे टॉवेल से तुम अपना शरीर पोंछते हो, उसी से मुझे भी अपना शरीर पोंछने दो। चाय पीते समय जिस टूटे हुए कप को तुम मुझसे बदल लेते हो, उसे मेरे ही पास रहने दो।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-लेखक अपने मित्र के दिखावपूर्ण व्यवहार पर अपने हृदय की वेदना को व्यक्त करता है।</p>
<p>व्याख्या-लेखक स्पष्ट करता है कि हम सभी दिखावे के व्यवहार को छोड़ कर सच्चाई के आधार पर अपने व्यवहार को विकसित करें। क्या यह सम्भव नहीं है ? निश्चय ही, यह हो सकता है। जैसे हम नहीं हैं, उस स्थिति में अपने आपको दिखाने का जो प्रयत्न है, उसे छोड़ दें। अर्थात् आडम्बरपूर्ण व्यवहार का रूप समाप्त कर देना चाहिए। अपनी स्वाभाविक स्थिति में हमारा वह साधारण रूप में खिलाया गया भोजन वस्तुत: असली प्रेम को प्रदर्शित करने वाला होगा।</p>
<p>भोज्य वस्तुओं में दिखावट पसन्द नहीं है। तुम जिस फटे अंगोछे से स्नान के बाद अपने अंग पोछते हो, वही अंगोछा अपने मित्र को दीजिए, व्यर्थ के दिखावे में जीवन की मौलिकता नष्ट होती है। टूटे कप (प्याले) में दी गई चाय को तुरन्त हटा देते हो और स्वयं उस टूटे कप की चाय पीने लगते हो और मुझे अपना वाला अन्य कप देकर हृदय की सरलता भरे प्रेम को बनावटी प्यार के आवरण से ढकने की कोशिश करते हो। ऐसा व्यवहार प्रेम के सात्विक स्वरूप को समाप्त कर देता है।</p>
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<p>(4) अपने फटे हुए बिस्तर को तुम उजली चादर से मत उको और कुर्सी के टूटे हुए हत्थों को बीच में आने दो ताकि वे हमारे बीच दीवार न बन सकें और इन सबसे बचे हुए समय में तुम जब भी मेरे पास बैठो, बजाय राजनीति और साहित्य के, अपनी घर-गिरस्ती की, बाल-बच्चों की, सुख-दुःख की बातें करो। विश्वास रखो, सुख-दुःख के इस समन्दर में से ही हमारे अभावों की किश्ती के पार होने का मार्ग गया है।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-लेखक अपने मित्र को दिखावपूर्ण व्यवहार को बन्द करने और सच्चाईपूर्ण, आडम्बररहित व्यवहार को अपनाने का अच्छा परामर्श देता है।</p>
<p>व्याख्या-अपने मित्र को लिखे अपने पत्र के अन्त में लेखक लिखता है कि हे मेरे मित्र फटे हुए अपने बिस्तर को तुम साफ चादर से ढकने की कोशिश मत करो। टूटे हुए हत्थे वाली कुर्सी पर ही मुझे बैठने दो। मेरे और तुम्हारे बीच जो मित्रता का पवित्र भाव है, उसे बनावट के व्यवहार की चादर से मत डको। मैं चाहता हूँ कि इस बनावट के रिश्ते चलाने में जो समय नष्ट होता है, उस समय को बचाकर तुम मेरे समीप बैठो।</p>
<p>राजनीति और साहित्य की बातें मत करो। घर और परिवार की समस्याओं सम्बन्धी बातें करो। अपनी आने वाली पीढ़ी-बाल-बच्चों से सम्बन्धित बातें करो। इस तरह अपने अन्त:करण में व्याप्त सुख और दुःख से प्राप्त होने और उसके निवारण सम्बन्धी उपार्यों की बातें ही सच्चे व्यवहार से सम्बन्धित हैं। तुम्हें यह विश्वास रखना होगा कि हमारी कमियों की नौका ही सुख-दुःख के महासागर को पार कर हमारी सहायक हो सकती है। अर्थात् अभावों को दूर करो और दुःख अपने आप मिट जायेंगे।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
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</ul>
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<div class="gtx-trans-icon"></div>
</div>
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 21 मेरी माँ प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-21/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 10:55:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 21 मेरी माँ PDF download, Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 21, these solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 21 Meri Maa Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter 21 Meri Maa Questions ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 21 मेरी माँ प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-21/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 21 मेरी माँ प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>In this article, we will share <a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-solutions/">MP Board Class 6th Hindi Solutions</a> Chapter 21 मेरी माँ PDF download, <span data-sheets-value="{&quot;1&quot;:2,&quot;2&quot;:&quot;Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 1&quot;}" data-sheets-userformat="{&quot;2&quot;:8705,&quot;3&quot;:{&quot;1&quot;:0},&quot;12&quot;:0,&quot;16&quot;:11}">Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 21, t</span>hese solutions are solved subject experts from the latest edition books.</p>
<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 21 Meri Maa Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 21 Meri Maa Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) बिस्मिल के गुरु का नाम था<br />
(i) मेजिनी<br />
(ii) गोविन्दसिंह<br />
(iii) महादेव<br />
(iv) सोमदेव<br />
उत्तर<br />
(iv) सोमदेव</p>
<p>(ख) महान से महान संकट में भी तुमने मुझे नहीं होने दिया<br />
(i) निराश<br />
(ii) परेशान<br />
(iii) अधीर<br />
(iv) विचलित।<br />
उत्तर<br />
(iii) अधीर</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) घर का सब काम कर चुकने के बाद जो समय मिलता उसमें &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.. करती।<br />
(ख) जब मैंने &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. में प्रवेश किया, तब से माताजी से खूब वार्तालाप होता।<br />
(ग) जन्म-जन्मान्तर परमात्मा ऐसी ही &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;दे।<br />
(घ) गुरु गोविन्दसिंह जी की धर्मपत्नी ने जब अपने पुत्रों की मृत्यु की खबर सुनी तो &#8230;&#8230;&#8230;&#8230; हुई थीं।<br />
(ङ) माताजी &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.&#8221;पा चुकने के बाद ही विवाह को उचित मानती थीं।<br />
उत्तर<br />
(क) पढ़ना-लिखना<br />
(ख) आर्यसमाज<br />
(ग) माता<br />
(घ) बहुत प्रसन्न<br />
(ङ) शिक्षा।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) बिस्मिल का सेवा समिति में सहयोग देना किसे पसन्द नहीं था ?<br />
उत्तर<br />
शाहजहाँपुर में हाल ही में सेवा समिति प्रारम्भ हुई थी। बिस्मिल बड़े उत्साह के साथ सेवा समिति में सहयोग देते थे, किन्तु उनके पिताजी और उनकी दादीजी को बिस्मिल का सेवा समिति में सहयोग देना बिल्कुल पसन्द नहीं था।</p>
<p>(ख) रामप्रसाद बिस्मिल&#8217; में जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह किसकी कृपा का फल था ?<br />
उत्तर<br />
रामप्रसाद &#8216;बिस्मिल&#8217; में जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह उनकी माताजी एवं गुरुदेव श्री सोमदेव जी की कृपा का फल था।</p>
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<p>(ग) बिस्मिल की माताजी ने गृहकार्य की शिक्षा किससे प्राप्त की?<br />
उत्तर<br />
मात्र ग्यारह वर्ष की अल्पायु में बिस्मिल की माताजी का विवाह हो गया था। तब वह नितान्त अशिक्षित एवं ग्रामीण कन्या थीं। ऐसे में दादीजी ने अपनी छोटी बहन को शाहजहाँपुर बुला लिया था। उन्हीं ने माताजी को गृहकार्य आदि की शिक्षा प्रदान की थी।</p>
<p>(घ) बिस्मिल की बहनों को छोटी आयु में शिक्षा कौन दिया करता था ?<br />
उत्तर<br />
बिस्मिल की बहनों को छोटी आयु में उनकी माताजी ही शिक्षा दिया करती थीं।</p>
<p>(ङ) शिक्षादि के अतिरिक्त माताजी ने कहाँ बिस्मिल की सहायता की?<br />
उत्तर<br />
बिस्मिल की माताजी उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती थीं। शिक्षादि के अतिरिक्त वे बिस्मिल को देश सेवा हेतु विभिन्न सम्मेलनों में भाग लेने में उनकी सहायता करती थीं। वे संकटों में भी बिस्मिल को अधीर नहीं होने देती थीं।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) बिस्मिल ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए ?<br />
उत्तर<br />
एक बार बिस्मिल के पिताजी दीवानी मुकदमे में वकील से कह गए कि जो काम हो वह उनकी अनुपस्थिति में बिस्मिल से करा लें। कुछ आवश्यकता पड़ने पर वकील साहब ने बिस्मिल को बुलवाकर उनसे वकालतनामे पर अपने पिताजी के हस्ताक्षर करने को कहा। बिस्मिल ने यह कहते हुए कि वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर करने से मना कर दिया कि यह तो धर्म के विरुद्ध होगा। सदैव सत्य के मार्ग पर चलने वाले बिस्मिल ने वकील साहब के यह समझाने पर भी हस्ताक्षर नहीं किये कि हस्ताक्षर न करने पर मुकदमा खारिज हो जायेगा।</p>
<p>(ख) बिस्मिल की माताजी का सबसे बड़ा आदेश क्या था ?<br />
उत्तर<br />
बिस्मिल के जीवन और चरित्र-निर्माण में उनकी माताजी का बहुत बड़ा योगदान था। उनकी माताजी का उनके लिए सबसे बड़ा आदेश यह था कि उनके द्वारा किसी के भी प्राणों की हानि न हो। उनका कहना था कि वह कभी अपने शत्रु को भी प्राणदण्ड न दे। माताजी के इस आदेश के पालनार्थ कई बार बिस्मिल को मजबूरी में अपनी प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी थी।</p>
<p>(ग) बिस्मिल की एकमात्र इच्छा क्या थी ? उन्हें यह इच्छा क्यों पूरी होती दिखाई नहीं दे रही थी?<br />
उत्तर<br />
इस संसार में बिस्मिल की किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की इच्छा नहीं थी। उनकी एकमात्र इच्छा बस यह थी कि वह एक बार श्रद्धापूर्वक अपने माताजी के चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना सकते। किन्तु उनकी यह इच्छा उन्हें पूरी होती दिखाई नहीं दे रही थी क्योंकि काकोरी कांड में उनके साथियों के साथ उन्हें भी फाँसी की सजा सुनाई गई थी जिसके चलते माताजी की सेवा करने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकती थी।</p>
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<p>(घ) गुरु गोविन्दसिंह की पत्नी ने अपने पुत्रों के बलिदान पर मिठाई क्यों बाँटी?<br />
उत्तर<br />
देशहित के लिए जब गुरु गोविन्दसिंह के पुत्रों को जीवित दीवार में चिनवा दिया गया तब इस स्तब्धकारी घटना की सूचना पाकर भी उनकी पत्नी तनिक भी विचलित नहीं हुई बल्कि अपने पुत्रों की खबर सुनकर वह प्रसन्न हुई और गुरु के नाम पर धर्म-रक्षार्थ अपने पुत्रों के बलिदान पर उन्होंने मिठाई बाँटी।</p>
<p>(क) बिस्मिल ने अन्तिम समय में अपनी माँ से क्या वर माँगा?<br />
उत्तर<br />
बिस्मिल ने अन्तिम समय में अपनी माँ से यह वर माँगा कि वह उन्हें आशीष दें कि मृत्यु को निकट देखकर भी उनका हृदय विचलित न हो। वह यह भी चाहते थे कि वह अन्तिम समय में अपनी माँ के चरण-कमलों को प्रणाम कर व परमात्मा को स्मरण करते हुए मातृभूमि की रक्षार्थ अपने प्राण त्याग सकें।</p>
<p>प्रश्न 5.<br />
सोचिए और बताइए</p>
<p>(क) यदि बिस्मिल का दादीजी और पिताजी की इच्छानुसार विवाह कर दिया गया होता तो क्या होता?<br />
उत्तर<br />
देश के स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी रामप्रसाद &#8216;बिस्मिल&#8217; की दादीजी और पिताजी को उनका इस प्रकार क्रान्तिकारी गतिविधियों में भाग लेना पसन्द न था। वे नहीं चाहते थे कि उनका लाड़ला सामान्य जीवन जीने के स्थान पर अंग्रेजों का विरोध करे। वे चाहते थे कि समय पर बिस्मिल का विवाह कर दिया जाये ताकि वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों को महत्व दे। यदि बिस्मिल की दादीजी और पिताजी की इच्छानुसार उनका विवाह कर दिया जाता तो वह भी एक सामान्य गृहस्थ की तरह अपने घर-परिवार में उलझ कर रह जाते।</p>
<p>परिणाम यह होता कि उन्हें देश सेवा करने का अवसर तक प्राप्त नहीं होता। साथ ही, माँ भारती को अपने एक ऐसे यशस्वी पुत्र के साहसिक कारनामों के लाभ से वंचित होना पड़ता जिन्हें देख-सुनकर अंग्रेजी सरकार कॉपा करती थी। विवाह होने पर बिस्मिल चाहकर भी माँ भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति नहीं दिला पाते और न ही अपने लिए वह ख्याति अर्जित कर पाते जो उन्हें एक सच्चे देशभक्त के रूप में सम्मान प्राप्त है।</p>
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<p>(ख) यदि बिस्मिल के प्रति माताजी का व्यवहार भी पिताजी की तरह कठोर होता तो वे क्या बन सकते थे ?<br />
उत्तर<br />
यदि बिस्मिल के प्रति उनकी माताजी का व्यवहार भी पिताजी की तरह कठोर होता तो वे साहसी एवं दृढ़ संकल्पवान कभी नहीं बन सकते थे। साथ ही, उनके व्यक्तित्व में वीरता, शौर्य, पराक्रम, दूरदर्शिता, देशप्रेम, सत्य, दया, करुणा और ओज जैसे श्रेष्ठ मानवीय गुण भी विकसित नहीं हो पाते। यह सम्भव था कि पिताजी की इच्छानुसार विवाह करके वह एक श्रेष्ठ गृहस्थ बन पाते अथवा उनके मार्गदर्शन में बहुत बड़े व्यापारी बनकर अपार धन अर्जित कर पाते किन्तु एक महान देशभक्त और स्वतन्त्रता सेनानी के रूप में जो अमरत्व उन्हें प्राप्त हुआ उसे वे कभी भी प्राप्त नहीं कर पाते।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
अनुमान और कल्पना कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) अपने गाँव को पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए आप क्या करेंगे?<br />
उत्तर<br />
अपने गाँव को पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए मैं निम्नलिखित उपाय करूँगा</p>
<ul>
<li>सभी गाँव वालों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करूंगा।</li>
<li>हरे-भरे पेड़ों के काटने पर प्रतिबन्ध लगवाऊँगा।</li>
<li>साथी बच्चों के सहयोग से एक दल बनाकर जगह-जगह नये पौधे लगाऊँगा तथा उनके पेड़ बनने तक उनकी देखभाल करूँगा</li>
<li>जल के सभी उपलब्ध स्रोतों को साफ रखने के लिए उनके आस-पास जानवरों को नहलाने, कपड़े धोने, गन्दगी फैलाने, कूड़ा-करकट डालने पर रोक का आग्रह करूंगा।</li>
<li>पॉलीथीन के प्रयोग को पूर्णत: प्रतिबन्धित करूंगा।</li>
</ul>
<p>(ख) यदि आपको विद्यालय के छात्र संघ का अध्यक्ष बना दिया जाए तो आप विद्यालय में क्या-क्या सुधार लाना चाहेंगे?<br />
उत्तर<br />
यदि मुझे विद्यालय के छात्र संघ का अध्यक्ष बनने का अवसर मिले तो मैं सर्वप्रथम विद्यालय में उच्च एवं अनुकूल शैक्षिक वातावरण बनाना चाहूँगा। इसके अतिरिक्त मेरा जोर नियमित पूरी कक्षा लगवाने, विद्यार्थियों द्वारा पूर्ण गणवेश में विद्यालय आने, सभी कालांशों में उपस्थित होने, उनकी जायज समस्याओं का निदान ढूँढ़ने, अनुशासन बनाये रखने इत्यादि पर होगा। इसके अतिरिक्त मैं यह भी चाहूँगा कि मेरे विद्यालय में खेलकूद एवं पाठ्य-सहगामी गतिविधियाँ भी समय-समय पर होती रहें।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिए<br />
शिक्षा, क्षमा, अक्षर, अपेक्षा, इच्छा, छत, मच्छर, तुच्छ।<br />
उत्तर<br />
उपरोक्त सभी शब्दों को त्रुटिरहित उच्चारित कीजिए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नांकित तालिका में &#8216;क्ष&#8217;,&#8217;छ&#8217; और &#8216;च्छ&#8217; के प्रयोग वाले तीन-तीन शब्द लिखिए<br />
उत्तर<br />
<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46754" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/09/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-21-मेरी-माँ-2.jpg" alt="MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 21 मेरी माँ 2" width="377" height="152" srcset="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/09/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-21-मेरी-माँ-2.jpg 377w, https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/09/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-21-मेरी-माँ-2-300x121.jpg 300w" sizes="(max-width: 377px) 100vw, 377px" /></p>
<p>प्रश्न 3.<br />
पाठ में कई ऐसे शब्द हैं जिनके अन्त में प्रत्यय लगे हैं। ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए<br />
उत्तर<br />
सहयोग, जीवन, दृढ़ता, कदापि, भोजनादि, शिक्षादि, अवर्णनीय, कलंकित, धार्मिक, आत्मिक, सामाजिक।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय छाँटकर उनके सामने लिखिए<br />
उत्तर<br />
<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46753" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/09/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-21-मेरी-माँ-1.jpg" alt="MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 21 मेरी माँ 1" width="278" height="198" /></p>
<p><strong>मेरी माँ परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या </strong></p>
<p>(1) एक समय मेरे पिताजी दीवानी मुकदमे में किसी पर दावा करके वकील से कह गए थे कि जो काम हो वह मुझसे करा लें। कुछ आवश्यकता पड़ने पर वकील साहब ने मुझे बुला भेजा और कहा कि मैं पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर कर दूं। मैंने तुरंत उत्तर दिया कि यह तो धर्म विरुद्ध होगा, इस प्रकार का पाप मैं कदापि नहीं कर सकता। वकील साहब ने बहुत समझाया कि मुकदमा खारिज हो जाएगा। किंतु मुझ पर कुछ भी प्रभाव न हुआ, न मैंने हस्ताक्षर किए। मैं अपने जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करता था, चाहे कुछ हो जाए, सत्य बात कह देता था।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती&#8217; के &#8216;मेरी माँ&#8217; नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी और महान देशभक्त<br />
रामप्रसाद &#8216;बिस्मिल&#8217; हैं।</p>
<p>प्रसंग-इस गद्यांश में लेखक ने सत्य के प्रति अपने दृढ़ विश्वास का वर्णन किया है।</p>
<p>व्याख्या-लेखक रामप्रसाद &#8216;बिस्मिल&#8217; के पिताजी को बेटे का स्वतन्त्रता संग्राम आन्दोलन में भाग लेना पसन्द न था। वह उसका ध्यान क्रान्तिकारी गतिविधियों से हटाकर अन्यत्र लगाते रहते थे। एक बार वह उसे अपने साथ दीवानी में एक मुकदमे के दौरान ले गये। वहाँ वह वकील से यह कहकर वापस चले गये कि उनकी अनुपस्थिति में जो भी काम हो वह रामप्रसाद से करा ले। थोड़ी ही देर बाद वकील साहब ने उसे बुलवाया और वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर करने को कहा। सत्य के अनुयायी रामप्रसाद ने इसे धर्म विरुद्ध पाप बताते हुए पिताजी के हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। वकील साहब के यह समझाने पर भी कि यदि उसने पिताजी के हस्ताक्षर नहीं किये तो मुकदमा खारिज हो जायेगा, रामप्रसाद पर इसका तनिक भी प्रभाव नहीं हुआ और उन्होंने पिताजी के हस्ताक्षर करने से स्पष्ट मना कर दिया। सत्य को उच्च आदर्श मानकर उसका अनुसरण करने वाले रामप्रसाद ने जीवन भर सत्य का आचरण किया और बिना परिणाम की चिन्ता किये सदा सत्य बात कही।</p>
<p>(2) जन्मदात्री जननी ! इस जीवन में तो तुम्हारा ऋण उतारने का प्रयत्न करने का भी अवसर न मिला। इस जन्म में तो क्या, यदि अनेक जन्मों में भी सारे जीवन, प्रयत्न करूँ तो भी तुमसे उऋण नहीं हो सकता। जिस प्रेम और दृढ़ता के साथ तुमने इस तुच्छ जीवन का सुधार किया है, वह अवर्णनीय है। मुझे जीवन की प्रत्येक घटना का स्मरण है कि तुमने किस प्रकार अपनी देववाणी का उपदेश करके मेरा सुधार किया है। तुम्हारी दया से ही मैं देश सेवा में संलग्न हो सका। धार्मिक जीवन में भी तुम्हारे ही प्रोत्साहन ने सहायता दी। जो कुछ शिक्षा मैंने ग्रहण की उसका भी श्रेय तुम्हीं को है।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-इस गद्यांश में लेखक ने अपनी माँ द्वारा समय-समय पर प्रदत्त अतुलनीय सम्बल व सहयोग का वर्णन करते हुए उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की है।</p>
<p>व्याख्या-माँ का प्रत्येक बालक के जीवन में विशिष्ट स्थान होता है। वह जन्मदात्री तो है ही, साथ ही जीवन निर्मात्री भी है। लेखक रामप्रसाद &#8216;बिस्मिल&#8217; अपनी उसी जन्मदात्री और जीवनदात्री माँ को स्मरण करते हुए लिखते हैं कि माँ ने जो कृपा उन पर की है उसे चुकाने का अवसर इस जन्म में तो नहीं मिल पाया क्योंकि शीघ्र ही अंग्रेजी हुकूमत उन्हें फाँसी के तख्ते पर चढ़ाने वाली है। वह कहते हैं कि इस जन्म तो क्या अनेक जन्म मिलें तो भी तमाम कोशिशों के बावजूद वह माँ के ऋण से उऋण नहीं हो सकते क्योंकि माँ के उपकार हैं ही इतने। वह कहते हैं कि उनके जैसे एक सामान्य से बालक में देशभक्ति के जो भाव प्रेम और दृढ़ता के साथ उनकी माँ ने भरे हैं, उनका वर्णन करना असम्भव है। बीते जीवन की प्रत्येक घटना को याद करते हुए वह कहते हैं कि किस प्रकार माँ तुमने अपनी ममतारूपी वाणी से उनके जीवन मूल्यों में सुधार किया है। ये तुम्हारे आशीर्वाद और परम कृपा का ही फल था कि वह देश सेवा हेतु अपना जीवन होम कर सके। माँ के प्रोत्साहन और सहयोग का ही परिणाम था कि रामप्रसाद धर्म के मार्ग पर चलकर उत्तम शिक्षा ग्रहण कर सके।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>(3) महान से महान संकट में भी तुमने मुझे अधीर नहीं होने दिया। सदैव अपनी प्रेम भरी वाणी को सुनाते हुए मुझे सांत्वना देती रहीं। तुम्हारी दया की छाया में मैंने अपने जीवन भर में कोई कष्ट अनुभव न किया। इस संसार में मेरी किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की इच्छा नहीं। केवल एक इच्छा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-इस गद्यांश में लेखक अपने जीवन के अन्तिम समय में अपनी माँ द्वारा उसके लिए किए गये त्याग का स्मरण कर भावुक हो उठता है।</p>
<p>व्याख्या-लेखक कहता है कि माँ तुम्हारी शिक्षा इतनी | महान थी कि तुमने संकटों में भी मुझे अधीर नहीं होने दिया<br />
और अपनी प्रेमपूर्ण वाणी व व्यवहार से सदैव सांत्वना देती रहीं। लेखक आगे लिखता है कि अपनी माँ की कृपा के कारण जीवन भर उन्हें कभी किसी कष्ट का अनुभव नहीं हुआ। लेखक को यह ज्ञात है कि अब उसके जीवन का अंतिम समय निकट है और ऐसे में उसकी अंतिम इच्छा किसी वस्तु के भोग-विलास अथवा ऐश्वर्य की नहीं है बल्कि वह चाहता है कि काश, यह सम्भव हो पाता कि वह अपनी माताजी के श्रीचरणों में बैठकर उनकी कुछ सेवा कर अपने इस जीवन को सफल बना पाता।</p>
<p>(4) माँ ! विश्वास है कि तुम यह समझ कर धैर्य धारण करोगी कि तुम्हारा पुत्र माताओं की माता भारत माता की सेवा में अपने जीवन को बलिवेदी की भेंट कर गया और उसने तुम्हारी कोख कलंकित न की। अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़रहा। जब स्वाधीन भारत का इतिहास लिखा जाएगा, तो उसके किसी पृष्ठ पर उज्ज्वल अक्षरों में तुम्हारा भी नाम लिखा जाएगा।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-इस गद्यांश में लेखक अपने बलिदान पर अपनी माँ से धैर्य धारण करने और उन्हें गौरवान्वित महसूस करने की बात कह रहा है।</p>
<p>व्याख्या-जीवन भर अपनी माँ द्वारा बताये गये कर्तव्य मार्ग पर चलने वाला लेखक, देश पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को दृढ़ संकल्पित हो, अपनी माँ से विनती कर रहा है कि वह उसके बलिदान पर धैर्य धारण करेगी। लेखक अपनी माँ को सम्बोधित करते हुए आगे कहता है कि उसे इस बात पर गर्व होना चाहिए कि उसका पुत्र माताओं की माता अर्थात् भारतमाता की आन-मान-सम्मान की रक्षा की खातिर अपने इस तुच्छ जीवन को हँसते-हँसते न्यौछावर कर रहा है और इससे उसकी कोख की सार्थकता सिद्ध हो जायेगी। वह आगे कहता है कि उसके जैसे हजारों-लाखों के संघर्षों एवं बलिदानों के पश्चात् जब भारत स्वतन्त्र होगा और उसका स्वाधीनता इतिहास लिखा जायेगा तब उसके किसी-न-किसी पृष्ठ पर सुनहरे अक्षरों में उसकी माँ का नाम भी अवश्य ही अंकित होगा।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-1/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 1</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-2/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 2</a></li>
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<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-6/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 6</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-7/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 7</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-8/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 8</a></li>
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<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-10/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 10</a></li>
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</ul>
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<div class="gtx-trans-icon"></div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 10:30:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा PDF download, Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 1, these solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-1/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>In this article, we will share <a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-solutions/">MP Board Class 6th Hindi Solutions</a> Chapter 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा PDF download, <span data-sheets-value="{&quot;1&quot;:2,&quot;2&quot;:&quot;Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 1&quot;}" data-sheets-userformat="{&quot;2&quot;:8705,&quot;3&quot;:{&quot;1&quot;:0},&quot;12&quot;:0,&quot;16&quot;:11}">Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 1, t</span>hese solutions are solved subject experts from the latest edition books.</p>
<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Questions and Answers</h3>
<p><strong>विजयी विश्व तिरंगा प्यारा प्रश्न उत्तर MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 1.</strong><br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) सदा शक्ति &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; वाला।<br />
(ख) प्रेम सुधा &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; वाला।<br />
(ग) स्वतन्त्रता के &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;..रण में।<br />
(घ) मिट जाय भय &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; सारा।<br />
(ङ) तब होवे प्रण &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; हमारा।<br />
उत्तर<br />
(क) बरसाने<br />
(ख) सरसाने<br />
(ग) भीषण<br />
(घ) संकट<br />
(ङ) पूर्ण।</p>
<p><strong>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 1 MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 2.</strong><br />
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) कवि के अनुसार हमारा ध्येय क्या है?<br />
उत्तर<br />
कवि के अनुसार हमारा ध्येय पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त करना है।</p>
<p>(ख) झंडे को ऊँचा रखने से क्या तात्पर्य है?<br />
उत्तर<br />
हमारा देश हमेशा ही शक्ति का प्रेरणा स्रोत, प्रेमरूपी अमृत से संचित करने वाला, मातृभूमि के लिए वीरों के तन-मन से प्यारा है। इन्हीं कारणों से भारतवर्ष की विश्व में गौरवपूर्ण प्रतिष्ठा है। कवि चाहता है कि ऐसे गौरवशाली देश का राष्ट्रीय झण्डा &#8216;तिरंगा&#8217; सदैव ऊँचा ही रहे।</p>
<p>(ग) कवि ने झंडे को &#8216;विजयी विश्व तिरंगा प्यारा&#8217; क्यों कहा है?<br />
उत्तर<br />
कवि ने भारतीय झण्डे &#8216;तिरंगे&#8217; को &#8216;विजयी विश्व तिरंगा प्यारा&#8217; इसलिए कहा है क्योंकि कवि का मानना है कि &#8216;तिरंगा&#8217; हमारी राष्ट्रीय भावनाओं का प्रमुख प्रेरणा स्रोत है। इसको देखकर प्रत्येक भारतीय स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है।</p>
<p>(घ) कवि वीरों को क्यों बुला रहा है ?<br />
उत्तर<br />
कवि मातृभूमि को स्वतन्त्र कराने के उद्देश्य से स्वयं के प्राणों की आहुति के लिए वीरों का आह्वान कर रहा है।</p>
<p>(ङ) तिरंगे को देखकर वीरों के मन में कौन-से भाव जाग्रत होते हैं ? .<br />
उत्तर<br />
तिरंगा विश्व में हमारी शान एवं विजय का प्रतीक है। यह वीरों के मन में शक्ति, जोश, आनन्द एवं साहस के भावों का संचार करने वाला है। तिरंगा हमें अपने देश की रक्षार्थ अपनी जान तक बलिदान करने के लिए प्रतिपल प्रेरित करता रहता है।</p>
<p>(च) स्वतंत्रता संग्राम में शत्रु की दशा कैसी है ?<br />
उत्तर<br />
स्वतंत्रता संग्राम में माँ भारती के वीर सपूतों के साहस व पराक्रम को देखकर शत्रु काँपने लगते हैं।</p>
<p><strong>Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Question Answer MP Board Class 6th Hindi प्रश्न 3.</strong><br />
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए</p>
<p>(क) मातृभूमि का तन-मन सारा।<br />
झंडा ऊँचा रहे हमारा॥</p>
<p>(ख) स्वतंत्रता के भीषण रण में।<br />
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में।</p>
<p>(ग) इस झंडे के नीचे निर्भय,<br />
रहे स्वतंत्र यह अविचल निश्चय,</p>
<p>(घ) इसकी शान न जाने पाए.<br />
चाहे जान भले ही जाए।</p>
<p>उत्तर<br />
खण्ड &#8216;क&#8217; : सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या देखें।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p><strong>Mp Board Class 6 Hindi Chapter 1  प्रश्न 1.</strong><br />
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए<br />
स्वतन्त्रता, मातृभूमि, निर्भय, निश्चय, ध्येय, प्रण।<br />
उत्तर<br />
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से अपनी कक्षा में शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए<br />
पूरण, सान, विरो, ऊंचा।<br />
उत्तर<br />
पूर्ण, शान, वीरो, ऊँचा।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए<br />
सुधा, विश्व, झंडा, माता, शत्रु, तन।<br />
उत्तर<br />
सुधा &#8211; अमृत, अमिय<br />
विश्व. &#8211; जगत, संसार<br />
झंडा- ध्वज, पताका<br />
माता &#8211; जननी, माँ<br />
शत्रु &#8211; बैरी, अरि<br />
तन &#8211; देह, शरीर।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिएस्वतंत्र, शत्रु, नीचे, विजय।<br />
उत्तर<br />
शब्द &#8211; विलोम<br />
स्वतंत्र &#8211; परतंत्र<br />
शत्रु &#8211; मित्र</p>
<p><strong>विजयी विश्व तिरंगा प्यारा सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या</strong></p>
<p>(1) <em>विजयी विश्व तिरंगा प्यारा।</em><br />
<em>झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥ </em><br />
<em>सदा शक्ति बरसाने वाला, </em><br />
<em>प्रेम सुधा सरसाने वाला;</em><br />
<em>वीरों को हरषाने वाला,</em><br />
<em>मातृभूमि का तन-मन सारा।</em><br />
<em>झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥</em></p>
<p>शब्दार्थ-विजय = जीत प्राप्त करने वाला। तिरंगा = तिरंगा झण्डा । सुधा = अमृत। सरस = सुन्दर। हरषाना = खुश करना। तन = शरीर। सदा = हमेशा।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक &#8216;भाषा भारती&#8217; के &#8216;विजयी विश्व तिरंगा प्यारा&#8217; नामक पाठ से अवतरित है। यह श्री श्यामलाल &#8216;पार्षद&#8217; द्वारा रचित है।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में विश्व विजय के प्रतीक रूप में तिरंगे झण्डे के गौरव का वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-कवि की यह हार्दिक इच्छा है कि सारी दुनिया में जीत प्राप्त करने वाला हमारा यह तिरंगा हमेशा सबसे ऊँचाई पर फहराता रहे। हमेशा शक्ति का प्रेरणास्रोत, प्रेम रूपी अमृत से संचित करने वाला, वीरों को प्रमुदित (प्रसन्न) करने वाला एवं मातृभूमि के लिए तन तथा मन के समान प्यारा यह तिरंगा सदा दुनिया में सबसे ऊँचाई पर शान से फहराता रहे।</p>
<p>(2) <em>स्वतन्त्रता के भीषण रण में,</em><br />
<em>लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में; </em><br />
<em>काँपे शत्रु देखकर मन में, </em><br />
<em>मिट जाये भय संकट सारा।</em><br />
<em>झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥</em></p>
<p>शब्दार्थ-भीषण रण = भयंकर संग्राम लखकर = देखकर । क्षण-क्षण = प्रत्येक पल। संकट = मुसीबत।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने तिरंगे झण्डे को जोश तथा प्रेरणा का उद्गम स्थल ठहराया है।</p>
<p>व्याख्या-आजादी के संग्राम को देखकर देश में वीरों का जोश हर क्षण बढ़ता जाता है तथा उनके जोश को देखकर ही दुश्मन भयभीत होकर मन ही मन काँपने लगता है एवं जो सब प्रकार के डर तथा मुसीबतों को समाप्त करने वाला है। ऐसा हर क्षण हमारे मन में जोश तथा उमंग का संचार करने वाला प्रिय तिरंगा झण्डा सारी दुनिया में सबसे ऊँचाई पर हमेशा फहराता रहे।</p>
<p>(3) <em>इस झण्डे के नीचे निर्भय,</em><br />
<em>रहे स्वतन्त्र यह अविचल निश्चय; </em><br />
<em>बोलो भारत माता की जय, </em><br />
<em>स्वतन्त्रता है ध्येय हमारा।</em><br />
<em>झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥</em></p>
<p>शब्दार्थ-निर्भय = बिना डर के। संकल्प = प्रतिज्ञा। ध्येय = उद्देश्य, लक्ष्य।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने आजादी के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने का संकेत दिया है।</p>
<p>व्याख्या-इस झण्डे के नीचे रहते हुए निर्भय होकर हम स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लक्ष्य पर डटे रहें। आओ भारत माता की जय बोलते हुए हम संकल्प (प्रतिज्ञा) करें कि स्वतन्त्रता प्राप्त करना ही हमारा सबसे ऊँचा उद्देश्य है। संगठन, हेलमेल तथा निडरता का प्रतीक तिरंगा सारी दुनिया में सबसे ऊँचाई पर लहराता रहे।</p>
<p>(4) <em>आओ प्यारे वीरो, आओ,</em><br />
<em>देश धर्म पर बलि-बलि जाओ; </em><br />
<em>एक साथ सब मिलकर गाओ, </em><br />
<em>प्यारा भारत देश हमारा।</em><br />
<em>झण्डा ऊंचा रहे हमारा।&#8217;</em></p>
<p>शब्दार्थ-बलि = कुर्बान, बलिदान। सन्दर्भ=पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने वीरों (बहादुरों) को अपने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान करने को कहा है।</p>
<p>व्याख्या-भारत के प्यारे वीरो! आओ तथा देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दो अथवा देश पर कुर्बान हो जाओ। सब समवेत स्वर में कहो कि भारत हमारा प्यारा देश है। समस्त विजय भावना का प्रतीक हमारा प्यारा झण्डा सबसे ऊँचाई पर लहराकर हमें जोश प्रदान करता रहे।</p>
<p>(5) <em>इसकी शान न जाने पाये,</em><br />
<em>चाहे नान भले ही जाये;</em><br />
<em>विश्व विजय करके दिखलाएँ, </em><br />
<em>तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।</em><br />
<em>झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥</em></p>
<p>शब्दार्थ-शान = गौरव, प्रतिष्ठ। जान = प्राण। प्रण &#8211; प्रतिज्ञा। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-कवि ने प्रस्तुत पद्यांश में तिरंगे के गौरव को चिरस्थायी बनाने का आह्वान किया है।</p>
<p>व्याख्या-भारत की शान एवं गौरव के प्रतीक इस तिरंगे की प्रतिष्ठा में तनिक भी कमी नहीं आनी चाहिए भले ही इसकी रक्षा के लिए हमें अपने प्राणों को कुर्बान करना पड़े। जब हम वास्तव में विजय प्राप्त कर लेंगे अर्थात् देश आजाद हो जायेगा तभी हमारा प्रण (प्रतिज्ञा) पूरा ठहराया जाएगा।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
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<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-7/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 7</a></li>
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</ul>
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<div class="gtx-trans-icon"></div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 9 पद और दोहे प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 10:30:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 9 पद और दोहे PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 Pad Aur Dohe Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter 9 Pad Aur Dohe Questions and ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 9 पद और दोहे प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-9/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 9 पद और दोहे प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>In this article, we will share <a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-solutions/">MP Board Class 6th Hindi Solutions</a> Chapter 9 पद और दोहे PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.</p>
<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 Pad Aur Dohe Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 9 Pad Aur Dohe Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) मीरा ने आँसुओं के जल से सींचकर बोई है<br />
(i) प्रेम की बेल<br />
(ii) मोती की बेल,<br />
(iii) मूंगे की बेल<br />
(iv) फूल की बेल।<br />
उत्तर<br />
(i) प्रेम की बेल</p>
<p>(ख) भूखे को भीख देने की बात कही है<br />
(i) रहीम ने<br />
(ii) कबीर ने,<br />
(iii) मीरा ने<br />
(iv) कमाल ने।<br />
उत्तर<br />
(ii) कबीर ने</p>
<p>(ग) जहाँ काम आवे सुई, कहा करै<br />
(i) त्रिशूल<br />
(ii) फूल<br />
(iii) तलवारि<br />
(iv) सम्पत्ति<br />
उत्तर<br />
(iii) तलवारि</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) छौड़ दई कुल की &#8230;&#8230;&#8230;&#8230; कहा करै कोई।<br />
(ख) घृत-घृत सब काढ़ि लियो &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.. पियो कोई।<br />
(ग) कर &#8230;.. की बंदगी भूखे को दै भीख।<br />
(घ) जो रहीम उत्तम &#8230;&#8230;&#8230;.. का करि सकत कुसंग।<br />
उत्तर<br />
(क) कानि<br />
(ख) छाछ<br />
(ग) साहब<br />
(घ) प्रकृति।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) मीराबाई ने श्रीकृष्ण की किस रूप में उपासना की है?<br />
उत्तर<br />
मीराबाई ने श्रीकृष्ण की पति रूप में उपासना की है।</p>
<p>(ख) कबीर ने किन दो बातों की सीख दी है?<br />
उत्तर<br />
कबीर ने साहब (ईश्वर) की वन्दना करने और भूखे को भीख (भिक्षा) देने की सीख दी है।</p>
<p>(ग) कल का काम आज ही क्यों कर लेना चाहिए?<br />
उत्तर<br />
कल का काम आज ही कर लेना चाहिए, क्योंकि क्षण भर में ही मृत्यु हो सकती है। मृत्यु हो जाने पर काम न किया हुआ ही रह जाएगा।</p>
<p>(घ) रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व किस उदाहरण से स्पष्ट किया है ?<br />
उत्तर<br />
रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व यह उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि शीतलता देने वाले चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, फिर भी उस पर साँपों के जहर का प्रभाव नहीं होता है।</p>
<p>(ङ) सच्चे मित्र की क्या पहचान है ?<br />
उत्तर<br />
सच्चे मित्र की यह पहचान है कि वह अपने मित्र का साथ विपत्ति काल में भी नहीं छोड़ता। विपरीत परिस्थितियों में भी वह साथ देता है।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित पद्यांशों के भाव स्पष्ट कीजिए</p>
<p>(क) भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।<br />
दासी &#8216;मीरा&#8217; लाल गिरधर, तारो अब मोही॥</p>
<p>(ख) कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पौर।<br />
जो पर पोर न जानई, सो काफिर बेपीर ।</p>
<p>(ग) एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।<br />
रहिमन मूलहि सीचिवो, फूलै फलै अघाय।<br />
उत्तर<br />
&#8216;सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या&#8217; के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 1, 2, व 3 की व्याख्या देखें।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए<br />
भ्रात, धृत, प्रकृति, सम्पत्ति, भुजंग, व्याप्त।<br />
उत्तर<br />
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करना सीखें और अभ्यास करें।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नलिखित शब्दों के मानक रूप लिखिएअंसुअन, भगत, जाके, तिरसूल, परलै, अब्ब, कब्ब, विपति।<br />
उत्तर<br />
अश्रुओं, भक्त, जिसके, त्रिशूल, प्रलय, अब, कब, विपत्ति।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित शब्दों के सामने उनके पर्याय लिखे हैं। इनमें एक शब्द पर्यायवाची शब्द नहीं है, उसे चुनकर लिखिए<br />
(क) देवता = सुर, असुर, देव।<br />
(ख) पति = प्राणनाथ, कंत, तनय।<br />
(ग) अभिलाषा = लोभ, इच्छा, चाह।<br />
(घ) सज्जन सभ्य, शिष्ट, अशिष्ट। ।<br />
(ङ) फूल = पुष्प, कुसुम, पुरुष।<br />
उत्तर<br />
(क) असुर<br />
(ख) तनय<br />
(ग) लोभ<br />
(घ) अशिष्ट<br />
(ङ) पुरुष</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है। प्रत्येक पंक्ति में पहचान स्पष्ट कीजिए<br />
(i) जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।<br />
(ii) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाए।<br />
(iii) कहि रहीम सम्पत्ति सगै बनत बहुत बहुरीत।<br />
(iv) जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपौर।<br />
उत्तर-<br />
(i) &#8216;मोर-मुकुट-मेरो&#8217; शब्दों में &#8216;म&#8217; वर्ण की कई बार आवृति होने पर अनुप्रास अलंकार है।<br />
(ii) साधे, सब, सधै, सब, साधे, सब&#8217; शब्दों में &#8216;स&#8217; वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।<br />
(ii) सम्पति, बनत, बहुत, रीत&#8217; शब्दों में &#8216;त&#8217; वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।<br />
(iv) पर, पीर, काफिर, बेपीर&#8217; शब्दों में &#8216;प&#8217; और &#8216;र&#8217; वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।</p>
<p>प्रश्न 5.<br />
तालिका में दिए गए शब्दों की सही जोड़ी बनाइएशब्द<br />
विलोम &#8211; शब्द<br />
(i) पण्डित &#8211; (क) घृणा<br />
(ii) देव &#8211; (ख) दुःख<br />
(iii) प्रेम &#8211; (ग) रात<br />
(iv) सुख &#8211; (घ) थल<br />
(v) जल &#8211; (ङ) दानव<br />
(vi) दिन &#8211; (च) मूर्ख<br />
उत्तर<br />
(i)→ (च), (ii)→ (ङ), (iii) → (क), (iv)→ (ख),(v)→(घ), (vi)→ (ग)</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए<br />
(i) परा + जय<br />
(ii) परा + भव<br />
(iii) परा + क्रम<br />
(iv) नि +रंजन<br />
(v) नि+ वेश<br />
(vi) नि+ दान।<br />
उत्तर<br />
(i) पराजय<br />
(ii) पराभव<br />
(iii) पराक्रम<br />
(iv) निरंजन<br />
(v) निवेश<br />
(vi) निदान</p>
<p>प्रश्न 7.<br />
निम्नलिखित शब्दों में आवट और आहट प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए<br />
(i) सजाना + आवट<br />
(ii) बनाना + आवट<br />
(iii) लिखना + आवट<br />
(iv) मुस्कराना + आहट<br />
(v) टकराना + आहट<br />
(vi) चिल्लाना + आहट<br />
(vii) घबराना + आहट<br />
उत्तर<br />
(i) सजावट<br />
(ii) बनावट<br />
(iii) लिखावट<br />
(iv) मुस्कराहट<br />
(v) टकराहट<br />
(vi) चिल्लाहट<br />
(vii) घबराहट।</p>
<p><strong>पद और दोहे सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या</strong></p>
<p>(1) <em>मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई॥</em><br />
<em>जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।</em><br />
<em>तात मात भ्रात बंधु, आपनों न कोई॥ </em><br />
<em>छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करै कोई। </em><br />
<em>सन्तन डिंग बैठि-बैंठि लोक-लाज खोई॥ </em><br />
<em>चूनरी के किये टूक, ओढ़ लीन्हीं लोई। </em><br />
<em>मोती मूंगे उतारि, वन-माला पोई।</em><br />
<em>अंसुअन जल सींच-सींच, प्रेम बेलि बोई। </em><br />
<em>अब तो बेलि फैल गई आनन्द फल होई॥ </em><br />
<em>प्रेम की मथनियाँ बड़े, जतन से बिलोई। </em><br />
<em>घृत-घृत सब काढ़ि लियो, छाछ पियो कोई॥</em><br />
<em>भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।</em><br />
<em>दासी &#8216;मीरा&#8217; लाल गिरधर, तारो अब मोही।</em></p>
<p>शब्दार्थ-आपनों = अपना। छाँड़ दई = छेड़ दी। कुल = परिवार । कानि = इज्जत, कुल मर्यादा। हिंग=पास। खोई = मिटा दी। लाजशर्म, लज्जा। चूनरी=चूंदरी, चादर।  लोई = लोई नामक वस्त्र जिसे प्राय: त्यागी, साधु-सन्त ओढ़ते हैं। वन-माला = वन के फूल और पत्तियों की माला। पोई = पिरो कर। प्रेम बेलि-प्रेम की लता। होई = लग रहे हैं। मथनियाँ = मथानी, रई। बिलोई=दही मथने का काम किया। जतन से = प्रयत्न से। काढ़ि लियो = निकाल लिया। छछ = मट्ठा। पियो कोई = कोई भी पीता रहे। राजी भई = प्रसन्न हुई। जगत देखि रोई = संसार के बन्धनों को देखकर दु:खी होने लगी। तारो = उद्धार करो। मोही = मेरा, या मुझे।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पद &#8216;पद और दोहे&#8217; नामक पाठ से लिया गया है। यह पद मीराबाई की रचना है।</p>
<p>प्रसंग-मीरा ने स्वयं को श्रीकृष्ण की भक्ति में लीम कर दिया है। वह चाहती है कि उसके इष्ट भगवान कृष्ण उसका भवसागर से उद्धार कर दें।</p>
<p>व्याख्या-मीराबाई कहती है कि मेरे प्रभु, तो गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले, गौ का पालन करने वाले श्रीकृष्ण हैं। उनके अतिरिक्त मेरा कोई अन्य प्रभु नहीं है। अपने सिर पर जो मोर-मुकुट धारण करते हैं, वही मेरे पति हैं। माता-पिता, भाई-बन्धु (सरो सम्बन्धी) अपने तो कोई भी नहीं हैं। मैंने कुल मर्यादा छोड़ दी है, मेरा कोई क्या कर सकेगा। साधु-सन्तों की संगति में बैठना शुरू कर दिया है, मैंने लोक-लाज भी खो दी है। प्रतिष्ठित घर की बहू जिस चादर को ओढ़ कर चलती है, उस चादर के मैंने दो टुकड़े कर दिए हैं, (फाड़ दी है)। लोई पहन ली है। मोती-मूंगे धारण करना छोड़ दिया है।</p>
<p>वन के फूलों की माला (सहज में प्राप्त फलों की माला) पिरो कर पहनने लगी हैं। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में आँसू बहाते हुए, उनके प्रति प्रेम की बेलि को बोया है और लगातार सचिा है। वह बाल अब फूलकर फैल चुकी है। उस पर अब तो आनन्द के फल लगने शुरू हो गए हैं। प्रेम की मथानी से प्रयत्नपूर्वक बिलोने पर (अमृत रूपी) सम्पर्ण घी निकाल लिया है।</p>
<p>शेष छाछ (मट्ठा) रह गया है, उसे कोई भी पीता रहे (संसार छोड़ा हुआ मट्ठा है-तत्वहीन पदार्थ है। जो उसे पीना चाहे वह पीता रहे।) में प्रभु भक्तों की संगति में आनन्दित हो रही हूँ। संसार को देखकर अत्यधिक दु:खी होती हूँ। मीराबाई वर्णन करती हैं कि मैं तो गिरधर लाल श्रीकृष्ण की दासी हूँ। हे प्रभो आप मेरा उद्धार कीजिए।</p>
<p>(2)<em> कबिरा कहै कमाल सौं, दो बातें लै सीख।</em><br />
<em>कर साहब की बन्दगी, भूखे को दें भीख॥1॥ </em><br />
<em>बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। </em><br />
<em>जो दिल खोजां आपना, मुङ्गा सा बुरा न कोय॥2॥ </em><br />
<em>कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर। </em><br />
<em>जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर ॥3॥ </em><br />
<em>जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल। </em><br />
<em>तोहि फूल को फूल हैं, वाको है तिरसूल ॥4॥ </em><br />
<em>काल्ह करें सो आज कर, आज कर सो अव्व। </em><br />
<em>पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब्ध ॥5॥</em></p>
<p>शब्दार्थ-सीख = शिक्षा ग्रहण कर ले। बन्दगी = प्रार्थना, भक्ति। साहब= स्वामी, ईश्वर। भीख = भिक्षा। न मिलिया कोय = कोई नहीं मिला। खोजां = ढूँढ़ने पर। पर-पीर-दूसरे की पीड़ा। जानै = जानता है।<br />
काफिर = विधर्मी। बेपीर = किसी की पीड़ा को न समझने वाला। तोको = तेरे लिए। बुवै = बोता है।<br />
ताहि = उसको। तोहि = तेरे लिए। वाको = उसके लिए। तिरसूल = त्रिशूल (बड़े-बड़े काँट)। काल्ह = कल। अब्ब-अभी-अभी, इसी समय। परलै = प्रलय। बहुरि = फिर।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहे &#8216;पद और दोहे&#8217; नामक पाठ से लिए गए हैं। इनकी रचना कबीर ने की है।</p>
<p>प्रसंग-कबीर ने लोगों को सलाह दी है कि उन्हें देखना चाहिए कि समाज में कोई व्यक्ति दुःखी, भूखा या किसी भी तरह के कष्ट से पीड़ित तो नहीं है। यदि ऐसा है तो प्रत्येक को सहायता के लिए उठ खड़ा होना चाहिए।</p>
<p>व्याख्या-</p>
<ul>
<li>कबीर अपने पुत्र कमाल को समझाते हुए कहते हैं कि तुम्हें दो बातों की शिक्षा ग्रहण कर लेनी चाहिए। पहली यह है कि तुम्हें ईश्वर की वन्दना करना सीख लेना चाहिए और दूसरी बात यह कि भूखे व्यक्ति को भिक्षा देनी चाहिए।</li>
<li>कबीर कहते हैं कि संसार में बुरे व्यक्ति की जाँच करने के लिए मैं निकला, तो मुझे कोई भी व्यक्ति बुरा नहीं मिला।<br />
परन्तु जब मैंने अपने हृदय में झाँका और देखा, तो मुझे यह बात ज्ञात हुई कि स्वयं मुझसे बढ़कर बुरा कोई अन्य व्यक्ति नहीं है।</li>
<li>कबीर कहते हैं कि वही सच्चा पीर (ईश का भक्त) है जो दूसरों के कष्ट को अच्छी तरह जानता है। जो दूसरों की पीड़ा को समझ नहीं सकता, वह निश्चय ही विधर्मी है, बेपीर है अर्थात् उसे किसी के भी प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति नहीं है।</li>
<li>कबीर कहते हैं कि जो भी कोई व्यक्ति तुम्हारे लिए काँटा बोता है, अर्थात् तुम्हारे लिए किसी भी प्रकार की विपत्तियाँ<br />
(कष्ट) देता है, तो तुम्हें उसके बदले में फूल ही बोने चाहिए। प्रतिकार में काँट (कष्ट) नहीं बोना चाहिए, बाधाएँ नहीं डालनी चाहिए। क्योंकि अन्त में तुम्हारे लिए फूल ही फूल रहेंगे (अर्थात् किसी भी तरह का कष्ट नहीं होगा)। उसके लिए (काँटे बोने वाले के लिए) तो बड़े-बड़े (त्रिशूल जैसे) काँट ही पैदा होंगे।</li>
<li>कबीर ने अपना कार्य करने की सलाह देते हुए उपदेश दिया है कि जो काम कल किया जाना है, उसे आज ह और जो काम आज करना है, उसे अभी-अभी पूरा कीजिए क्योंकि, पल (क्षण) भर में ही प्रलय (मृत्यु) हो गई, तो फिर उस काम को कब कर सकोगे।</li>
</ul>
<p>(3) <em>एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।</em><br />
<em>रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥1॥ </em><br />
<em>रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। </em><br />
<em>जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥2॥ </em><br />
<em>रहिमन चुप है बैठिए, देखि दिनन के फेर।</em><br />
<em>जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहें बेर॥ 3 ॥ </em><br />
<em>जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। </em><br />
<em>चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥4॥ </em><br />
<em>कहि रहीम सम्पति सगे, बनत बहुत बहुरीत।</em><br />
<em>बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥5॥</em></p>
<p>शब्दार्थ-एकै साधे = एक की साधना करने पर। जाय = चला जाता, नष्ट हो जाता है। सीचिबो सींचने मात्र से। मूलहि = मूल में,जड़ में। अघाय-पूर्ण तृप्ति तक। बड़ेन-बड़े लोगों को। डारि = फेंकना। तरवारि = तलवार। दिनन के फेर बदले हुए समय को। नीके = अच्छे। बेर &#8211; देर। प्रकृति = स्वभाव। कुसंग- बुरी संगति। व्यापत = समा जाना। भुजंग = जहरीले साँप। सम्पति- सम्पत्ति काल में। बहु रीत- अनेक रीतियों से (किसी भी प्रकार से)। बिपति-कसौटि = विपत्ति जैसी कसौटी पर। कसे = कसने पर। जे कसे = जो कस दिए जाते हैं। ते ही = वे ही। साँचे मीत सच्चे मित्र।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक भाषा भारती&#8217; के पाठ &#8216;पद और दोहे&#8217; नामक पाठ से ली गई हैं। ये दोहे रहीम की रचना हैं।</p>
<p>प्रसंग-इन दोहों में रहीम ने सत्संगति, गुण ग्रहण करना तथा विषम स्थिति में मौन धारण करके रहने का उपदेश किया है।</p>
<p>व्याख्या</p>
<ul>
<li>रहीम जी कहते हैं कि एक ईश्वर की साधना करने से सब कुछ प्राप्त करने में सफलता मिल जाती है। सब (ईश्वर और संसार) की साधना करने से सब कुछ मिट जाता है। इसलिए मूल (जड़) की सिंचाई करने से वृक्ष पर फूल-फल पूर्ण सन्तुष्ट करने के लिए लगना प्रारम्भ हो जाता है।</li>
<li>रहीम जी सलाह देते हैं कि बड़े लोगों को संगति पाकर छोटे आदमियों का अपमान कभी भी नहीं करना चाहिए। उदाहरण देते हुए कि जो काम (सिलाई आदि) छोटी सी सुई से किया जा सकता है, वही काम तलवार (बड़ी वस्तु) से नहीं किया जा सकता अर्थात् छोटे आदमी ही कभी-कभी महत्वपूर्ण होते हैं।</li>
<li>रहीम जी कहते हैं कि दिनों के परिवर्तन से (समय के बदल जाने पर-विपरीत समय पर) किसी भी कार्य की सिद्धि न हो सकने की दशा में शान्तिपूर्वक बैठ जाना चाहिए। (खराब समय में शान्ति से विचार करने लग जाना चाहिए, अधीर नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब अच्छा समय आएगा, तो बात बनते (काम होने में) देर नहीं लगती।</li>
<li>रहीम जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छे स्वभाव का होता है, उसके ऊपर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। देखिए चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, लेकिन उस वृक्ष पर उन सपों के जहर का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता। चन्दन वृक्ष शीतलता और शीलवानपन का प्रतीक है।</li>
<li>रहीम जी कहते हैं कि सम्पत्ति काल में बहुत से लोग अनेक तरह से सगे-सम्बन्धी बनने लगते हैं। (परन्तु सच्चे मित्र सिद्ध नहीं होते)। सच्चे मित्र तो वही होते हैं जो विपत्ति रूपी कसौटी पर कसे जाने पर साथ रहते हैं। अर्थात् विपत्ति में जो साथ देते हैं, वे ही सच्चे मित्र होते हैं।</li>
</ul>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-1/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 1</a></li>
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</ul>
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 20 रुपये की आत्मकथा प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-20/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 10:24:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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					<description><![CDATA[In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 20 रुपये की आत्मकथा PDF download, Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 20, these solutions are solved subject experts from the latest edition books. Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 20 Rupay ki Atmakatha Question Answer Solutions MP Board Class 6th Hindi Chapter 20 Rupay ... <a title="भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 20 रुपये की आत्मकथा प्रश्न उत्तर हिंदी" class="read-more" href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-20/" aria-label="Read more about भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 20 रुपये की आत्मकथा प्रश्न उत्तर हिंदी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>In this article, we will share <a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-solutions/">MP Board Class 6th Hindi Solutions</a> Chapter 20 रुपये की आत्मकथा PDF download, <span data-sheets-value="{&quot;1&quot;:2,&quot;2&quot;:&quot;Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 1&quot;}" data-sheets-userformat="{&quot;2&quot;:8705,&quot;3&quot;:{&quot;1&quot;:0},&quot;12&quot;:0,&quot;16&quot;:11}">Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 20, t</span>hese solutions are solved subject experts from the latest edition books.</p>
<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 20 Rupay ki Atmakatha Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 20 Rupay ki Atmakatha Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) वैदिक युग में रुपये का नाम था<br />
(i) रुफियाह<br />
(ii) रुपी,<br />
(iii) रुष्यकम्<br />
(iv) रुपाई।<br />
उत्तर<br />
(iii) रुष्यकम्</p>
<p>(ख) सन् 1957 के पूर्व रुपये में होते थे<br />
(1) 1000 पैसे<br />
(ii) 64 पैसे<br />
(iii) 50 पैसे<br />
(iv) 25 पैसे<br />
उत्तर<br />
(ii) 64 पैसे</p>
<p>(ग) रुपये के नए अंतर्राष्ट्रीय प्रतीक की लिपि है<br />
(i) द्रविड़<br />
(ii) ब्राह्मी<br />
(iii) देवनागरी<br />
(iv) गुरुमुखी<br />
उत्तर<br />
(iii) देवनागरी।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) रुपया शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. ने किया।<br />
(ख) रुपये का दशमलवीकरण सन् &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.. में किया गया।<br />
उत्तर<br />
(क) शेरशाह सूरी<br />
(ख) 1957 ई.।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 3.<br />
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) शेरशाह सूरी के कार्यकाल में रुपये का वजन कितना था?<br />
उत्तर<br />
शेरशाह सूरी के कार्यकाल में रुपया चाँदी के सिक्के के रूप में था जिसका वजन 178 ग्रेन था जो लगभग 11.5 ग्राम के बराबर था।</p>
<p>(ख) रुपए को कागज के एक ओर किस बैंक ने मुद्रित किया था ?<br />
उत्तर<br />
रुपए को कागज के एक ओर बैंक ऑफ बंगाल ने मुद्रित किया था।</p>
<p>(ग) प्राचीन समय में सोने और तांबे के सिक्के किस नाम से जाने जाते थे?<br />
उत्तर<br />
प्राचीन समय में सोने और तांबे के सिक्कों को भी &#8211; &#8220;रुप्यकम्&#8217; के नाम से जाना जाता था।</p>
<p>(घ) रुपए के नए अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप की डिजाइन किसने की?<br />
उत्तर<br />
रुपए के नए अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप (र) की डिजाइन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्राध्यापक श्री उदय कुमार ने की।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 4.<br />
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) हिन्दी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं में रुपए को किस नाम से जाना जाता है?<br />
उत्तर<br />
हिन्दी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं में &#8216;रुपया&#8217; शब्द का नाम भी उस नाम की समानता लिए हुए नाम से ही जाना जाता है। जैसे-गुजरात में रुपियो&#8217;, कन्नड़ में रुपाई&#8217;, मलयालम में &#8216;रुपा&#8217;, मराठी में &#8216;रुपए&#8217; नाम से जाना जाता है। इन सब भाषाओं में थोड़े परिवर्तन से रुपए का स्वरूप एक ही है।</p>
<p>(ख) दशमलवीकरण के पूर्व रुपए को किस प्रकार विभाजित किया जाता था?<br />
उत्तर<br />
दशमलवीकरण से पूर्व रुपए को आने, पैसे और पाई में बाँटा गया था। उस समय (अर्थात् 1957 से पूर्व) तीन पाई का एक पैसा होता था। चार पैसे का एक आना और सोलह आने का एक रुपया होता था।</p>
<p>(ग) वर्तमान में किन-किन देशों की मुद्राओं के लिए अन्तर्राष्ट्रीय प्रतीक प्रयोग में लाए जाते हैं ?<br />
उत्तर<br />
अन्य देशों की मुद्राओं के अन्तर्राष्ट्रीय प्रतीक निम्न प्रकार से प्रयोग में लाए जाते हैं<br />
<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46775" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/09/MP-Board-Class-6th-Hindi-Bhasha-Bharti-Solutions-Chapter-20-रुपये-की-आत्मकथा-1.jpg" alt="MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 20 रुपये की आत्मकथा 1" width="248" height="167" /><br />
प्रश्न 5.<br />
सोचिए और बताइए</p>
<p>(क) जब रुपया प्रचलन में नहीं था, तब बाजार में लेन-देन कैसे होता होगा?<br />
उत्तर<br />
रुपये के प्रचलन में न होने पर, बाजार में लेन-देन वस्तु के बदले वस्तु द्वारा होता था।</p>
<p>(ख) रुपये को कागज पर मुद्रित करने के क्या लाभ हैं?<br />
उत्तर<br />
मुद्रा का भार नहीं होता है। अत: लाने और ले जाने में आसानी और सरलता होती है। चोरी और लूट का अंदेशा कम हो गया है। मुद्रा के नष्ट होने पर शीघ्र ही छपाई होकर उसकी भरपाई की जा सकती है।</p>
<p>(ग) यदि आप विदेश जाते हैं, तो क्या भारतीय रुपया वहाँ चलेगा?<br />
उत्तर<br />
विदेश जाने पर, अब भारतीय रुपया वहाँ चल सकेगा क्योंकि अब रुपये ने अपना अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त करने में सफलता प्राप्त कर ली है। रुपये ने भी डॉलर, पौण्ड और यूरो की तरह अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान बना ली है।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए</p>
<p>(क) यदि रुपए का प्रचलन न होता तो क्या होता?<br />
उत्तर<br />
यदि रुपए का प्रचलन न होता तो बाजार में वस्तुओं के खरीदने और बेचने में बड़ी कठिनाई होती। वस्तु के बदले वस्तु खरीदने में वस्तु को भार रूप में इधर से उधर लाना और ले जाना पड़ता। साथ ही, व्यापारी द्वारा बदले में ली जाने वाली वस्तु का उचित मूल्य नहीं दिया जाता। खरीदने वाले की वस्तु का मूल्य बेचने वाले के द्वारा निर्धारित होता। इस तरह व्यापारी खरीददार को ठगता।</p>
<p>(ख) यदि कागज पर रुपए के छापने की शुरूआत नहीं होती, तो क्या होता?<br />
उत्तर<br />
धातु की मुद्रा का बोझ लादकर बाजार में वस्तु खरीदने के लिए ले जाना पड़ता। कागज की मुद्रा आसानी से और बिना भार के तथा सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाई जा सकती है। ठगी और चोरी का डर बढ़ गया होता।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए<br />
अस्तित्व, प्रणाली, प्रतीक, उल्लेख, शुल्क।<br />
उत्तर<br />
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण कीजिए और लिखकर अभ्यास कीजिए।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए<br />
(i) मुदरित<br />
(ii) अर्थिक<br />
(iii) चिन्ह<br />
(iv) दसमलव<br />
(v) बांटा।<br />
उत्तर-<br />
(i) मुद्रित, (ii) आर्थिक, (iii) चिह्न, (iv) दशमलव, (v) बाँटा।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग अलग करके लिखिए<br />
(i) अनुराग<br />
(ii) अपमान<br />
(iii) अनुमान<br />
(iv) अपकार।<br />
उत्तर<br />
(i) अनु + राग (अनु उपसर्ग)<br />
(ii) अप + मान (अप उपसर्ग)<br />
(iii) अनु + मान (अनु उपसर्ग)<br />
(iv) अप + कार (अप उपसर्ग)।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
&#8216;ईय&#8217; प्रत्यय लगाकर निम्नलिखित शब्दों से नए शब्द बनाइए<br />
(i) भारत<br />
(ii) यूरोप<br />
(ii) स्वर्ग<br />
(iv) शासक।<br />
उत्तर<br />
(i) भारत + ईय = भारतीय<br />
(ii) यूरोप + ईय = यूरोपीय<br />
(iii) स्वर्ग + ईय = स्वर्गीय<br />
(iv) शासक + ईय = शासकीय।</p>
<p>प्रश्न 5.<br />
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए<br />
(i) पाठ्य-पुस्तक<br />
(ii) सिक्का<br />
(iii) स्वतन्त्रता<br />
(iv) मुद्रा<br />
(v) शासन।<br />
उत्तर<br />
(i) कक्षा 6 के लिए हिन्दी की पाठ्य-पुस्तक शासन द्वारा बदल दी गई है।<br />
(ii) भारतीय सिक्के &#8216;रुपये&#8217; का अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अब अपना अलग ही महत्व है।<br />
(iii) भारत की स्वतन्त्रता में भारतीय वीर जवानों ने अपनी जान की परवाह नहीं की।<br />
(iv) भारतीय मुद्रा का प्रचलन विश्व बाजार में अब महत्वपूर्ण हो गया है।<br />
(v) शासन द्वारा नकल मुक्त परीक्षा कराने के लिए बहुत अच्छी पहल की गई है।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
निम्नलिखित शब्दों की संधि विच्छेद कीजिए<br />
(i) शिक्षार्थी<br />
(ii) कवीश्वर<br />
(iii) नदीश<br />
(iv) भानूदय<br />
(v) महात्मा<br />
(vi) परीक्षार्थी।<br />
उत्तर<br />
(i) शिक्षा + अर्थी<br />
(ii) कवि+ ईश्वर<br />
(iii) नदी+ ईश<br />
(iv) भानु + उदय<br />
(v) महा + आत्मा<br />
(vi) परीक्षा + अर्थी</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 7.<br />
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए<br />
कुछ लोग कागज पर मुद्रित रुपये को तोड़-मरोड़कर रखते हैं, उस पर कुछ भी लिख देते हैं, उनमें छेदकर उनका स्वरूप बिगाड़ देते हैं, सजावट या माला में उपयोग करते हैं। ऐसा करना भारतीय मुद्रा का अपमान है। हमारा दायित्व है। कि हम रुपये का स्वरूप बनाए रखें।<br />
(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।<br />
(ख) हम रुपये के स्वरूप को कैसे सुरक्षित रख सकते<br />
उत्तर<br />
(क) &#8216;भारतीय मुद्रा&#8217; उचित शीर्षक है।<br />
(ख) हम रुपये के स्वरूप को सुरक्षित रख सकते हैं यदि हम उसे सजावट और माला में उपयोग न करें। साथ ही उसे तोड़-मरोड़कर न रखें। उसके स्वरूप को बनाए रखने का प्रयास करें।</p>
<p>प्रश्न 8.<br />
निम्नलिखित शब्दों में &#8216;र&#8217; या &#8216;ऋ&#8217; का उचित संकेत लगाकर सही शब्द बनाकर लिखिए<br />
(i) ऋष्टि<br />
(ii) दर्शन<br />
(iii) कर्म<br />
(iv) गह<br />
(v) सूर्य<br />
(vi) क्रम।<br />
उत्तर<br />
(i) दृष्टि<br />
(ii) दर्शन<br />
(iii) कर्म<br />
(iv) गृह<br />
(v) सूर्य<br />
(vi) क्रम।</p>
<p><strong>रुपये की आत्मकथा परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या </strong></p>
<p>(1) आज मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरा अस्तित्व प्राचीन काल से रहा है। वैदिक युग में मुझे &#8216;रुप्यकम्&#8217; के नाम से जाना जाता था। रुप्यकम् का अर्थ है: चाँदी का सिक्का। उस समय अन्य धातु के सिक्कों को भी रुप्यकम् ही कहा जाता था। इस कारण हिन्दी में मेरा नाम रुपया हो गया।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियों को हमारी पाठ्य-पुस्तक &#8216;भाषा-भारती&#8217; के पाठ &#8216;रुपये की आत्मकथा&#8217; से लिया गया है। यह आत्मकथा संकलित है।</p>
<p>प्रसंग-भारतीय मुद्रा का नाम रुपया है। रुपये के प्रचलन में आने का वर्णन किया गया है।</p>
<p>व्याख्या-रुपया अपनी कहानी बताते हुए कहता है कि रुपया मेरा नाम बहुत पुराने समय से प्रचलन में आया हुआ है। वैदिक युग में भी इसे &#8216;रुप्यकम्&#8217; नाम से पुकारा जाता था। वास्तव में रुप्यकम् का अर्थ होता है-चाँदी का सिक्का। उस समय अन्य धातुओं से भी सिक्के बनते थे और उन्हें भी रुप्यकम् कहा जाता था। हिन्दी भाषा में रुप्यकम् के स्थान पर इस सिक्के का नाम रुपया हो गया।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-1/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 1</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-2/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 2</a></li>
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<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-5/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 5</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-6/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 6</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-7/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 7</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-8/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 8</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-9/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 9</a></li>
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</ul>
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<div class="gtx-trans-icon"></div>
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		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 6 विजय गान प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-6/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 10:00:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 Vijay Gan Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 6 Vijay Gan Questions and Answers</h3>
<p><strong>भाषा भारती कक्षा 6 Solutions MP Board प्रश्न 1.</strong><br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) पथ में बरस रही हैं<br />
(i) चिंगारियाँ<br />
(ii) बाधाएँ,<br />
(iii) शक्तियाँ<br />
(iv) बिजलियाँ।<br />
उत्तर<br />
(ii) बाधाएँ</p>
<p>(ख) धरा संतप्त हो रही है<br />
(i) पुण्य से<br />
(i) दया से,<br />
(iii) दान से<br />
(iv) पाप से।<br />
उत्तर<br />
(iv) पाप से</p>
<p><strong>Bhasha Bharti Class 6 MP Board प्रश्न 2.</strong><br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) वीरों को &#8230;&#8230;&#8230;&#8230; की धारों पर चलना पड़ता है।<br />
(ख) नभ मण्डल को नित &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. उगलने दो।<br />
(ग) दृढ़ निश्चय से &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. डर जाता है।<br />
(घ) दुर्गम सागर सुखाने के लिए तुम &#8230;&#8230;&#8230;&#8230; हो।<br />
उत्तर<br />
(क) तलवारों<br />
(ख) अंगार<br />
(ग) काल स्वयं<br />
(घ) अगस्त्य।</p>
<p><strong>Bhasha Bharti Class 6 Solutions MP Board प्रश्न 3.</strong><br />
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो वाक्यों में लिखिए</p>
<p>(क) वीरों के पथ में क्या बरस रही हैं ?<br />
उत्तर<br />
वीरों के पथ में बाधाएँ बरस रही हैं।</p>
<p>(ख) अंगार उगलने के लिए किससे कहा गया है?<br />
उत्तर<br />
अंगार उगलने के लिए नभ मण्डल से कहा गया है।</p>
<p>(ग) कवि किससे, किसको टकरा देना चाहता है ?<br />
उत्तर<br />
कवि समुद्र को हिमालय से, सूर्य को चन्द्रमा से, धरती को आकाश से टकरा देना चाहता है।</p>
<p>(घ) कवि तपस्वी बनने के लिए क्यों कह रहा है ?<br />
उत्तर<br />
कवि कह रहा है कि तुम (वीर पुरुष) तपस्वी बन जाओ जिससे तुम्हारे ऊपर माया-मोह का प्रभाव न पड़ सके।</p>
<p>(ङ)&#8217;प्राणों की पतवार से कवि का क्या आशय है?<br />
उत्तर<br />
प्राणों की पतवार से कवि का आशय है कि हे वीरो! तुम अपने अन्दर प्राण शक्ति (ऊर्जा) इतनी पैदा कर लो कि तुम्हें बाधाओं के सागर को पार करने में किसी तरह का डर न लगे।</p>
<p>(च) वीरों से काल कब डरने लगता है ?<br />
उत्तर<br />
पक्के इरादे वाले वीरों से काल डरने लगता है।</p>
<p>(छ) &#8216;विजय गान&#8217; कविता का सार लिखिए।<br />
उत्तर<br />
कवि का आशय है कि श्रेष्ठ वीरों को विजय के मार्ग पर बाधाओं की चुनौती को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते जाना चाहिए। मनुष्य जीवन एक महासंग्राम है। इसमें अनेक तरह की रुकावटें आती हैं। जीवन की इन रुकावटों पर जीत पाने के लिए साहसपूर्वक सावधानी से आगे ही आगे बढ़ते जाना चाहिए।</p>
<p>तलवार की धार पर चलने के समान दुर्गम जीवन पथ पर चलने के लिए त्याग, तपस्या और पक्के संकल्प की जरूरत होती है। प्राण-शक्ति के सहारे मनुष्य को जीवन के समुद्र को पार करने में सफलता प्राप्त हो सकती है।</p>
<p><strong>Bhasha Bharti Hindi Book Class 6 MP Board प्रश्न 4.</strong><br />
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए</p>
<p>(क) बरस रही बाधाएँ पथ में उमड़-उमड़ कर धारों से। वीर, सिन्धु के पार उतरते, प्राणों की पतवारों से।<br />
(ख) छूने पाए मोह न तुमको, बनो तपस्वी ! लौह हृदय !<br />
काल स्वयंडर जाये देखकर, ध्रुव से भी ध्रुवतर निश्चय।<br />
उत्तर<br />
खण्ड &#8216;क&#8217;: सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 1 व 3 की व्याख्या देखिए।</p>
<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p><strong>Bhasha Bharti Kaksha 6 MP Board प्रश्न 1.</strong><br />
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए<br />
प्राण, संतप्त, ध्रुव, अगस्त्य।<br />
उत्तर<br />
कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करना सीखिए और लगातार अभ्यास कीजिए।</p>
<p><strong>Bhasha Bharti Class 6 Hindi Solution MP Board प्रश्न 2.</strong><br />
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी कीजिए<br />
बीरबर, निशचय, तलवर, अगार।<br />
उत्तर<br />
वीरवर, निश्चय, तलवार, अंगार।</p>
<p><strong>भाषा भारती कक्षा 6 हिंदी MP Board प्रश्न 3.</strong><br />
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए. हिमाचल, मंडल, अम्बर, हृदय।<br />
उत्तर</p>
<ul>
<li>हिमाचल-जाड़े के दिनों में हिमाचल बर्फ से ढक जाता है।</li>
<li>मंडल-आकाश मंडल से भीषण आग बरस रही है।</li>
<li>अम्बर-अम्बर में काले बादल छाए हुए हैं।</li>
<li>हृदय-उदार हृदय व्यक्ति आदरणीय होते हैं।</li>
</ul>
<p><strong>Mp Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न 4.</strong><br />
कविता की पहली पंक्ति में &#8216;सम्हल-सम्हल&#8217; का प्रयोग हुआ है। ऐसे अन्य पदों को छाँटिए जिनमें एक ही शब्द का दो बार प्रयोग हुआ हो।<br />
उत्तर<br />
सम्हल-सम्हल, उमड़-उमड़, घुमड़-घुमड़।</p>
<p><strong>Class 6 Bhasha Bharti MP Board प्रश्न 5.</strong><br />
इस कविता की जिन पंक्तियों में वर्गों की आवृत्ति हुई है, उन्हें छाँटकर लिखिए।<br />
उत्तर<br />
&#8216;अवनी-अम्बर&#8217; में : &#8216;अ&#8217; वर्ण की।<br />
&#8216;पाप-ताप&#8217; में &#8216;प&#8217; वर्ण की। ध्रुव से ध्रुवतर, में &#8216;ध्रु&#8217; एवं व वर्ण की।</p>
<p><strong>Class 6th Hindi Bhasha Bharti MP Board प्रश्न 6.</strong><br />
निम्नलिखित शब्दों में उचित उपसर्ग व प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए ज्ञान, सफल।<br />
उत्तर<br />
अज्ञानता और असफलता।</p>
<p>प्रश्न 7.<br />
पर्यायवाची शब्द लिखिएसूर्य, चन्द्रमा, सिन्धु, अग्नि, अम्बर।<br />
उत्तर</p>
<ul>
<li>सूर्य = भानु, भास्कर, सूरज, दिवाकर, दिनकर, आदित्य।</li>
<li>चन्द्रमा = चन्द्र, शशि, रजनीकर, शीतकर, सुधांशु, सुधाकर, राकापति।</li>
<li>सिन्धु = समुद्र, सागर, वारिधि, पयोधि, नीरधि।</li>
<li>अग्नि =आग, वैश्वानर, अनल, पावक, हुताशन।</li>
<li>अम्बर = आकाश, क्षितिज, अन्तरिक्ष, नभ, गगन, व्योम।</li>
</ul>
<p><b><strong>विजय गान सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या </strong></b></p>
<p>(1) <em>सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर,</em><br />
<em>तलवारों की धारों पर!</em><br />
<em>इधर-उधर हैं खाई-कुएँ, ऊपर है सूना अम्बर </em><br />
<em>बरस रहीं बाधाएँ पथ में, </em><br />
<em>उमड़-उमड़ कर धारों से।</em><br />
<em>वीर, सिन्धु के पार उतरते,</em><br />
<em>प्राणों की पतवारों से।</em><br />
<em>टकराने दो सिन्धु-हिमाचल, </em><br />
<em>सूर्य-चन्द्र अवनी-अम्बर।</em><br />
<em>सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर, </em><br />
<em>तलवारों की धारों पर।</em></p>
<p>शब्दार्थ-सम्हल=सम्हल कर सावधानीपूर्वक। वीरवर = श्रेष्ठवीर। अम्बर = आकाश। बाधाएँ = रुकावटें। पथ = मार्ग। सिन्धु = समुद्र। अवनी = धरती।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक भाषा-भारती&#8217; की &#8216;विजय गान&#8217; नामक कविता से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता नटवरलाल &#8216;स्नेही&#8217; हैं।</p>
<p>प्रसंग-कवि ने कठिनाइयों में भी सावधानीपूर्वक अपने जीवन रूपी मार्ग पर लगातार चलते रहने का आह्वान किया है।</p>
<p>व्याख्या-कवि कहता है कि हे श्रेष्ठ वीरो ! तुम्हें चुनौतियों भरे अति कठिनाइयों वाले जीवन पथ पर सावधानीपूर्वक चलते जाना चाहिए। जीवन का मार्ग कठिनाइयों की, खाइयों और कुओं (रुकावटों) से बाधित है। ऊपर आकाश सूना है। तुम्हारे मार्ग में रुकावटों की वर्षा हो रही हैं।</p>
<p>ये बाधाएँ वर्षा की जलधारा के समान झड़ी लगाए उमड़ रही हैं। (परन्तु तुम्हें घबराना नहीं चाहिए क्योंकि तुम वीर हो और) वीर तो अपने प्राणों की पतवार से (प्राणों की बाजी लगा करके) विपत्तियों के सागर को पार कर जाते हैं। चाहे, समुद्र और हिमालय, सूर्य और चन्द्रमा तथा धरती और आकाश आपस में क्यों न टकरा जाएँ, तुम्हें तो हे श्रेष्ठ वीरो! सावधानी से तलवारों की धार पर भी अपने मार्ग पर आगे ही आगे बढ़ते जाना है।</p>
<p>(2) <em>पापों से संतप्त धरा का</em><br />
<em>पाप, ताप में जलने दो। </em><br />
<em>घुमड़-घुमड़ कर नभ मंडल को </em><br />
<em>नित अंगार उगलने दो।</em><br />
<em> जल जाएगा पाश पुराना, परवशता अंचल जर्जर। </em><br />
<em>सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर तलवारों की धारों पर।</em></p>
<p>शब्दार्थ-संतप्त =कष्ट पाती हुई। ताप = ऊष्मा, गर्मी। पाश = जाल। परवशता = गुलामी। अंचल= आंचल जर्जर = जीर्ण क्षीर्ण, पुराना और फटा हुआ।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।<br />
प्रसंग-इस पद्यांश में सारी धरती से पुरानापन तथा गुलामी के पुराने अंचल को जलाकर भस्म कर देने के लिए आह्वान किया गया है।<br />
व्याख्या-कवि कहता है कि यह धरती अनेक तरह से किए गए पापों से संताप के कष्ट पा रही है। इसे पाप की ताप (आग) से जलने दो। सारा आकाश मण्डल भी बार-बार उमड़-घुमड़ कर अंगारे उगलने लग जाय जिससे पुरानी गुलामी का झीना सा जर्जर जाल जलकर समाप्त हो जाए। इसलिए, हे श्रेष्ठ वीरो ! तुम सावधानीपूर्वक तलवारों की धार पर चलते चलो (जीवन की अनेक बाधाओं को दूर करते हुए आगे बढ़ते चलो।)।</p>
<p>(3) <em>छूने पाए मोह न तुमको,</em><br />
<em>बनो तपस्वी! लौह हृदय। काल स्वयं डर जाय देखकर, </em><br />
<em>ध्रुव से भी ध्रुवतर निश्चय। हो अगस्त्य, </em><br />
<em>क्या कठिन सुखाना बाधा का दुर्दम सागर। </em><br />
<em>सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर तलवारों की धारों पर।</em></p>
<p>शब्दार्थ-लौह हृदय = लोहे से बने पक्के हृदय वाले। ध्रुव = अटल। निश्चय = इरादा। अगस्त्य = एक ऋषि का नाम जिन्होंने अपनी अंजलि से सारे समुद्र को पीकर सुखा दिया था। बाधा &#8211; रुकावट। दुर्दम = जिसे वश में करना बहुत ही कठिन होता है। सागर = समुद्र।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-कवि भारत के वीरों को पक्के इरादे से भयभीत न होकर बाधाओं पर विजय प्राप्त करने का आह्वान करता है।</p>
<p>व्याख्या-हे वीरो! तुम्हें किसी भी तरह का मोह भी छू न सके, इसके लिए तुम्हें एक तपस्वी बन जाना चाहिए। तुम्हें लोहे के हृदय वाला हो जाना चाहिए जिससे काल भी भयभीत हो उठे। तुम्हें अत्यन्त पक्के इरादों वाला हो जाना चाहिए। हे वीरवरो! तुम्हें अगस्त्य ऋषि के समान बन जाना चाहिए जिससे बाधाओं के दुर्दमनीय (कठिनाई से वश में किए जाने वाला) सागर को भी वश में करना तुम्हारे लिए बिल्कुल भी कठिन नहीं होगा। अतः हे श्रेष्ठ वीरो! तुम्हें सम्हल कर तलवार की धार पर चलना है (चुनौतीपूर्ण कार्य करना है।)</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-1/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 1</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-2/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 2</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-3/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 3</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-4/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 4</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-5/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 5</a></li>
<li><a href="https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-6/">भाषा भारती कक्षा 6 solutions chapter 6</a></li>
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</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 19 खूनी हस्ताक्षर प्रश्न उत्तर हिंदी</title>
		<link>https://mpboardsolutions.guru/mp-board-class-6th-hindi-bhasha-bharti-chapter-19/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhagya]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Oct 2024 09:27:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6]]></category>
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<h2>Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 19 Khooni Hastakshar Question Answer Solutions</h2>
<h3>MP Board Class 6th Hindi Chapter 19 Khooni Hastakshar Questions and Answers</h3>
<p>प्रश्न 1.<br />
सही विकल्प चुनकर लिखिए</p>
<p>(क) &#8216;तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा&#8221; यह नारा था<br />
(i) गाँधीजी का<br />
(ii) सुभाषचन्द्र बोस का,<br />
(iii) तिलक जी का<br />
(iv) नेहरू जी का।<br />
उत्तर<br />
(ii) सुभाषचन्द्र बोस का</p>
<p>(ख) आजादी के परवाने पर नवयुवकों ने हस्ताक्षर किए थे<br />
(i) काली स्याही से<br />
(ii) नीली स्याही से<br />
(iii) रक्त की स्याही से<br />
(iv) लाल स्याही से।<br />
उत्तर<br />
(iii) रक्त की स्याही से</p>
<p>(ग) आजादी के परवाने पर हस्ताक्षर होने के बाद तारों ने देखा<br />
(i) हिन्दुस्तानी विश्वास<br />
(ii) स्थान<br />
(iii) भाषण<br />
(iv) सर्वस्व समर्पण।<br />
उत्तर<br />
(i) हिन्दुस्तानी विश्वास।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>प्रश्न 2.<br />
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए</p>
<p>(क) यूँ कहते-कहते वक्ता की आँखों में &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. आया।<br />
उत्तर<br />
खून</p>
<p>(ख) पर यह &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.. पत्र नहीं, आजादी का परवाना है।<br />
उत्तर<br />
साधारण</p>
<p>(ग) रण में जाने को &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; खड़े तैयार दिखाई देते थे।<br />
उत्तर<br />
युवक</p>
<p>(घ) यह शीश कटाने का &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.. नंगे सिर झेला जाता है।<br />
उत्तर<br />
सौदा</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए</p>
<p>(क) सुभाषचन्द्र बोस ने बलिदान करने को क्यों कहा?<br />
उत्तर<br />
&#8216;भारत के लिए स्वतन्त्रता देवी को प्राप्त करने के लिए अपना बलिदान करो&#8217; ऐसा सुभाष बाबू ने इसलिए कहा कि आजादी का इतिहास खून से लिखा जाता है।</p>
<p>(ख) शीशों के फूल चढ़ाने से कवि का क्या अभिप्राय<br />
उत्तर<br />
देश की आजादी के लिए, निर्दयी शासक वर्ग से मुक्ति पाने में सफलता तभी मिल सकेगी, जब हम अपने शीशरूपी फूलों को आजादी की वेदी पर सर चढ़ा सकेंगे।</p>
<p>(ग) खून को पानी के समान कब कहा जाता है ?<br />
उत्तर<br />
जिस खून में आजादी प्राप्त करने के लिए जोश नहीं हो, उस जीवन में गतिशीलता न हो, उस व्यक्ति का खून-खून नहीं, वह पानी है। क्योंकि ऐसा खून देश के किसी भी काम में नहीं आता है।</p>
<p>(घ) आजादी का इतिहास कैसे लिखा जाता है ?<br />
उत्तर<br />
आजादी का इतिहास काली स्याही से नहीं लिखा जाता है, वह तो रक्त की लाल स्याही से लिखा जाता है जिसमें बलिदानों का जिक्र होता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mpboardsolutions.guru/wp-content/uploads/2019/08/MP-Board-Solutions.png" alt="MP Board Solutions" width="299" height="25" /></p>
<p>(ङ) आजादी का परवाना किसे कहा गया है ?<br />
उत्तर<br />
आजादी का परवाना कोई साधारण कागज नहीं होता । है। उसे भरने के लिए तन-मन-धन और जीवन का बलिदान एवं सर्वस्व समर्पण करना होता है। जिस पर अपने रक्त की उजली बूंदें गिरी होती हैं।</p>
<p>(च) खूनी हस्ताक्षर से कवि का क्या आशय है ?<br />
उत्तर<br />
खूनी हस्ताक्षर से कवि का आशय इस बात से है कि वह अपनी मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने के लिए तैयार है।</p>
<p>(छ) सुभाषचन्द्र बोस के नारे का युवकों पर क्या प्रभाव पड़ा?<br />
उत्तर<br />
&#8216;तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा&#8217; और इन्कलाब के नारों ने भारतीय नवयुवकों में भारतीय आजादी के लिए जोश भर दिया। वे उसके लिए अपना सर्वस्व निछावर करने के लिए तैयार हो गए। वे रणक्षेत्र में जाने के लिए हुँकार भर रहे थे।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए</p>
<p>(क) आजादी के चरणों में, जयमाल चढ़ाई जाएगी।<br />
वह सुनो, तुम्हारे शीशों के फूलों से गूंथी जाएगी।</p>
<p>(ख) सारी जनता हुँकार उठी, हम आते हैं, हम आते हैं।<br />
माता के चरणों में यह लो, हम अपना रक्त चढ़ाते हैं।<br />
उत्तर<br />
&#8216;सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या&#8217; शीर्षक के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 3 व9 को देखिए।</p>
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<p><span style="text-decoration: underline;">भाषा की बात</span></p>
<p>प्रश्न 1.<br />
शुद्ध उच्चारण कीजिए<br />
(i) सुभाष<br />
(ii) स्वतन्त्रता<br />
(iii) स्याही<br />
(iv) रक्तिम<br />
(v) इन्कलाब<br />
(vi) हस्ताक्षर।<br />
उत्तर<br />
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से सही उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।</p>
<p>प्रश्न 2.<br />
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए<br />
(i) पानी<br />
(ii) फूल<br />
(ii) धन<br />
(iv) माता।<br />
उत्तर<br />
(i) पानी &#8211; जल, पय<br />
(ii) फूल &#8211; पुष्प, सुमन।<br />
(iii) धन &#8211; दौलत, द्रव्य।<br />
(iv) माता &#8211; जननी, जन्मदात्री।</p>
<p>प्रश्न 3.<br />
विलोम शब्द लिखिए<br />
(i) स्वतन्त्रता<br />
(ii) सही<br />
(iii) काला<br />
(iv) जीवन<br />
(v) विश्वास।<br />
उत्तर<br />
(i) स्वतन्त्रता = परतन्त्रता<br />
(ii) सही = गलत<br />
(iii) काला = सफेद<br />
(iv) जीवन = मरण<br />
(v) विश्वास = अविश्वास।</p>
<p>प्रश्न 4.<br />
सही जोड़ी बनाइए<br />
(i) खून &#8211; (क) स्वतन्त्रता<br />
(ii) कुरबानी &#8211; (ख) लेखनी<br />
(iii) आजादी &#8211; (ग) प्रवाह, गतिशीलता<br />
(iv) कलम &#8211; (घ) रक्त<br />
(v) रवानी &#8211; (ड.) बलिदान<br />
उत्तर<br />
(i) →(घ), (ii) →(ड.), (iii) →(क), (iv) →(ख), (v) →(ग)</p>
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<p>प्रश्न 5.<br />
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए<br />
(i) खून में उबाल आना<br />
(ii) शीश कटाना<br />
(iii) खून की &#8211; नदी बहाना।<br />
उत्तर<br />
(i) खून में उबाल आना-सुभाष के भाषणों से युवकों के खून में उबाल आ गया।<br />
(ii) शीश कटाना-मातृभूमि की आजादी की रक्षा में अनेक युवक शीश कटाने के लिए चल पड़े।<br />
(iii) खून की नदी बहाना-आजादी की रक्षा में भारतीय युवकों को खून की नदी बहानी पड़ी।</p>
<p>प्रश्न 6.<br />
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए<br />
(i) अर्पण<br />
(ii) परवाना<br />
(iii) जयमाल<br />
(iv) संग्राम<br />
(v) रणवीर।<br />
उत्तर<br />
(i) अर्पण-आजादी के दीवानों ने अपना तन-मन-धन सब देश के लिए अर्पण कर दिया।<br />
(ii) परवाना-आजादी के परवाने पर अनेक युवकों ने अपने उजले रक्त से हस्ताक्षर कर दिए।<br />
(ii) जयमाल-आजादी की देवी के गले में नरमुण्डों की जयमाल सुहाती है।<br />
(iv) संग्राम-देश की स्वतन्त्रता के संग्राम में अनेक युवकों ने अपनी प्राणाहुति दे दी।<br />
(v) रणवीर-रणवीर राणा प्रताप अपने चेतक घोड़े पर चढ़कर लड़ते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ा रहे थे।</p>
<p><strong>खूनी हस्ताक्षर सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या</strong></p>
<p>(1) <em>वह खून कहो किस मतलब का</em><br />
<em>जिसमें उबाल का नाम नहीं। </em><br />
<em>वह खून कहो किस मतलब का</em><br />
<em>आ सके देश के काम नहीं। </em><br />
<em>वह खून कहो किस मतलब का</em><br />
<em>जिसमें जीवन न रवानी है।</em><br />
<em>जो परवश होकर बहता है,</em><br />
<em>वह खून नहीं है, पानी है।</em></p>
<p>शब्दार्थ-परवश होकर = पराधीन होकर।</p>
<p>सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक &#8216;भाषा-भारती&#8217; के पाठ &#8216;खूनी हस्ताक्षर&#8217; से अवतरित हैं। इसके रचयिता गोपाल प्रसाद &#8216;व्यास&#8217; हैं।</p>
<p>प्रसंग-कवि का आशय यह है कि देश की आजादी के लिए मर-मिटने वाले वीरों का खूब ही खून कहलाने योग्य है।</p>
<p>व्याख्या-कवि कहता है कि खून में जोश होता है, तो वह वास्तव में खून कहा जा सकता है। जो खून देश के काम आ सके, वही खून है। इसके विपरीत वह खून किसी काम का नहीं है। जीवन की गति से युवक खून ही खून कहलाने योग्य है। गतिहीन खून किसी मतलब का नहीं होता है। पराधीन होकर बहने वाला खून खून नहीं, वह तो पानी है।</p>
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<p>(2)<em> उस दिन लोगों ने सही-सही</em><br />
<em>खू की कीमत पहचानी थी। </em><br />
<em>जिस दिन सुभाष ने बर्मा में</em><br />
<em>मांगी उनसे कुरबानी थी। </em><br />
<em>बोले, “स्वतन्त्रता की खातिर</em><br />
<em>बलिदान तुम्हें करना होगा। </em><br />
<em>तुम बहुत जी चुके हो जग में,</em><br />
<em>लेकिन आगे मरना होगा।</em></p>
<p>शब्दार्थ-कीमत = मूल्य, महत्व। कुर्बानी = बलिदान। संदर्भ = पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-सुभाष चन्द्र बोस ने बर्मा में लोगों को बलिदान होने के लिए आग्रह किया, तब लोगों को खून के महत्व की जानकारी हुई।</p>
<p>व्याख्या-कवि बताता है कि जिस दिन सुभाषचन्द्र बोस ने भारतीय जनों को बर्मा में अपने बलिदान के लिए पुकारा, उस दिन लोगों को खून का महत्व ज्ञात हुआ था। उन्होंने लोगों को पुकार करके कहा कि तुम्हें स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए बलिदान करने होंगे। अब तक तुमने पराधीनता में बहुत समय तक जीवन बिता लिया है। लेकिन अब पराधीनता को समाप्त करने के लिए तुम्हें मृत्यु स्वीकार करनी होगी।</p>
<p>(3) <em>आजादी के चरणों में,</em><br />
<em>जयमाल चढ़ाई जाएगी। </em><br />
<em>वह सुनो, तुम्हारे शीशों के</em><br />
<em>फूलों से गूंथी जाएगी। </em><br />
<em>आजादी का संग्राम कहीं</em><br />
<em>पैसे पर खेला जाता है?</em><br />
<em>यह शीश कटाने का सौदा</em><br />
<em>नंगे सर झेला जाता है।</em></p>
<p>शब्दार्थ-सौदा = सामान, व्यापार। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-आजादी प्राप्त करने के लिए शीश कटाना होता है।</p>
<p>व्याख्या-कवि कहता है कि स्वतन्त्रता देवी के चरणों में वह जयमाला अर्पित की जाएगी, जिसे तुम्हारे (देशवासियों के) शीशों रूपी फूलों से गूंथा जाएगा। तुम्हें ध्यान रखना चाहिए कि यह आजादी की लड़ाई कभी भी पैसों के आधार पर नहीं लड़ी जा सकती। यह तो सिर कटाने का सौदा है (व्यापार है)। इस सिर कटाने के सौदे को नंगे सिर ही झेलना पड़ता है।</p>
<p>(4) <em>आजादी का इतिहास कहीं</em><br />
<em>काली स्याही लिख पाती है ?</em><br />
<em>इसके लिखने के लिए खून</em><br />
<em>की नदी बहाई जाती है।&#8221; </em><br />
<em>यूँ कहते-कहते वक्ता की</em><br />
<em>आँखों में खून उतर आया। </em><br />
<em>मुख रक्त-वर्ण हो दमक उछा</em><br />
<em>दमकी उनकी रक्तिम काया।</em></p>
<p>शब्दार्थ-वक्ता = कहने वाला।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-आजादी को प्राप्त करने की लड़ाई काली स्याही से नहीं, वरन् खून की लाल स्याही से ही लिखी जाती है।</p>
<p>व्याख्या-कवि सुभाषचन्द्र बोस के उद्बोधन को स्पष्ट करता है कि आजादी की यह लड़ाई कभी भी काली स्याही से नहीं लिखी जाती है। इसके लिए खून की लाल स्याही की जरूरत पड़ती है। इस स्याही को पाने के लिए युद्ध क्षेत्र में खून की नदी बहानी पड़ती है। ऐसा कहते-कहते कहने वाले सुभाषचन्द्र बोस की आँखों में खून उतर आया अर्थात् क्रोध अपनी सीमा से ऊपर बढ़ने लगा। उनका मुख लाल पड़ गया और चमकने लगा। उनके लालवर्ण के शरीर की कान्ति दमकने लगी।</p>
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<p>(5) <em>आजानु-बाहु ऊँची करके,</em><br />
<em>वे बोले, “रक्त मुझे देना। </em><br />
<em>इसके बदले में भारत की</em><br />
<em>आजादी तुम मुझसे लेना।&#8221; </em><br />
<em>हो गई सभा में उथल-पुथल,</em><br />
<em>सीने में दिल न समाते थे। </em><br />
<em>स्वर इन्कलाब के नारों के</em><br />
<em>कोसों तक छाए जाते थे।</em></p>
<p>शब्दार्थ- आजानुबाहु = घुटने तक लम्बे हाथ। इन्कलाब = परिवर्तन।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-सुभाष बाबू ने अपनी लम्बी भुजाओं को उठाकर लोगों का आह्वान किया कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।</p>
<p>व्याख्या-सुभाषचन्द्र बोस ने घुटनों तक लम्बी बाहों को ऊपर उठाते हुए लोगों को पुकारते हुए कहा कि आप मुझे रक्त दो, इसके बदले, मैं तुम्हें भारत देश की आजादी दूंगा। ऐसा कहते ही सभा में उथल-पुथल मच गई। प्रत्येक व्यक्ति के सीने में दिल नहीं समा सके (वे सभी उत्साह से भरे थे)। परिवर्तन के नारों के स्वर कोसौं तक आए हुए सुनाई दे रहे थे।</p>
<p>(6) <em>&#8220;हम देंगे, देंगे खून&#8221;.</em><br />
<em>शब्द बस यही सुनाई देते थे। </em><br />
<em>रण में जाने को युवक खड़े</em><br />
<em>तैयार दिखाई देते थे। </em><br />
<em>बोले सुभाष, &#8220;इस तरह नहीं,</em><br />
<em>बातों से मतलब सरता है। </em><br />
<em>लो, यह कागज, है कौन यहाँ</em><br />
<em>आकर हस्ताक्षर करता है?</em></p>
<p>शब्दार्थ-रण = युद्ध के मैदान में। सरता है = पूरा होता है।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-सुभाष चन्द्र बोस के आह्वान पर लोग अपना खून देने को तैयार हो गए।</p>
<p>व्याख्या-वहाँ सभास्थल पर लोगों के स्वर निकल पड़े कि हम खून देंगे। चारों और यही स्वर गूंज रहा था। युद्ध क्षेत्र में जाने के लिए अनेक युवक खड़े दीख पड़ रहे थे। सुभाष ने कहा कि इस तरह की बातें करने से कभी भी कोई मतलब पूरा नहीं होता। यह कागज लीजिए और यहाँ आकर कौन-कौन दस्तखत करता है? अर्थात दस्तखत कीजिए।</p>
<p>(7) <em>इसको भरने वाले जन को</em><br />
<em>सर्वस्व-समर्पण करना है। </em><br />
<em>अपना तन-मन-धन-जन जीवन</em><br />
<em>माता को अर्पण करना है। </em><br />
<em>पर यह साधारण पत्र नहीं,</em><br />
<em>आजादी का परवाना है। </em><br />
<em>इस पर तुमको अपने तन का</em><br />
<em>कुछ उज्ज्वल रक्त गिराना है।</em></p>
<p>शब्दार्थ-अर्पण करना है = त्यागना है। परवाना = आदेश भरा पत्र। उज्ज्वल = उजला।</p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-आजादी प्राप्त करने के लिए हस्ताक्षर युक्त यह महत्वपूर्ण आदेश है।</p>
<p>व्याख्या-इस असाधारण पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपना सर्वस्व त्याग करना है (प्राण निछावर करने के लिए तैयार रहना है)। भारत माता की आजादी के लिए तुम सभी को अपना तन, मन, धन तथा जीवन का समर्पण करना है। तुम्हें ध्यान रखना चाहिए कि यह कोई साधारण पत्र नहीं है, यह निश्चित रूप से आजादी का आदेश भरा पत्र है। इस पत्र पर तुम्हें अपने शरीर का उजला खून गिराना है। अर्थात् आजादी के लिए खून देना होगा।</p>
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<p>(8) <em>वह आगे आए, जिसके तन में</em><br />
<em>भारतीय खू बहता हो। </em><br />
<em>वह आगे आए जो अपने को</em><br />
<em>हिन्दुस्तानी कहता हो। </em><br />
<em>वह आगे आए, जो इस पर</em><br />
<em>खूनी हस्ताक्षर देता हो। </em><br />
<em>मैं कफन बढ़ाता हूँ, आए</em><br />
<em>जो इसको हँसकर लेता हो।</em></p>
<p>सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-सुभाष बाबू ने खून के हस्ताक्षर करने को पत्र आगे बढ़ाया।</p>
<p>व्याख्या-कवि कहता है कि इस पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए वही आगे बढ़ कर आये, जिसमें भारतीयता का खून हो और जो अपने आप को हिन्दुस्तानी कहने में गर्व का अनुभव करता हो। इस पत्र पर खून से हस्ताक्षर करने वाला ही आगे बढ़कर आये। उसके लिए यह कागज का पत्र नहीं, यह तो कफन है। इसे प्राप्त करने के लिए वही आगे बढे, जो हँस-हँस कर इसे ग्रहण करने में अपना गौरव अनुभव करता हो।</p>
<p>(9) <em>सारी जनता हुँकार उछी</em><br />
<em>&#8220;हम आते हैं, हम आते हैं। </em><br />
<em>माता के चरणों में यह लो,</em><br />
<em>हम अपना रक्त चढ़ाते हैं।&#8221; </em><br />
<em>साहस से बढ़े युवक उस दिन,</em><br />
<em>देखा, बढ़ते ही आते थे। </em><br />
<em>चाकू-छुरी कटारों से,</em><br />
<em>वे अपना रक्त गिराते थे।</em></p>
<p>शब्दार्थ-सारी जनता = सभी लोग। सन्दर्भ = पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-सुभाष के आह्वान पर लोग अपना बलिदान करने के लिए आगे ही आगे बढ़ते चले।</p>
<p>व्याख्या-सभी लोग जो सभास्थल पर मौजूद थे, हुँकार भरकर कहने लगे कि हम भारत माता की आजादी के लिए खून देने को आ रहे हैं। भारत की स्वतन्त्रता की देवी के चरणों में हम अपना रक्त चढ़ाने के लिए तत्पर हैं, जितना चाहते हो, ले लीजिए। युवकों में साहस था। सभी युवक उस दिन साहसपूर्वक आगे-ही-आगे बढ़ते आ रहे थे। वे सभी अपने शरीर से चाकुओं से, छुरियों से तथा कटारों से अपना रक्त गिरा रहे थे। अर्थात् अपना सर्वस्व देने में उन्हें कोई कष्ट नहीं हो रहा था (वे आजादी की वेदी पर अपना रक्त चढ़ाने के लिए तत्पर थे।)</p>
<p>(10) <em>फिर उसी रक्त की स्याही में,</em><br />
<em>वे अपनी कलम डुबाते थे।</em><br />
<em>आजादी के परवाने पर</em><br />
<em>हस्ताक्षर करते जाते थे। </em><br />
<em>उस दिन तारों ने देखा था,</em><br />
<em>हिन्दुस्तानी विश्वास नया। </em><br />
<em>जब लिखा महारणवीरों ने</em><br />
<em>खू से अपना इतिहास नया।</em></p>
<p>शब्दार्थ-परवाना = आदेश-पत्र सन्दर्भ-पूर्व की तरह।</p>
<p>प्रसंग-रक्त में अपनी कलम डुबाते हुए देशभक्त युवकों ने आजादी के परवाने पर खून से हस्ताक्षर कर दिये।</p>
<p>व्याख्या-अपने शरीर के रक्त की स्याही में कलम डुबाते हुए आजादी के उस परवाने पर सभी युवकों ने हस्ताक्षर कर दिए। उस दिन आकाश में तारों ने देखा कि हिन्दुस्तानी लोग विश्वसनीय होते हैं। उस समय रणबांकुरे भारतीय वीरों ने अपने खून से नया इतिहास लिख डाला।</p>
<p><strong>MP Board Class 6 Hindi Question Answer</strong></p>
<ul>
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</ul>
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